देहरादून में खाली होने जा रही राज्यसभा की एक सीट को लेकर राज्य के सियासी गलियारों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य विधानसभा में मजबूत संख्या बल के कारण इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा भारी है और पार्टी प्रत्याशी की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश संगठन ने गहन मंथन के बाद 15 संभावित प्रत्याशियों के नामों की एक फेहरिस्त तैयार करके केंद्रीय नेतृत्व को प्रेषित कर दी है। अब पार्टी आलाकमान की ओर से अधिकृत उम्मीदवार के नाम का ऐलान किसी भी क्षण किया जा सकता है।
कुमाऊं के वरिष्ठ स्वयंसेवक पर दांव लगाने की चर्चा
पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, संगठन इस बार क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत कुमाऊं मंडल के किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व को संसद के उच्च सदन भेजने की मजबूत संभावना बन रही है। इस दौड़ में कुमाऊं क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले एक ऐसे वरिष्ठ नेता का नाम सबसे प्रमुखता से उभर रहा है जो वैश्य समाज से आते हैं और लंबे अरसे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि केंद्रीय नेतृत्व इस नाम को हरी झंडी देता है, तो इससे समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलने के साथ-साथ जातीय समीकरणों को भी मजबूती मिलेगी।
नामांकन से लेकर परिणाम तक का विस्तृत कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित चुनावी समय-सारिणी के तहत प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी। उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर तय की गई है। इसके अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी। नाम वापस लेने के इच्छुक प्रत्याशी 9 अक्टूबर तक अपना पर्चा वापस ले सकेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू कर दी जाएगी।
विधानसभा में संख्या बल और दिल्ली में अंतिम फैसला
उत्तराखंड विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या इतनी मजबूत है कि इस चुनाव में पार्टी प्रत्याशी की निर्विरोध या एकतरफा जीत तय समझी जा रही है। यही वजह है कि प्रदेश इकाई द्वारा सूची भेजे जाने के बाद सबकी निगाहें अब नई दिल्ली में जुटने वाली केंद्रीय चुनाव समिति पर टिकी हैं। केंद्रीय नेतृत्व की बैठक में ही इस बात पर अंतिम मुहर लगेगी कि संसद के उच्च सदन में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।





















