उत्तराखंड के पहाड़ी जिले नैनीताल में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार जारी बारिश के चलते नैनीताल को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाले रास्ते जगह-जगह दरक रहे हैं और पहाड़ियों से मलबे का गिरना जारी है। पर्वतीय मार्गों के साथ-साथ अब शहर के घने आवासीय क्षेत्रों में भी भूस्खलन और जमीन खिसकने की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। तल्लीताल के कृष्णापुर क्षेत्र में स्थित त्रिमूर्ति के समीप मंगलवार शाम को अचानक जमीन का एक बड़ा हिस्सा खिसक गया, जिससे वहां रहने वाले परिवारों के बीच भारी दहशत फैल गई। इस घटना में कई मकानों की नींव के आसपास की मिट्टी ढह गई, जिससे आवासीय भवनों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
कृष्णापुर त्रिमूर्ति क्षेत्र में भूधंसाव से बढ़ा खतरा
कृष्णापुर क्षेत्र में जमीन में दरारें पड़ने का सिलसिला नया नहीं है, लेकिन इस सप्ताह हुई अनवरत मूसलाधार बारिश ने स्थिति को अति संवेदनशील बना दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ढलान पर पहले से ही बारीक दरारें नजर आ रही थीं, जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। बुधवार सुबह क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के बाद स्थिति और अधिक बिगड़ गई। बारिश के तेज पानी के बहाव में स्थानीय निवासियों के आवागमन के लिए बनाई गई पक्की सीढ़ियां पूरी तरह ध्वस्त होकर नीचे बह गईं। पैदल रास्ता पूरी तरह कट जाने के कारण वहां रहने वाले लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है।
कृष्णापुर त्रिमूर्ति के समीप स्थित इस बस्ती में वर्तमान समय में लगभग चार से पांच परिवार निवास करते हैं। पक्की सीढ़ियों के बह जाने और जमीन में गहरी दरारें आ जाने से इन सभी परिवारों के सामने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लगातार हो रहे कटाव के कारण अब किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है, जिससे क्षेत्र में लगातार डर का माहौल है।
स्थानीय निवासियों की आपबीती और बुनियादी ढांचे में खामियां
इलाके की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी डॉ. कामोदनी जोशी ने बताया कि क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ही इस भूधंसाव की मुख्य वजह बनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती बारिश के समय पैदल चलने की सीढ़ियां बची हुई थीं, लेकिन बुधवार सुबह हुई अत्यंत तेज मूसलाधार बारिश ने उन्हें भी अपने आगोश में ले लिया और पूरी सीढ़ी ढह गई। डॉ. कामोदनी जोशी के अनुसार, यहां रहने वाले चार से पांच परिवारों के जीवन पर अब हर समय खतरा बना हुआ है। हालांकि जमीन पर दरारें काफी समय पहले से दिखाई दे रही थीं, लेकिन हालिया मूसलाधार बारिश के बाद खतरा कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने यह भी उजागर किया कि क्षेत्र में बनी सीवर लाइन के रिसाव और जल निकासी की व्यवस्था सही न होने के कारण वहां स्थित रिटेनिंग दीवार काफी समय से कमजोर और कच्ची पड़ चुकी थी, जिसने जमीन खिसकने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया।
एक अन्य स्थानीय निवासी दीपा लोहनी ने भूस्खलन के खौफनाक मंजर का ब्योरा साझा किया। दीपा लोहनी के अनुसार, जब जमीन खिसकनी शुरू हुई तो ढलान पर लगा एक बिजली का पोल भी भरभराकर नीचे बह गया। इस दौरान सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई और एक बड़ा हादसा टल गया। दीपा लोहनी का कहना है कि यदि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग समय रहते यहां एक मजबूत सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) का निर्माण करवा देते तो इस खतरे को टाला जा सकता था। उन्होंने प्रशासनिक अनदेखी की ओर इशारा करते हुए बताया कि पिछले साल आई प्राकृतिक आपदा के दौरान भी क्षेत्र के पीछे की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। उस घटना के बाद किसी भी सरकारी विभाग ने दीवार की मरम्मत या पुख्ता सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी लापरवाही का नतीजा है कि इस बार की बारिश में क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और लोग अपने आशियाने को बचाने के लिए चिंतित हैं।
प्रशासनिक निरीक्षण और प्रभावितों को शिफ्ट करने की कार्रवाई
नैनीताल में बिगड़ते हालात और कृष्णापुर में हुए भूधंसाव पर जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उप जिलाधिकारी (एसडीएम) नावाज़िश ख़ालिक ने क्षेत्र का जायजा लेते हुए बताया कि नैनीताल जनपद में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। कृष्णापुर त्रिमूर्ति के समीप हुए भूस्खलन के कारण एक मकान पूरी तरह से खतरे की जद में आ चुका है, जिसकी नींव के नीचे से मिट्टी खिसक गई है। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की एक विशेष टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पूरी स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया।
एसडीएम नावाज़िश ख़ालिक ने बताया कि मौके पर मौजूद खतरे को देखते हुए प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित (शिफ्ट) करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ परिवार फिलहाल अपने घरों को छोड़कर अस्थायी शिविरों में जाने से कतरा रहे हैं। एसडीएम ने जोर देकर कहा कि प्रशासन के लिए आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि बारिश की स्थिति ऐसे ही बनी रहती है और खतरा बढ़ता है, तो प्रशासन इन परिवारों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनिवार्य रूप से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करवाएगा।
सुरक्षा कार्यों का प्रस्ताव और आलूखेत क्षेत्र में बढ़ता संकट
भूधंसाव को रोकने और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए स्थायी निर्माण कार्यों की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। एसडीएम नावाज़िश ख़ालिक ने बताया कि नगर पालिका के कनिष्ठ अभियंता (जेई) को तुरंत दुर्घटना स्थल का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। जेई को निर्देश दिया गया है कि वे कृष्णापुर में रिटेनिंग दीवार और ढलान स्थिरीकरण के लिए सुरक्षात्मक कार्यों का विस्तृत प्रस्ताव जल्द से जल्द तैयार करें। इस तकनीकी प्रस्ताव को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिलते ही धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा ताकि भविष्य में होने वाले कटाव को रोका जा सके।
नैनीताल शहर में भूस्खलन का खतरा केवल कृष्णापुर तक ही सीमित नहीं है। नैनीताल के आलूखेत क्षेत्र में भी लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और जमीन धंसने का संकट काफी बढ़ गया है। जिला प्रशासन आलूखेत की स्थिति पर भी चौबीसों घंटे कड़ी नजर बनाए हुए है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि आलूखेत में भी स्थिति बिगड़ती है या रिहायशी मकानों पर खतरा आता है, तो वहां के निवासियों को भी तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया जाएगा। पहाड़ों में खराब मौसम और मूसलाधार बारिश के अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने अति संवेदनशील और ढलान वाले इलाकों में रह रहे सभी निवासियों से पूरी तरह सतर्क रहने और पुलिस व प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।



















