देवघर के ग्रामीण इलाकों में आजकल कई युवा अपने घर के पास ही रहकर खुद का काम शुरू करने की इच्छा रखते हैं। यदि आप भी सीमित बजट में किसी नए काम की तलाश में हैं, तो मुर्गी पालन आपके लिए एक बहुत ही बढ़िया विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि इस कारोबार को मैदान में उतारने से पहले यह समझ लेना आवश्यक है कि किस नस्ल का चुनाव किया जाए। सही नस्ल का चयन ही यह तय करता है कि भविष्य में आपको मुनाफा होगा या नुकसान। बाजार में कई प्रजातियों की मुर्गियां मिलती हैं, लेकिन कई बार युवा बिना पूरी जानकारी के बड़ी संख्या में पक्षी ले आते हैं और बाद में बीमारी, अधिक मृत्यु दर और खर्च बढ़ने के कारण मुश्किल में फंस जाते हैं। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह यही रहती है कि काम की शुरुआत हमेशा कम संख्या से की जानी चाहिए।
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के जो युवा इस क्षेत्र में उतरना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले देसी मुर्गी पालन से ही शुरुआत करनी चाहिए। विशेषकर देवघर के ग्रामीण तथा आदिवासी अंचलों में घरों के आसपास पाली जाने वाली देसी मुर्गियां बेहद कम खर्च में आसानी से पल जाती हैं। इन पक्षियों में प्राकृतिक रूप से बीमारियों से मुकाबला करने की ताकत काफी अच्छी होती है, जिससे इनके बीमार पड़ने या मरने का खतरा व्यावसायिक नस्लों की तुलना में काफी कम रहता है। इसके अलावा देसी मुर्गी पालन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें शुरुआती लागत ज्यादा नहीं बैठती है। घरों में बचा हुआ भोजन और स्थानीय स्तर पर मिलने वाला दाना इनके आहार के रूप में आसानी से उपयोग किया जा सकता है। बाजार में भी देसी मुर्गी के मांस और अंडों की हमेशा अच्छी मांग बनी रहती है और कई स्थानों पर इनके दाम सामान्य मुर्गियों के मुकाबले बेहतर मिलते हैं।
डॉ. पूनम सोरेन का यह भी सुझाव है कि नए लोगों को एक साथ भारी संख्या में मुर्गियों को नहीं पालना चाहिए। इसके बजाय शुरुआती दौर में मात्र 10 से 20 देसी मुर्गियों के साथ काम शुरू करना बेहतर रहता है। इससे पक्षियों की देखभाल करने, उन्हें समय पर दाना देने, शेड की साफ-सफाई रखने और बीमारियों से सुरक्षित रखने के तौर-तरीके आसानी से समझ आ जाते हैं। जब काम का पर्याप्त अनुभव हो जाए, तब अपनी वित्तीय क्षमता के आधार पर इनकी संख्या को बढ़ाया जा सकता है। वहीं, जो युवा थोड़े बड़े पैमाने पर इस व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहते हैं, वे सोनाली, कड़कनाथ, ग्रामप्रिया और बनराजा जैसी लोकप्रिय नस्लों के बारे में भी जानकारी जुटा सकते हैं। इसके साथ ही ब्रायलर मुर्गी पालन भी कम समय में तैयार होकर बिकने के कारण कमाई का एक अच्छा माध्यम बन सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यदि एक हजार ब्रायलर मुर्गियों के बैच में उचित प्रबंधन किया जाए और बाजार भाव अच्छा मिले, तो लगभग 25 हजार से 40 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमाया जा सकता है।
मुनाफे का पूरा गणित और सावधानी
मुर्गी पालन में होने वाली कुल कमाई पूरी तरह से नस्ल की गुणवत्ता, दाने के खर्च, बीमारियों से बचाव के उपायों, मृत्यु दर, मौजूदा बाजार भाव और काम करने के तरीके पर निर्भर करती है। यही वजह है कि हमेशा छोटे पैमाने से शुरुआत करने, पहले तौर-तरीके सीखने और उसके बाद धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार करने की सलाह दी जाती है। यदि पूरी जानकारी और उचित देखभाल के साथ आगे बढ़ा जाए, तो मुर्गी पालन ग्रामीण युवाओं के लिए घर बैठे आत्मनिर्भर बनने का एक मजबूत जरिया बन सकता है।























