ऋषिकेश क्षेत्र में मौसम में आ रहे लगातार उतार-चढ़ाव और हालिया बारिश के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भारी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। शहर के प्रमुख अस्पतालों और क्लीनिकों की बाहरी मरीज विभाग (OPD) में इन दिनों बुखार से पीड़ित लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, OPD में इलाज के लिए पहुंचने वाले कुल मरीजों में से लगभग 70 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार के बुखार की समस्या से परेशान हैं। कई मरीज तेज शारीरिक तापमान के साथ-साथ तेज सिरदर्द, शरीर में असहनीय दर्द, काफी ज्यादा कमजोरी और ठंड लगने जैसी शिकायतों का सामना कर रहे हैं। अचानक बदलते तापमान के कारण स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
मौसम का बदलाव और गिरता स्वास्थ्य स्तर
बरसात के बाद शहर के विभिन्न इलाकों और सड़कों के किनारे पानी जमा होने के कारण स्थिति अधिक संवेदनशील बन गई है। डॉ राजकुमार (आयुष) का कहना है कि दिन के समय अत्यधिक गर्मी और उमस के तुरंत बाद होने वाली अचानक बारिश से तापमान में तीव्र परिवर्तन आ रहा है। यह उतार-चढ़ाव लोगों की शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रहा है। मौसम का यह दोहरा प्रहार मुख्य रूप से बच्चों, बुजुर्ग व्यक्तियों और पहले से ही किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। चिकित्सीय जांच के दौरान कई मरीजों में मांसपेशियों में तीव्र खिंचाव, सिर भारी होने और अत्यधिक शारीरिक थकान जैसे लक्षण प्रमुखता से देखे जा रहे हैं।
सामान्य वायरल और अन्य संक्रमणों के बीच अंतर समझना अनिवार्य
अक्सर देखा जाता है कि लोग बुखार महसूस होते ही उसे सामान्य वायरल संक्रमण मानकर घर पर ही बिना डॉक्टर से सलाह लिए दवाएं खाना शुरू कर देते हैं, जिसे चिकित्सा विशेषज्ञ बेहद खतरनाक मानते हैं। मॉनसून और बारिश के इस मौसम में केवल वायरल फीवर ही नहीं, बल्कि डेंगू, स्क्रब टाइफस और अन्य घातक संक्रामक बीमारियां भी तेजी से पैर पसार सकती हैं। प्राथमिक अवस्था में इन सभी बीमारियों के शुरुआती लक्षण एक समान प्रतीत होते हैं, जिसके कारण केवल बाहरी शारीरिक संकेतों को देखकर वास्तविक बीमारी की सटीक पहचान करना लगभग नामुमकिन होता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार कई दिनों तक तेज बुखार बना रहता है या बुखार के साथ नए लक्षण उभरते हैं, तो अविलंब योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना ही सुरक्षित मार्ग है।
डेंगू से बचाव के लिए स्वच्छता और सतर्कता है जरूरी
इस मौसम में डेंगू के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतने की सख्त आवश्यकता है। डेंगू का प्रसार करने वाले मच्छर अक्सर साफ और ठहरे हुए पानी में ही अपने अंडे देते हैं। रिहायशी क्षेत्रों में घरों के आसपास रखे फूलों के गमले, एयर कूलर, इस्तेमाल में न आ रहे पुराने बर्तन, छत पर रखे टायर तथा ऐसी कोई भी जगह जहां कई दिनों तक पानी एकत्र रहता है, वह इन मच्छरों के पनपने का मुख्य केंद्र बन जाती है। इससे बचने का सबसे कारगर उपाय यही है कि अपने घर और आसपास के वातावरण में कहीं भी जलभराव न होने दिया जाए। इसके अलावा, बाहर निकलते समय शरीर को पूरी तरह ढकने वाले परिधान पहनना और प्रभावी मॉस्किटो रिपेलेंट का उपयोग करना संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है।
स्वाइन फ्लू और श्वसन संबंधी दिक्कतों पर बरतें सावधानी
केवल मच्छर जनित बीमारियां ही नहीं, बल्कि मौसम परिवर्तन के दौरान श्वसन तंत्र से संबंधित बीमारियों और स्वाइन फ्लू का खतरा भी काफी हद तक बढ़ जाता है। यदि किसी मरीज को बुखार आने के साथ-साथ लगातार खांसी, गले में तीव्र खराश, सांस लेने में तकलीफ अथवा सामान्य से अधिक कमजोरी की अनुभूति हो रही हो, तो इसे कतई नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क स्थापित करना चाहिए। विशेष रूप से छोटे शिशुओं, वरिष्ठ नागरिकों और श्वसन संबंधी पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इन लक्षणों के प्रति बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
दैनिक जीवन में अपनाएं ये बुनियादी बचाव उपाय
संक्रमण की इस श्रृंखला को तोड़ने और अपनी सेहत को सुरक्षित रखने के लिए दैनिक जीवन में कुछ मूलभूत आदतों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। खुले स्थानों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि वे दूषित हो सकते हैं। पीने के लिए केवल उबले हुए या साफ पानी का ही इस्तेमाल करें और हाथों को बार-बार साबुन व पानी से अच्छी तरह धोते रहें। वर्षा में भीगने की स्थिति में तुरंत गीले कपड़ों को बदलें और ज्यादा देर तक नमी में रहने से बचें। यदि घर के किसी सदस्य को बुखार आता है, तो उसकी शारीरिक स्थिति की निरंतर निगरानी करें तथा आवश्यकता महसूस होने पर समय रहते रक्त परीक्षण और आवश्यक डॉक्टरी जांच अवश्य करवाएं।



















