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उत्तराखंड में फर्जी स्वतंत्रता सेनानी कोटे से एमबीबीएस एडमिशन का नया मामला, एक ही नाम पर छह दाखिलेउत्तराखंड
17 सित॰ 2026, 10:19 am (1 दिन पहले)· 0

उत्तराखंड में फर्जी स्वतंत्रता सेनानी कोटे से एमबीबीएस एडमिशन का नया मामला, एक ही नाम पर छह दाखिले

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में फर्जी स्वतंत्रता सेनानी कोटे का इस्तेमाल कर एमबीबीएस में दाखिला लेने का एक और मामला सामने आया है। एक ही नाम पर अब तक कुल छह एडमिशन होने की बात सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में फर्जी स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला पाने का एक नया मामला प्रकाश में आया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि धर्मवीर वर्मा नामक स्वतंत्रता सेनानी के नाम का गलत इस्तेमाल करके एक और अभ्यर्थी ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल कर लिया है। इस खुलासे के बाद अकेले इसी एक नाम के सहारे कुल छह दाखिले होने की बात सामने आ चुकी है, जिससे राज्य की चिकित्सा शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर अब विभिन्न स्तरों पर उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है, जबकि प्रशासन पहले ही इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर चुका है। गौर करने वाली बात यह है कि इस विवादित मामले में पहले से ही दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं जिनमें पांच महिलाओं को आरोपी बनाया गया है।

नीट-यूजी काउंसलिंग और दस्तावेजों की जांच

राज्य के मेडिकल कॉलेजों में नीट-यूजी 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के अंतर्गत कुल 9 एमबीबीएस सीटें आवंटित की गई थीं। इनमें से पांच अभ्यर्थियों ने इन सीटों पर बाकायदा प्रवेश भी ले लिया था। जब इस पूरी प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आईं तो जिला प्रशासन हरकत में आया और दस्तावेजों की गहन जांच का सिलसिला शुरू किया गया। एडीएम प्रशासन स्मृता परमार के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने परी, खुशी, स्वाति और तृप्ति नामक अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और कोटे से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किया। प्रशासनिक जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि इन चारों अभ्यर्थियों के प्रवेश के लिए जो प्रमाण पत्र इस्तेमाल किए गए थे, उनमें धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का स्वतंत्रता संग्राम परिचय पत्र लगाया गया था जो कि पूरी तरह से संदेहास्पद पाया गया।

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प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद दाखिले हुए निरस्त

जांच में गड़बड़ी साबित होने और प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने के बाद हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपित अभ्यर्थियों के एमबीबीएस दाखिले तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए। प्रवेश रद्द होने के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत औपचारिक रूप से पुलिस को सौंपी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की आपराधिक जांच शुरू कर दी है। देहरादून के क्लेमनटाउन थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे में तृप्ति और उसकी मां उमा देवी को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा रायपुर थाने में दर्ज दूसरे मुकदमे में खुशी, परी और स्वाति को आरोपी के तौर पर शामिल किया गया है। इस प्रकार इन दोनों मुकदमों के दायरे में कुल पांच महिलाएं आ चुकी हैं। पुलिस प्रशासन फिलहाल आरोपियों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों, आधार कार्ड, आवेदन पत्रों और अन्य प्रमाण पत्रों की बारीकी से सत्यता परखने में जुटा हुआ है ताकि इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

सवाल-जवाब

यह मामला उत्तराखंड में कहाँ सामने आया है?
यह मामला राज्य की राजधानी देहरादून में सामने आया है।
किस कोटे के तहत फर्जी दाखिले लिए गए थे?
दाखिले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत लिए गए थे।
धर्मवीर वर्मा के नाम पर कुल कितने दाखिले होने की बात सामने आई है?
धर्मवीर वर्मा के नाम पर अब तक कुल 6 एडमिशन होने की जानकारी मिली है।
किस विश्वविद्यालय ने दाखिले रद्द किए हैं?
एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने चारों अभ्यर्थियों के एमबीबीएस दाखिले रद्द किए हैं।
किन थानों में इस मामले में मुकदमे दर्ज किए गए हैं?
क्लेमनटाउन और रायपुर थाने में इस मामले में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

यह मामला राज्य के प्रशासनिक ढांचे और कोटा सत्यापन प्रक्रिया की गंभीर खामियों को उजागर करता है। एक ही स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण पत्र पर बार-बार दाखिला होना बिना किसी व्यवस्थागत लापरवाही या सांठगांठ के संभव नहीं है। प्रशासनिक कार्रवाई और प्रवेश रद्द करना प्राथमिक कदम हैं, लेकिन सरकार को केवल मुकदमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने और योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोटा प्रमाण पत्रों के केंद्रीय डिजिटल सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की सख्त जरूरत है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

अर्जुन की बात से आगे बढ़ते हुए, यह फर्जीवाड़ा केवल प्रशासनिक ढिलाई नहीं बल्कि संस्थागत साख पर बड़ा प्रहार है। एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम का छह बार गलत इस्तेमाल होना यह दर्शाता है कि दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया में बैकएंड डेटाबेस क्रॉस-चेकिंग का पूरी तरह अभाव था। केवल मौजूदा दाखिले रद्द करना काफी नहीं है; राज्य चिकित्सा शिक्षा विभाग को पिछले कुछ वर्षों में आरक्षित कोटे से हुए सभी आवंटनों का फॉरेंसिक ऑडिट कराना चाहिए। भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकने के लिए काउंसलिंग से पहले ही जिला प्रशासन और अभिलेखागार के डिजिटल पोर्टल से लाइव वेरिफिकेशन अनिवार्य करना होगा ताकि योग्य अभ्यर्थियों का हक न मारा जाए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी कोटे के तहत एमबीबीएस दाखिलों में एक ही नाम पर छह फर्जी प्रवेश सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था और सत्यापन प्रणाली की बड़ी चूक को उजागर करता है। हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय द्वारा दाखिले रद्द करने और क्लेमनटाउन व रायपुर थानों में मुकदमे दर्ज होने के बाद, अब पुलिस के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह उन बिचौलियों और दस्तावेजों के फर्जीवाड़े में शामिल सिंडिकेट की गहराई से जांच करे, जिन्होंने मेडिकल काउंसलिंग के दौरान इस कोटे का दुरुपयोग किया।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

यह प्रकरण केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि कोटे के सत्यापन तंत्र में बैठी सांठगांठ की ओर इशारा करता है। जब तक काउंसलिंग बोर्ड और स्थानीय प्रशासन अपने स्तर पर दस्तावेजों के क्रॉस-वेरिफ़िकेशन को पारदर्शी नहीं बनाते, तब तक ऐसे सिंडिकेट सक्रिय रहेंगे। इस मामले में पुलिस को उन एजेंटों तक पहुँचना होगा जिन्होंने एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम का बार-बार इस्तेमाल करने का यह षड्यंत्र रचा।

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