ब्लैक सी क्षेत्र में ओडेसा पोर्ट के करीब एक व्यापारिक पोत पर हुए ड्रोन हमले के बाद समंदर में लापता हुए दो भारतीय नाविकों की तलाश का काम जोर-शोर से चलाया जा रहा है। लापता भारतीय नागरिकों की पहचान चंद्र राम दुबे और दीपक कुमार गुप्ता के तौर पर की गई है। इस दुखद हादसे के बाद भारत में उनके परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रहने वाले नाविक के परिजनों ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और खोज अभियान में तेजी लाने की गुहार लगाई है।
ओडेसा पोर्ट के पास ड्रोन हमले की पूरी घटना
यह घटना उस वक्त हुई जब एमवी एजीएन रैग्नर नाम का कार्गो पोत एक समुद्री पायलट की देखरेख में यूक्रेन की जल सीमा से बाहर निकल रहा था। इसी दौरान पोत पर रूसी ड्रोन हमला हुआ। जिस समय यह हमला हुआ, उस वक्त जहाज पर कुल नौ क्रू मेंबर मौजूद थे, जिनमें से चार नाविक भारतीय नागरिक थे। हमले के बाद दो भारतीय सुरक्षित रहे, जबकि चंद्र राम दुबे और दीपक कुमार गुप्ता रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया।
प्रयागराज में परिजन बेहाल, सूचना मिलने में हुई देरी
प्रयागराज की रहने वाली सीमाक्षी दुबे अपने भाई चंद्र राम दुबे, जिन्हें प्यार से रामचन्द्र भी कहा जाता है, की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रार्थना कर रही हैं। सीमाक्षी का कहना है कि 25 जुलाई को जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन परिवार को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इसके बजाय 26 जुलाई की दोपहर को शिपिंग कंपनी का फोन आया और उन्हें बताया गया कि ड्रोन हमले के बाद दो नाविक लापता हैं, जिनमें उनके भाई रामचन्द्र भी शामिल हैं। तब से लेकर अब तक परिवार को कोई स्पष्ट अपडेट नहीं मिल सका है।
सर्च ऑपरेशन की अस्पष्टता से बढ़ा परिवार का दर्द
कंपनी और दूतावास की तरफ से केवल यह आश्वासन दिया जा रहा है कि सर्च ऑपरेशन जारी है, लेकिन यह खोज किस इलाके में और किस तरह की जा रही है, इसकी कोई विस्तृत जानकारी परिजनों के साथ साझा नहीं की गई है। सीमाक्षी का मानना है कि उनके भाई शायद तैरकर किसी नजदीकी किनारे तक पहुंचने में सफल रहे होंगे और संपर्क साधन न होने के कारण बात नहीं कर पा रहे हैं। बेहद भावुक होते हुए सीमाक्षी ने सवाल किया कि ढूंढने पर तो ईश्वर भी मिल जाते हैं, फिर उनके भाई का पता क्यों नहीं लगाया जा पा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि कूटनीतिक स्तर पर दबाव बनाकर भाई की तलाश जल्द पूरी करवाई जाए।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और स्थिति की जानकारी
इस पूरे मामले पर भारतीय विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि ओडेसा पोर्ट के पास हुए हमले के बाद दो भारतीय नागरिक लापता हैं और उनकी तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय राजनयिक स्थानीय अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं और बचाव कार्य से जुड़े हर घटनाक्रम की जानकारी लापता नाविकों के परिवारों को दी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नाविकों की सुरक्षा की चुनौती
ओडेसा पोर्ट पर हुआ यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी में भारत के छह वाणिज्यिक जहाज मौजूद हैं, जिन पर 125 भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न विदेशी जहाजों पर भी 41 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। वैश्विक तनाव के बीच समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिस पर केंद्र सरकार गंभीरता से ध्यान दे रही है।



















