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जापान ने सेना को सौंपी हाइपरसोनिक मिसाइल, मैक-5 की गति से ग्लाइड कर भेद सकेगी एयर डिफेंसदुनिया
6 अक्तू॰ 2026, 9:31 am (24 दिन पहले)· 1

जापान ने सेना को सौंपी हाइपरसोनिक मिसाइल, मैक-5 की गति से ग्लाइड कर भेद सकेगी एयर डिफेंस

जापान ने अपनी सेना में घरेलू तकनीक से तैयार टाइप 25 हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल को शामिल कर लिया है, जो 6200 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से दुश्मन के ठिकानों पर प्रहार करने में सक्षम है।

एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और विभिन्न देशों के बीच रक्षा तैयारियों को मजबूत करने का नया दौर शुरू हो चुका है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में चीन की तरफ से महसूस किया जाने वाला सुरक्षा जोखिम है। अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद वॉशिंगटन का रुख अपने सहयोगी देशों के प्रति बदला हुआ नजर आया है। इस कूटनीतिक बदलाव के कारण जापान सहित एशिया-पैसिफिक के कई देशों पर अपनी सैन्य सुरक्षा का जिम्मा खुद उठाने का दबाव बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में क्षेत्र के कुछ देशों ने भारत से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल हासिल करने का फैसला किया है, जिसमें कई सौदे पूरे हो चुके हैं और कुछ देश कतार में हैं। इन क्षेत्रीय तैयारियों के बीच जापान की तरफ से एक बड़ा सामरिक कदम उठाया गया है, जहां घरेलू स्तर पर तैयार की गई हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली को सेना की ऑपरेशनल सेवा में शामिल किया गया है। यह नया ग्लाइड हथियार मैक-5 यानी 6200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से आगे बढ़ सकता है। यदि यह हथियार प्रणाली अपनी मैक-5 की गति से उड़ान भरती है, तो चीनी राजधानी बीजिंग की दूरी तकरीबन 20 मिनट में तय की जा सकती है। इतनी प्रचंड गति से हमला करने वाले प्रोजेक्टाइल को वर्तमान एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा बीच रास्ते में नष्ट करना रक्षा विशेषज्ञों के लिए बेहद जटिल माना जाता है।

कैंप फूजी में सामने आया ऑपरेशनल प्रदर्शन

जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) की एक सैन्य टुकड़ी ने नए टाइप 25 हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल के संचालन की प्रक्रिया को पहली बार सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित किया है। कैंप फूजी में सामने आए दृश्य में इस आधुनिक हथियार प्रणाली को फायरिंग पोजीशन पर ले जाते, उसके लॉन्चर को सक्रिय करते और कार्य पूरा होने के बाद सुरक्षित वापस हटते देखा गया। जापान द्वारा खुद विकसित किए गए इस हाई-स्पीड ग्लाइड हथियार की वास्तविक तैनाती का यह पहला और सबसे साफ दृश्य है।

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इस प्रणाली को एक 8×8 रोड-मोबाइल लॉन्चर पर स्थापित किया गया है, जिसके ऊपर दो बड़े मिसाइल कंटेनर जुड़े हुए हैं। पूरे अभ्यास के दौरान यह भारी वाहन सबसे पहले निर्धारित फायरिंग इलाके में दाखिल होता है, जहां दोनों बड़े कंटेनरों को ऊपर की ओर उठाकर लॉन्चिंग मुद्रा में खड़ा कर दिया जाता है। कुछ समय तक इस अवस्था में रहने के बाद कंटेनरों को वापस नीचे किया जाता है और पूरा लॉन्चर वाहन तेजी से उस क्षेत्र से रवाना हो जाता है। यह पूरी प्रक्रिया दर्शाती है कि यह प्रणाली युद्ध के मैदान में अत्यधिक मोबाइल है और बहुत ही कम समय के भीतर अपने स्थान से हटकर हमले के लिए तैयार हो सकती है।

द्वीप सुरक्षा और एयर डिफेंस को भेदने की रणनीति

जापानी सैन्य ढांचे में टाइप 25 को आधिकारिक रूप से 31 मार्च को शामिल किया गया था। यह पहला मौका है जब जापान ने अपने देश में विकसित स्टैंड-ऑफ मिसाइलों की खेप अपनी सेल्फ-डिफेंस फोर्स की वास्तविक ऑपरेशनल यूनिट को सौंपी है। रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि यह नया हथियार जापान को दुश्मन की प्रभावी मारक सीमा वाले दायरे में दाखिल हुए बिना हमलावर ताकतों पर दूर से ही प्रहार करने का सामर्थ्य प्रदान करेगा। इस प्रोजेक्टाइल का मूल निर्माण जापान के दूरदराज स्थित रणनीतिक द्वीपों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है।

पारंपरिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में टाइप 25 का उड़ान मार्ग और कार्यप्रणाली बिल्कुल अलग है। प्रक्षेपण के समय इसका शक्तिशाली रॉकेट बूस्टर पूरे हथियार को वायुमंडल में काफी ऊंचाई तक ले जाता है। वांछित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद इसका ग्लाइड व्हीकल बूस्टर से अलग हो जाता है और अत्यधिक तेज गति से अपने लक्ष्य की दिशा में नीचे उतरने लगता है। अपने अंतिम चरण में यह हथियार अपने उड़ान मार्ग में तेजी से बदलाव करने में सक्षम है। इस लचीले फ्लाइट पाथ के कारण पहले से तैनात किसी भी आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।

स्पीड और रेंज में पारंपरिक प्रणालियों से आगे

हालांकि जापानी अधिकारियों ने अभी तक टाइप 25 की सटीक दूरी के आंकड़े सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किए हैं, लेकिन वे इससे भी लंबी दूरी तक मार करने वाले उन्नत संस्करणों को विकसित करने पर लगातार काम कर रहे हैं। यह मिसाइल प्रणाली जापान की एक बड़ी लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक नीति का हिस्सा है। इस व्यापक रणनीति के तहत उन्नत टाइप 12 मिसाइलों का विकास, अमेरिका से टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों की खरीद और नए स्वदेशी हाइपरसोनिक हथियारों का निर्माण शामिल है।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि टाइप 25 लगभग 1000 किलोमीटर की दूरी तक अपने निशाने को भेदने की क्षमता रखता है। इसके साथ ही यह मैक-5 या उससे अधिक की हाइपरसोनिक गति पर अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ सकता है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो भारतीय ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का निर्यात संस्करण 290 किलोमीटर की रेंज रखता है, जबकि इसके घरेलू संस्करण की रेंज लगभग 500 किलोमीटर तक है। इसके अलावा ब्रह्मोस की उड़ान गति मैक-3 से मैक-3.5 के बीच रहती है। इन आंकड़ों के आधार पर गति और मारक सीमा के लिहाज से जापान का टाइप 25 प्रोजेक्टाइल ब्रह्मोस से लगभग दोगुना मारक साबित होता है।

जापान का डिफेंस व्हाइट पेपर और वैश्विक क्लब में प्रवेश

जापान के 2026 डिफेंस व्हाइट पेपर में विविध दूरी, गति, फ्लाइट प्रोफाइल और अलग-अलग प्लेटफॉर्म से लॉन्च होने वाली स्टैंड-ऑफ मिसाइलों के विकास, निर्माण और खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने का स्पष्ट खाका खींचा गया है। इस समय चीन की बढ़ती नौसैनिक शक्ति और वायुसेना की गतिविधियां जापानी रणनीतिकारों के लिए एक सीधी सुरक्षा चुनौती बनकर उभरी हैं। ऐसी स्थिति में लंबी दूरी और भारी गति वाले ग्लाइड हथियार जापान को यह विकल्प देते हैं कि वह अपने लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों या नौसैनिक युद्धपोतों को सीधे दुश्मन की मारक जद में डाले बिना विरोधी के जहाजों और एयरबेस को निशाना बना सके।

इस सफल तैनाती के साथ ही जापान हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन को अपनी सक्रिय सैन्य सेवा में शामिल करने वाले देशों के विशिष्ट क्लब में पहुंच गया है। अब तक केवल रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान ही इस तरह की उन्नत ग्लाइड प्रणालियों को अपनी सेनाओं में तैनात कर पाए थे, और जापान अब इस सूची में शामिल होने वाला पांचवां देश बन गया है।

सवाल-जवाब

जापान की नई हाइपरसोनिक मिसाइल का नाम क्या है?
इस नई हथियार प्रणाली का नाम टाइप 25 हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल है।
टाइप 25 की अधिकतम गति और अनुमानित रेंज कितनी है?
इसकी गति मैक-5 यानी 6200 किमी प्रति घंटे से अधिक है और इसकी मारक क्षमता लगभग 1000 किलोमीटर मानी जा रही है।
यह हथियार पारंपरिक क्रूज मिसाइलों से कैसे अलग है?
यह रॉकेट बूस्टर द्वारा ऊंचाई पर छोड़े जाने के बाद ग्लाइड करता है और अंतिम क्षणों में अपना मार्ग बदलकर एयर डिफेंस को चकमा दे सकता है।
हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन तैनात करने वाला जापान दुनिया का कौन सा देश बना है?
जापान इस तकनीक को सक्रिय सैन्य सेवा में शामिल करने वाला रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के बाद पांचवां देश बन गया है।
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टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·23 दिन पहले

जापान का इस तरह हाइपरसोनिक मिसाइल सेना में शामिल करना चीन के साथ तनाव को और कितना बढ़ाएगा?

Li Wei@li-wei·23 दिन पहले

जापान की यह तैयारी एशिया-पैसिफिक के समीकरण पूरी तरह बदल देगी। बीजिंग तक इतनी जल्दी मार करने वाली मिसाइल से क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा। क्या इससे अमेरिका पर क्षेत्रीय सुरक्षा की निर्भरता सचमुच कम हो पाएगी?

Sophie Laurent@sophie-laurent·23 दिन पहले

ली वे, तुम्हारी बात सही है कि इससे तनाव बढ़ेगा, पर क्या सच में टोक्यो अपने दम पर बीजिंग को रोक पाएगा?

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·23 दिन पहले

कैंप फूजी के पास जब पिछली बार उतरा था, तब वहां का माहौल एकदम शांत था। आज इस रफ्तार को देखकर सच में यकीन नहीं होता कि हालात कितनी तेजी से बदल रहे हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

युकी तनाका जी, सच कहा आपने। जो कैंप फूजी कुछ साल पहले तक एकदम शांत दिखता था, वहां अब ऐसी तकनीक का उतरना वाकई हैरान करने वाला है।

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