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पितृ पक्ष में क्यों त्यागते हैं प्याज-लहसुन और तीखा भोजन? जानिए धार्मिक नियम और ज्योतिषाचार्य अखिलेश पांडेय की सलाहउत्तराखंड
12 सित॰ 2026, 2:24 pm (55 दिन पहले)· 0

पितृ पक्ष में क्यों त्यागते हैं प्याज-लहसुन और तीखा भोजन? जानिए धार्मिक नियम और ज्योतिषाचार्य अखिलेश पांडेय की सलाह

पितृ पक्ष के दौरान मांसाहार, प्याज, लहसुन, नशा और बासी भोजन से दूरी बनाने की परंपरा है। ज्योतिषाचार्य अखिलेश पांडेय के अनुसार, इस पखवाड़े में सात्विक आहार और शांत मन से पूर्वजों का तर्पण करने से मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है।

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की अवधि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। यह पखवाड़ा पूरी तरह से पूर्वजों को याद करने, उनके निमित्त तर्पण करने और श्राद्ध कर्म निभाने के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों घर के वातावरण के साथ-साथ खानपान में भी पूर्ण सात्विकता और पवित्रता बनी रहनी चाहिए। इस दौरान व्यक्ति के आहार और आचरण का उसके मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि पितृ पक्ष का आगमन होते ही अधिकांश हिंदू परिवारों में रसोई से लेकर व्यक्तिगत आदतों तक में कई कड़े नियम लागू कर दिए जाते हैं, ताकि पितरों की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले अनुष्ठान बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकें।

पितृ पक्ष में खानपान के सात्विक नियम

ऋषिकेश के ज्योतिषाचार्य अखिलेश पांडेय के अनुसार, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक कार्यों को करते समय शरीर और मस्तिष्क का शांत एवं संतुलित रहना अनिवार्य होता है। इसी कारण से पितृ पक्ष के दौरान मांसाहारी भोजन जैसे मांस, मछली और अंडे के साथ-साथ शराब जैसे हर प्रकार के नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहने का निर्देश दिया जाता है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में माना गया है कि इस तरह के खाद्य पदार्थ शरीर में उत्तेजना और मन में अशुद्धि उत्पन्न करते हैं। देश भर में कई परिवार पूरे सोलह दिनों के पितृ पक्ष के दौरान इन चीजों से पूर्ण परहेज रखते हैं। वहीं, कुछ परिवारों में यह नियम विशेष रूप से उस दिन कड़ाई से निभाया जाता है, जिस दिन उनके अपने पूर्वज का विशिष्ट श्राद्ध संपन्न होना होता है।

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प्याज और लहसुन से दूरी का धार्मिक कारण

पितृ पक्ष की अवधि में केवल मांसाहार ही नहीं, बल्कि लहसुन और प्याज के सेवन पर भी व्यापक रोक देखी जाती है। धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं में प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि तामसिक खाद्य पदार्थों के सेवन से मनुष्य के भीतर आलस्य, क्रोध और कामुक विचारों की वृद्धि होती है, जो पूजा-पाठ और आत्मचिंतन के वातावरण में बाधा बनते हैं। यही कारण है कि इस समय घर में बनने वाले भोजन में दाल, चावल, ताजी सब्जियां, फल, दूध और दही जैसे सात्विक एवं सुपाच्य घटकों का ही प्रयोग किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग परिवारों में स्थानीय परंपराओं के आधार पर इन नियमों के पालन का तरीका भिन्न हो सकता है, जहां कुछ लोग पूरे पखवाड़े प्याज-लहसुन का त्याग करते हैं तो कुछ केवल श्राद्ध वाले दिन ही इसका परहेज करते हैं।

ताजे भोजन का महत्व और मिर्च-मसालों का परहेज

खानपान के नियमों में केवल सामग्री ही नहीं, बल्कि भोजन की ताजगी और उसकी प्रकृति का भी ध्यान रखा जाता है। पितृ पक्ष के दौरान ताजे और सादे बने भोजन को ही सर्वोपरि माना गया है। कई घरों में बासी खाना खाने से पूरी तरह से बचा जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि भोजन हमेशा ताजा तैयार करके ही परोसा जाए। इसके अलावा, बहुत अधिक तेल, तीखी मिर्च और तेज मसालों से बने पकवानों से भी दूरी बनाई जाती है। धार्मिक मान्यता यह है कि श्राद्ध के दिनों में जितना सादा और सुपाच्य खाना खाया जाएगा, मन उतना ही एकाग्र और विचार उतने ही पवित्र रहेंगे। इसलिए इस दौरान हल्का और घर का बना सात्विक भोजन करना ही सबसे उत्तम माना जाता है।

व्यवहार और दिनचर्या में संयम की आवश्यकता

पितृ पक्ष केवल भोजन के नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत व्यवहार और जीवनशैली में भी संयम लाने का समय है। ज्योतिषाचार्य अखिलेश पांडेय स्पष्ट करते हैं कि इस समय में शराब, तंबाकू और अन्य नशीली वस्तुओं के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके साथ ही घर के भीतर का वातावरण हमेशा शांत, सुखद और प्रेमपूर्ण बनाए रखने की सलाह दी जाती है। इन दिनों में किसी भी प्रकार के पारिवारिक विवाद, लड़ाई-झगड़े या अपशब्दों के प्रयोग से बचना आवश्यक माना जाता है। चूंकि पितृ पक्ष को आत्ममंथन और पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की अवधि माना गया है, इसलिए इन दिनों में मन को शांत, विचारशील और सकारात्मक रखना ही सच्ची श्रद्धा माना जाता है।

सवाल-जवाब

पितृ पक्ष में मांसाहार और शराब से दूरी क्यों जरूरी मानी जाती है?
ज्योतिषाचार्य अखिलेश पांडेय के अनुसार, श्राद्ध के दौरान शरीर और मन को शांत रखना अनिवार्य होता है। मांसाहार और नशीले पदार्थों से मन में अशुद्धि और उत्तेजना पैदा होती है, इसलिए इनसे बचने की सलाह दी जाती है।
क्या प्याज और लहसुन का परहेज पूरे पितृ पक्ष में करना पड़ता है?
कई परिवारों में पूरे सोलह दिनों तक प्याज और लहसुन का त्याग किया जाता है, जबकि कुछ घरों में केवल श्राद्ध वाले दिन ही इसका परहेज किया जाता है।
प्याज और लहसुन को धार्मिक दृष्टि से क्या माना गया है?
पारंपरिक मान्यताओं में प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है, जो मन की एकाग्रता और सात्विकता में बाधा डालते हैं।
पितृ पक्ष के दौरान किस प्रकार का भोजन सबसे उपयुक्त माना जाता है?
इस दौरान घर का बना ताजा, हल्का और सात्विक भोजन जैसे दाल, चावल, सब्जियां, फल, दूध और दही सबसे उत्तम माना जाता है।
पितृ पक्ष में व्यवहार से जुड़े कौन से नियम अपनाए जाने चाहिए?
इस समय घर में शांत माहौल रखना चाहिए, नशीली वस्तुओं से दूर रहना चाहिए और किसी भी तरह के झगड़े या विवाद से बचना चाहिए।
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