उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में फर्जी स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला पाने का एक नया मामला प्रकाश में आया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि धर्मवीर वर्मा नामक स्वतंत्रता सेनानी के नाम का गलत इस्तेमाल करके एक और अभ्यर्थी ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल कर लिया है। इस खुलासे के बाद अकेले इसी एक नाम के सहारे कुल छह दाखिले होने की बात सामने आ चुकी है, जिससे राज्य की चिकित्सा शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर अब विभिन्न स्तरों पर उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है, जबकि प्रशासन पहले ही इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर चुका है। गौर करने वाली बात यह है कि इस विवादित मामले में पहले से ही दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं जिनमें पांच महिलाओं को आरोपी बनाया गया है।
नीट-यूजी काउंसलिंग और दस्तावेजों की जांच
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में नीट-यूजी 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के अंतर्गत कुल 9 एमबीबीएस सीटें आवंटित की गई थीं। इनमें से पांच अभ्यर्थियों ने इन सीटों पर बाकायदा प्रवेश भी ले लिया था। जब इस पूरी प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आईं तो जिला प्रशासन हरकत में आया और दस्तावेजों की गहन जांच का सिलसिला शुरू किया गया। एडीएम प्रशासन स्मृता परमार के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने परी, खुशी, स्वाति और तृप्ति नामक अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और कोटे से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किया। प्रशासनिक जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि इन चारों अभ्यर्थियों के प्रवेश के लिए जो प्रमाण पत्र इस्तेमाल किए गए थे, उनमें धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का स्वतंत्रता संग्राम परिचय पत्र लगाया गया था जो कि पूरी तरह से संदेहास्पद पाया गया।
प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद दाखिले हुए निरस्त
जांच में गड़बड़ी साबित होने और प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने के बाद हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपित अभ्यर्थियों के एमबीबीएस दाखिले तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए। प्रवेश रद्द होने के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत औपचारिक रूप से पुलिस को सौंपी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की आपराधिक जांच शुरू कर दी है। देहरादून के क्लेमनटाउन थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे में तृप्ति और उसकी मां उमा देवी को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा रायपुर थाने में दर्ज दूसरे मुकदमे में खुशी, परी और स्वाति को आरोपी के तौर पर शामिल किया गया है। इस प्रकार इन दोनों मुकदमों के दायरे में कुल पांच महिलाएं आ चुकी हैं। पुलिस प्रशासन फिलहाल आरोपियों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों, आधार कार्ड, आवेदन पत्रों और अन्य प्रमाण पत्रों की बारीकी से सत्यता परखने में जुटा हुआ है ताकि इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।























