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ईरान ने स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका से वार्ता निलंबित की, होर्मुज़ बंद होने से बाज़ारों में रिस्क-ऑफ का माहौलदुनिया
22 जून 2026, 4:18 am (45 दिन पहले)· 5

ईरान ने स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका से वार्ता निलंबित की, होर्मुज़ बंद होने से बाज़ारों में रिस्क-ऑफ का माहौल

ईरानी वार्ताकारों ने स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका के साथ चल रही उच्च-स्तरीय बातचीत को रोक दिया है, जबकि शनिवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के बाद सोमवार को वैश्विक बाज़ारों में घबराहट फैल गई।

स्विट्ज़रलैंड में वार्ता ठप, दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा

स्विट्ज़रलैंड में चल रही ईरान-अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक बातचीत अचानक रुक गई है। ईरानी वार्ताकारों ने वहां से कदम पीछे खींच लिए, जिससे पहले से ही नाज़ुक यह स्थिति और उलझ गई। इससे पहले शनिवार को ईरान ने इज़रायल के लेबनान पर हमलों का जवाब देते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया था, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है।

सोमवार को बाज़ारों पर दिखा तनाव का असर

इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर सोमवार की साप्ताहिक शुरुआत पर साफ दिखा। निवेशकों के मूड का पैमाना माने जाने वाले अमेरिकी S&P 500 फ्यूचर्स 0.30% नीचे खुले। जानकारों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) और WTI क्रूड ऑयल में नई खरीदारी आ सकती है।

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'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ' का मतलब क्या है?

वित्तीय बाज़ारों में दो शब्द बहुत प्रचलित हैं, 'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ'। ये बताते हैं कि किसी खास वक्त में निवेशक कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं। जब बाज़ार 'रिस्क-ऑन' मोड में होता है तो निवेशक आर्थिक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और शेयरों, कमोडिटी व क्रिप्टोकरेंसी जैसी जोखिम भरी संपत्तियों में पैसा लगाते हैं।

'रिस्क-ऑफ' माहौल में तस्वीर पलट जाती है। निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल पड़ते हैं और सरकारी बॉन्ड, सोना तथा स्थिर मुद्राओं में पैसा लगाते हैं, भले ही उनसे रिटर्न कम हो।

'रिस्क-ऑन' दौर में शेयर बाज़ार चढ़ते हैं, सोने को छोड़कर ज़्यादातर कमोडिटी महंगी होती हैं और कच्चे माल के निर्यात पर निर्भर देशों की मुद्राएं मज़बूत होती हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD), न्यूज़ीलैंड डॉलर (NZD) और मामूली मुद्राएं जैसे रूसी रूबल (RUB) तथा दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) इसीलिए 'रिस्क-ऑन' बाज़ार में तेज़ी दिखाती हैं, क्योंकि इन देशों की अर्थव्यवस्था कमोडिटी निर्यात पर टिकी है और आर्थिक गतिविधि बढ़ने पर कच्चे माल की मांग भी बढ़ती है।

'रिस्क-ऑफ' के दौरान तीन मुद्राएं सबसे ज़्यादा मज़बूत होती हैं: अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF)। डॉलर दुनिया की आरक्षित मुद्रा है और संकट में अमेरिकी सरकारी बॉन्ड को सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट करने की संभावना बेहद कम है। जापानी येन को इसलिए सुरक्षित माना जाता है क्योंकि जापानी सरकारी बॉन्ड का बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों के पास है, जो संकट में भी इन्हें बेचने से बचते हैं। स्विस फ्रैंक की मज़बूती स्विट्ज़रलैंड के कड़े बैंकिंग कानूनों में है, जो निवेशकों को पूंजी की अतिरिक्त सुरक्षा देते हैं।

मुद्रा बाज़ार में क्या हुआ?

GBP/USD ने 1.3160 के करीब तल बनाने के बाद हफ्ते के अंत में 1.3200 से ऊपर वापसी की। ब्रिटेन के रिटेल सेल्स के आंकड़े अनुमान से बेहतर रहे, जिसने पाउंड को सहारा दिया और नुकसान को सीमित रखा। हालांकि देश के उथल-पुथल भरे राजनीतिक माहौल ने बड़ी तेज़ी को रोके रखा।

EUR/USD तीन महीने के निचले स्तर, यानी 1.1420 से नीचे जाने के बाद हफ्ते के अंत में कुछ संभला और 1.1460 से ऊपर टिका रहा। अमेरिका-ईरान वार्ता के अगले दौर को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने डॉलर को सहारा दिए रखा और यूरो की रिकवरी सीमित कर दी।

सोना लगातार तीन दिन से टूट रहा है

शुक्रवार को सोने में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज हुई और यह हफ्ते के पहले हिस्से में हासिल बढ़त गंवाते हुए 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर की तरफ खिसक आया। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व का सख्त रुख और ईरान वार्ता पर छाई अनिश्चितता, दोनों ने मिलकर सोने पर दबाव बनाए रखा।

चार महीने बाद भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था डटी हुई है

ईरान युद्ध शुरू होने के करीब चार महीने बाद भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था हैरान करने वाली मज़बूती दिखा रही है। शुरुआत में इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को बुरी तरह प्रभावित किया था और तेल की कीमतों में तीखी उछाल आई थी। लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच हाल की कूटनीतिक प्रगति ने लंबे समय तक आपूर्ति संकट बने रहने की आशंका को कुछ हद तक कम किया है।

फेड ने दरें नहीं बदलीं, लेकिन नए चेयरमैन का संदेश सबसे बड़ी खबर रही

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने लगातार चौथी बैठक में बेंचमार्क ब्याज दर 3.50% से 3.75% के दायरे में बरकरार रखी, जो बाज़ार की उम्मीद के अनुरूप था। असली चर्चा इसके बाद शुरू हुई। फेड की बागडोर संभालने के बाद केविन वॉर्श ने अपनी पहली बैठक में प्रेस कॉन्फ्रेंस का इस्तेमाल उस फॉरवर्ड-गाइडेंस के पूरे ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए किया, जिस पर बाज़ार पिछले एक दशक से टिके हुए थे।

सवाल-जवाब

ईरान ने स्विट्ज़रलैंड में वार्ता क्यों रोकी?
ईरानी वार्ताकारों ने इज़रायल के लेबनान पर हमलों के जवाब में होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद किए जाने के बाद अमेरिका से बातचीत निलंबित कर दी।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने का क्या असर पड़ता है?
यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है; इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है और तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
सोमवार को S&P 500 फ्यूचर्स कितना नीचे था?
सोमवार को साप्ताहिक ओपन पर अमेरिकी S&P 500 फ्यूचर्स 0.30% नीचे था।
सोने की कीमत किस स्तर के करीब पहुंच गई है?
लगातार तीसरे दिन गिरावट के बाद सोना 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के करीब आ गया है।
फेड ने ब्याज दरों पर क्या फैसला किया?
FOMC ने लगातार चौथी बैठक में बेंचमार्क ब्याज दर 3.50% से 3.75% के दायरे में बिना किसी बदलाव के बरकरार रखी।
केविन वॉर्श की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस इतनी चर्चा में क्यों रही?
फेड के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस फॉरवर्ड-गाइडेंस ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करने के संकेत दिए, जिस पर बाज़ार पिछले एक दशक से टिके हुए थे।
ईरान युद्ध को शुरू हुए कितना समय हो गया है?
लेख के अनुसार, ईरान युद्ध शुरू होने के करीब चार महीने बीत चुके हैं।
GBP/USD और EUR/USD अभी किस स्तर पर हैं?
GBP/USD ने 1.3160 के करीब तल बनाने के बाद 1.3200 से ऊपर वापसी की, जबकि EUR/USD तीन महीने के निचले स्तर 1.1420 से नीचे जाने के बाद 1.1460 से ऊपर टिका हुआ है।
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