उत्तराखंड के लोकप्रिय पर्वतीय पर्यटन स्थल नैनीताल और निकटवर्ती बाबा नीम करौली महाराज के कैंची धाम में गांधी जयंती के बाद विस्तारित सप्ताहांत के दौरान पर्यटकों का अप्रत्याशित जमावड़ा देखा गया। इस अवकाश के दौरान 35,000 से अधिक पर्यटक सरोवर नगरी पहुंचे, जबकि 7,500 से ज्यादा वाहनों के प्रवेश ने समूची घाटी की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। शहर की माल रोड, मल्लीताल, तल्लीताल और भोटिया मार्केट जैसे प्रमुख वाणिज्यिक एवं भ्रमण स्थलों पर पैर रखने की जगह नहीं बची। पार्किंग स्थल अपनी क्षमता से अधिक भर जाने के कारण पहाड़ियों की संकरी सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम लग गए, जिसने स्थानीय नागरिकों के दैनिक जनजीवन को पंगु बना दिया।
स्थानीय नागरिकों की दैनिक आवाजाही पर गंभीर प्रभाव
सैलानियों की भारी आमद के कारण आम नागरिकों का सामान्य आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। स्थानीय निवासी मोहन चंद्र पांडे ने बताया कि छुट्टियों के बाद सामने आए आंकड़ों से पता चला कि शहर में 35 हजार से अधिक लोग पहुंचे थे। नैनीताल की भौगोलिक बनावट बेहद संवेदनशील है, जहां सड़कें बेहद संकरी हैं और वाहनों के ठहराव के लिए स्थान अत्यंत सीमित है। एक साथ हजारों गाड़ियों के आ जाने से निवासियों का अपने घरों से बाहर निकलना तक दूभर हो गया। गांधी जयंती और श्राद्ध पक्ष के दिनों में लोगों को अपने जरूरी गंतव्यों तक पहुंचने में असाधारण बाधाओं का सामना करना पड़ा।
यातायात अव्यवस्था के कारण परिवहन व्यय में भी अप्रत्याशित उछाल देखा गया। मोहन पांडे के अनुसार, उनके बच्चों को हल्द्वानी जाने के लिए लगभग 500 रुपये का किराया चुकाना पड़ा, जबकि भवाली से नैनीताल के छोटे से सफर के लिए करीब 300 रुपये खर्च करने पड़े। इस स्थिति को देखते हुए यह मांग जोर पकड़ रही है कि समूचे पर्यटन भार को केवल नैनीताल और कैंची धाम पर केंद्रित रखने के बजाय आसपास के अन्य पर्वतीय स्थलों को विकसित किया जाए, ताकि पर्यटकों का दबाव समान रूप से वितरित हो सके।
चंद किलोमीटर का फासला तय करने में लगे तीन घंटे
शहर के भीतर यातायात की गति इतनी धीमी हो गई कि लोगों को एक से तीन किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों बिताने पड़े। स्थानीय निवासी इमरान ने बताया कि वह बचपन से इस शहर में रह रहे हैं और छुट्टियों में भीड़ देखना उनके लिए सामान्य बात रही है, लेकिन इस बार के हालात बेहद तनावपूर्ण रहे। मल्लीताल से तल्लीताल के बीच महज एक से तीन किलोमीटर की दूरी पार करने में वाहनों को तीन घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया।
इस जाम ने शहर की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी। इमरान ने चिंता जाहिर करते हुए बताया कि नैनीताल में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा के लिए अक्सर हल्द्वानी ले जाना पड़ता है। जब मुख्य मार्गों पर वाहनों की कतारें लग जाती हैं, तो ऐसे नाजुक समय में मरीजों का जीवन दांव पर लग जाता है। भीड़ के दौरान कई एंबुलेंस भी जाम में फंसी दिखाई दीं, जिससे आपातकालीन राहत कार्यों में भारी व्यवधान पड़ा।
व्यापार मंडल और बुद्धिजीवियों ने उठाए बुनियादी ढांचे पर सवाल
मां नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने कहा कि केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि को पर्यटन का वास्तविक विकास मान लेना एक भ्रामक दृष्टिकोण है। उनके अनुसार, हजारों लोगों की अनियंत्रित उपस्थिति को प्रगति का पैमाना नहीं बनाया जा सकता, खासकर तब जब बुनियादी ढांचा इस भार को संभालने में अक्षम साबित हो रहा हो। नैनीताल को जोड़ने वाली सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आवश्यक परिणाम सामने नहीं आए हैं।
पुनीत टंडन ने रेखांकित किया कि कैंची धाम की ख्याति देश-दुनिया में तेजी से बढ़ी है, परंतु इसके समानांतर भीड़ नियंत्रण के लिए वैकल्पिक मार्गों, बाईपास और व्यवस्थित यातायात योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारा गया। जब भी शहर में क्षमता से अधिक पर्यटक उमड़ते हैं, उसका सीधा खामियाजा स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ता है। घंटों लंबे जाम में फंसे रहना अब शहरवासियों के लिए रोजमर्रा की परेशानी से बढ़कर एक मानसिक सजा का रूप लेता जा रहा है।
शिक्षा जगत से जुड़े प्रो. अजय रावत ने भी इस अनियंत्रित भीड़ पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उन्हें एक निर्धारित लेक्चर देने के लिए जाना था, परंतु सड़कों पर लगे भीषण जाम के कारण वे खुद घंटों फंसे रह गए। प्रो. रावत ने कैंची धाम में पर्यटन के बदलते स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर की ओर आने वाले कई लोग वास्तविक आध्यात्मिक साधना के स्थान पर सोशल मीडिया रील और सामग्री तैयार करने के उद्देश्य से पहुंच रहे हैं। इस प्रवृत्ति से धाम की मर्यादा और सच्चे श्रद्धालुओं की आस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
कचरा प्रबंधन पर भारी दबाव और होटलों की कमी
पर्यटकों के इस सैलाब ने शहर की स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को चरम सीमा पर पहुंचा दिया। नैनीताल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा के अनुसार, विस्तारित सप्ताहांत के दौरान शहर में कचरे का उत्पादन सामान्य दिनों की तुलना में लगभग ढाई गुना तक बढ़ गया। आम दिनों में जहां पूरे नैनीताल से प्रतिदिन करीब 7 से 8 टन कचरा निकलता है, वहीं इस अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर प्रतिदिन लगभग 15 से 16 टन तक पहुंच गया।
सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए नगर पालिका को 24 घंटे लगातार कचरा ढोने वाले वाहन संचालित करने पड़े और डोर-टू-डोर कचरा संग्रह करने वाले स्वच्छता कर्मियों को अतिरिक्त पाली में कार्य करना पड़ा। इसके बावजूद नगर के लगभग सभी कूड़ेदान पूरी तरह भर चुके थे। आवास की कमी के कारण सैकड़ों पर्यटकों को होटल के कमरे नहीं मिल सके, जिसके चलते कई लोगों ने अपनी कारों में ही रात बिताई। वाहनों में रात गुजारने के कारण सड़कों और खुले स्थानों पर गाड़ियों से निकलने वाले कचरे का नया संकट भी सामने आया।
नैनीताल पहुंचे 7,500 से अधिक वाहनों और खचाखच भरे पार्किंग स्थलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पर्वतीय नगर की वहन क्षमता अब अपनी अंतिम सीमा पर पहुंच चुकी है। स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन व्यापार का विस्तार आवश्यक है, लेकिन अनियंत्रित भीड़ को रोकने के लिए ठोस नीतियां बनाई जानी चाहिए। ठोस कचरा प्रबंधन, सुदृढ़ पार्किंग, व्यवस्थित ट्रैफिक प्लान और वैकल्पिक स्थलों का प्रचार किए बिना इस नाजुक पहाड़ी तंत्र पर बढ़ता दबाव भविष्य में पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों के लिए संकट बन जाएगा।
























