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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर तनातनीउत्तर प्रदेश
25 सित॰ 2026, 3:17 pm (1 घंटे पहले)· 0

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर तनातनी

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के तालमेल और प्रचार अभियान पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में आने की हैट्रिक लगाने से रोकने के इरादे से विपक्षी खेमा अपनी रणनीति बनाने में जुटा है। हालांकि चुनावी रण की शुरुआत से पहले ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच उम्मीदवारी और सीटों की हिस्सेदारी को लेकर आपसी खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस खेमा गठबंधन के भीतर जल्द से जल्द सीटों के समझौते को अंतिम रूप देना चाहता है, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के मैदान में पहुंचकर चुनावी ताल ठोक दी है और गठबंधन के लिए सीट बंटवारे का अपना पैमाना सामने रख दिया है।

जीतने की क्षमता ही बनेगी उम्मीदवारी का पैमाना

अखिलेश यादव ने गठबंधन की स्थिति साफ करते हुए कहा है कि विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ मिलकर ही लड़ा जाएगा, लेकिन सीटों के आबंटन का एकमात्र बुनियादी पैमाना जीतने की क्षमता होगी। उनके अनुसार जिस भी सीट पर जिस राजनीतिक दल या उम्मीदवार के विजयी होने की वास्तविक संभावना होगी, उसी का दावा उस सीट पर वैध माना जाएगा। बीते गुरुवार को अखिलेश यादव ने रायबरेली में अपनी पीडीए रथ यात्रा निकालकर सियासी माहौल को गरमा दिया था। राहुल गांधी के राजनीतिक प्रभाव वाले इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के इस शक्ति प्रदर्शन को कांग्रेस नेतृत्व ने सहजता से नहीं लिया। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अजय राय ने कहा कि समूचा देश इस समय केवल राहुल गांधी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।

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सपा के प्रभाव वाले जिलों में कांग्रेस के प्रचार का ऐलान

चुनावी मुहिम और सीटों की दावेदारी को लेकर दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के रिश्तों में कड़वाहट साफ नजर आने लगी है। समाजवादी पार्टी की इस पीडीए रथ यात्रा को लेकर कांग्रेस की ओर से तीखे बयानों का दौर शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश यादव के इस राजनीतिक अभियान पर कटाक्ष करते हुए जवाबी रणनीति की घोषणा की है। अजय राय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी भी समाजवादी पार्टी के पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव वाले इलाकों जैसे कन्नौज, सैफई और इटावा में जाकर बड़े पैमाने पर अपना प्रचार अभियान चलाएगी।

सीटों के गणित और पुराने फार्मूले पर अटका तालमेल

दोनों दलों के इस गठबंधन में मुख्य विवाद सीटों की संख्या को लेकर पैदा हुआ है। कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में एक बड़ी और मजबूत हिस्सेदारी हासिल करने का इरादा बनाए हुए है। पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव वाले सीट शेयरिंग फार्मूले के आधार पर अपनी हिस्सेदारी चाहती है, जिसके तहत वह गठबंधन में 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छुक है। इसके विपरीत समाजवादी पार्टी राज्य की अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की पुख्ता तैयारी कर रही है। दोनों दलों ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में एक साथ उतरकर बेहद शानदार प्रदर्शन दर्ज किया था। उस संसदीय जीत के बाद से अखिलेश यादव का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी लोकसभा चुनाव जैसे ही नतीजे दोहराए जाएंगे। इसी रणनीति के तहत वे लोकसभा चुनाव की सफलता का स्मरण कराते हुए अपने पार्टी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा और उत्साह भरने में जुटे हैं।

सवाल-जवाब

सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का मुख्य विवाद क्या है?
कांग्रेस 2017 के फार्मूले के अनुसार 150 से अधिक सीटों की मांग कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी ज्यादातर सीटों पर खुद लड़ने की तैयारी में है।
अखिलेश यादव ने सीट शेयरिंग के लिए क्या फार्मूला दिया है?
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि सीटों के आबंटन का मुख्य आधार जीतने की क्षमता होगी और जिस दल या प्रत्याशी के जीतने की संभावना होगी, उसी का दावा बनेगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने क्या प्रतिक्रिया दी है?
अजय राय ने कहा कि देश केवल राहुल गांधी की ओर देख रहा है और कांग्रेस भी अखिलेश यादव के प्रभाव वाले क्षेत्रों जैसे कन्नौज, सैफई और इटावा में प्रचार करेगी।
अखिलेश यादव ने अपनी पीडीए रथ यात्रा कहां से निकाली थी?
अखिलेश यादव ने बीते गुरुवार को राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में अपनी पीडीए रथ यात्रा निकाली थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 मिनट पहले

चुनाव से पहले सीटों को लेकर इतनी खींचतान देखकर लगता नहीं कि ये लोग साथ मिलकर मजबूती से लड़ पाएंगे। जीतने की क्षमता वाला फार्मूला तो बस एक बहाना लग रहा है, असली बात सीटों की गिनती की है।

Ravikash Gupta@ravikash·34 मिनट पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही पकड़े हैं! पहले भी कई बार देखा है कि सीटों के चक्कर में ही खेल बिगड़ जाता है, जीत तो बाद की बात है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·56 मिनट पहले

चुनाव से पहले ही दोनों पार्टियां आपस में उलझ रही हैं। अगर ऐसे ही खींचतान चलती रही, तो फायदा किसी और को ही मिल जाएगा। सीट बंटवारे पर बात जल्दी सुलझानी चाहिए थी।

Rohan Verma@rohan-verma·56 मिनट पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछली बार जब मैं लखनऊ में था, तब भी कार्यकर्ताओं में ऐसी ही खींचतान देख रहा था, जमीनी स्तर पर इसका सीधा नुकसान होता है।

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