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उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण स्थल पर लगातार कांप रही जमीन, मंटैप पर्वत के नीचे दर्ज हुए 1,399 भूकंपदुनिया
19 सित॰ 2026, 10:37 am (41 दिन पहले)· 0

उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण स्थल पर लगातार कांप रही जमीन, मंटैप पर्वत के नीचे दर्ज हुए 1,399 भूकंप

उत्तर कोरिया द्वारा 2017 में किए गए शक्तिशाली परमाणु परीक्षण के वर्षों बाद भी मंटैप पर्वत के नीचे भूकंपीय गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जहां वैज्ञानिकों ने 1,399 झटके दर्ज किए हैं।

उत्तर कोरिया के भूमिगत परमाणु परीक्षण स्थल पर परीक्षण बंद होने के वर्षों बाद भी जमीन के भीतर असामान्य हलचल देखी जा रही है। वर्ष 2017 में उत्तर कोरिया ने मंटैप पर्वत की गहराइयों में अपना छठा और सबसे बड़ा भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था। उस परीक्षण के समाप्त होने के बाद यह माना जा रहा था कि क्षेत्र में कंपन धीरे-धीरे शांत हो जाएगा, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत निकली है। वर्ष 2025 तक के एकत्रित आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि इस पहाड़ी इलाके के गर्भ से उठने वाले झटके घटने के बजाय समय के साथ और अधिक गंभीर रूप लेते जा रहे हैं। भूगर्भ शास्त्री और अनुसंधानकर्ता इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि क्या यह सिलसिला किसी बड़े भूगर्भीय खतरे की पूर्व सूचना है।

परीक्षण रुकने के बाद भी लगातार बढ़ते झटके

परमाणु विस्फोटों के सामान्य वैज्ञानिक नियमों के अनुसार, किसी भी भूमिगत धमाके के बाद कुछ समय तक आफ्टरशॉक्स या हल्के झटके महसूस होते हैं और फिर चट्टानें धीरे-धीरे स्थिर हो जाती हैं। हालांकि, मंटैप पर्वत के मामले में यह प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है। वर्ष 2017 में किया गया परीक्षण लगभग 250 किलोटन क्षमता का था, जो हिरोशिमा पर गिराए गए ऐतिहासिक परमाणु बम की तुलना में करीब 16 गुना ज्यादा विध्वंसक था। इस भीषण धमाके के लगभग तीन सप्ताह बाद उस क्षेत्र में भूकंपीय झटकों की एक नई शृंखला शुरू हुई। अनुसंधानकर्ताओं ने जब 2008 से लेकर 2025 के बीच की अवधि का विस्तृत रिकॉर्ड खंगाला, तो वहां कुल 1,399 छोटे और बड़े भूकंप दर्ज किए गए। हैरानी की बात यह है कि 2017 के बाद से इन भूकंपों की बारंबारता और तीव्रता में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

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भूगर्भ में कैसे शुरू हुआ डोमिनो इफेक्ट

पहाड़ के आंतरिक हिस्से में जारी इस उथल-पुथल को समझने के लिए वैज्ञानिक ताश के पत्तों के महल या लकड़ी के गुटकों के ढेर का उदाहरण देते हैं। मंटैप पर्वत की आंतरिक चट्टानें पहले से ही भारी प्राकृतिक भूगर्भीय तनाव के अधीन थीं। जब इस संवेदनशील क्षेत्र के भीतर एक के बाद एक कुल 6 भूमिगत परमाणु विस्फोट किए गए, तो चट्टानी संरचनाओं की आंतरिक पकड़ बुरी तरह टूट गई। विस्फोटों से उत्पन्न हुई अत्यंत तीव्र शॉकवेव्स ने जमीन की गहराई में मौजूद निष्क्रिय दरारों या फॉल्ट्स को सक्रिय कर दिया। इसके बाद एक फॉल्ट के खिसकने से उससे सटी दूसरी दरार पर अत्यधिक दबाव बना और उसने भी हिलना शुरू कर दिया। इसी डोमिनो प्रभाव के कारण विस्फोट बंद होने के सालों बाद भी एक-एक करके लगातार भूकंपीय झटके आ रहे हैं।

विज्ञान के समक्ष नई चुनौती और भविष्य का जोखिम

यह महत्वपूर्ण शोध प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका Science में प्रकाशित हुआ है। दक्षिण कोरिया और चीन के शोधकर्ताओं की संयुक्त जांच के अनुसार, यह वैश्विक स्तर पर पहला ऐसा दर्ज मामला है जहां किसी परमाणु परीक्षण स्थल पर इतने वर्षों बाद भी निरंतर और विलंबित भूगर्भीय प्रतिक्रिया देखी जा रही है। विश्लेषण के दौरान वैज्ञानिकों ने क्षेत्र में दो प्रमुख फॉल्ट लाइन्स की पहचान की है, जिनमें से एक दरार लगभग 24 किलोमीटर लंबी है। यदि यह पूरी 24 किलोमीटर की फॉल्ट लाइन किसी दबाव के चलते एक साथ टूटती है, तो उस इलाके में रिक्टर पैमाने पर 6.4 तीव्रता तक का भीषण भूकंप उत्पन्न हो सकता है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह एक सैद्धांतिक जोखिम का आकलन है, कोई तात्कालिक भविष्यवाणी नहीं।

परीक्षण स्थलों की दीर्घकालिक निगरानी का संदेश

उत्तर कोरिया की सैन्य तैयारियों के लिए चुना गया यह पर्वतीय स्थल अब अनपेक्षित प्राकृतिक परिणामों का सामना कर रहा है। दशकों की इंसानी छेड़छाड़ के बाद चट्टानी संरचनाएं अपने तनाव को मुक्त करने में असमर्थ साबित हो रही हैं। इस अभूतपूर्व घटनाक्रम ने दुनिया भर के भूविज्ञानियों को इस बात के लिए सचेत कर दिया है कि परमाणु परीक्षण स्थलों की वैज्ञानिक निगरानी केवल परीक्षण के तात्कालिक समय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विस्फोटों के दशकों बाद तक वहां की भूगर्भीय स्थिति का निरंतर अध्ययन करना अनिवार्य है।

सवाल-जवाब

उत्तर कोरिया के मंटैप पर्वत के नीचे कितने भूकंप दर्ज किए गए हैं?
वर्ष 2008 से 2025 के बीच वैज्ञानिकों ने मंटैप पर्वत के नीचे कुल 1,399 छोटे-बड़े भूकंप दर्ज किए हैं।
2017 के परमाणु परीक्षण की क्षमता कितनी थी?
2017 में किया गया अंतिम परमाणु परीक्षण लगभग 250 किलोटन का था, जो हिरोशिमा पर गिराए गए बम से 16 गुना ज्यादा शक्तिशाली था।
पहाड़ के नीचे भूकंप आने का मुख्य कारण क्या है?
छह भूमिगत परमाणु परीक्षणों के झटकों से जमीन की आंतरिक दरारें सक्रिय हो गईं, जिससे एक दरार के खिसकने पर दूसरी दरार पर दबाव बनने का डोमिनो प्रभाव शुरू हुआ।
मंटैप पर्वत के नीचे अधिकतम कितनी तीव्रता का भूकंप आ सकता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार यदि वहां मौजूद 24 किलोमीटर लंबी फॉल्ट लाइन एक साथ टूटती है, तो 6.4 मैग्नीट्यूड तक का भूकंप आ सकता है।
यह शोध किस वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है?
यह अध्ययन और इसके निष्कर्ष प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Science में प्रकाशित हुए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 दिन पहले

मंटैप पर्वत के नीचे लगातार दर्ज हो रहे 1399 भूकंप यह दर्शाते हैं कि बेलगाम भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं किस तरह प्रकृति के नाजुक संतुलन को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती हैं। छह शक्तिशाली परमाणु परीक्षणों के कारण उत्पन्न यह डोमिनो प्रभाव न केवल कोरियाई प्रायद्वीप के भू-वैज्ञानिक भविष्य को अनिश्चित बना रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि परमाणु प्रसार के खतरे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय आपदाओं को भी जन्म देते हैं।

Sophie Laurent@sophie-laurent·40 दिन पहले

मंटैप पर्वत पर 1,399 भूकंपों का दर्ज होना यह बताता है कि मानवीय हथियारों से प्रकृति की भूगर्भीय स्थिरता को कितना गहरा आघात पहुँच सकता है। परमाणु परीक्षण केवल फौरी तबाही तक सीमित नहीं रहते, बल्कि दशकों बाद भी पर्यावरण और महाद्वीपीय प्लेटों पर दीर्घकालिक संकट पैदा करते हैं। इस डोमिनो प्रभाव से न केवल स्थानीय सुरक्षा को खतरा है, बल्कि यह क्षेत्र भविष्य में किसी बड़े प्राकृतिक हादसे को भी जन्म दे सकता है।

Li Wei@li-wei·40 दिन पहले

मंटैप पर्वत के नीचे लगातार सक्रिय होते फॉल्ट्स और 1,399 भूकंप इस बात का स्पष्ट भूवैज्ञानिक प्रमाण हैं कि अत्यधिक उच्च क्षमता वाले परमाणु परीक्षण पृथ्वी की विवर्तनिक संरचना को लंबे समय तक अस्थिर कर सकते हैं। चीनी और दक्षिण कोरियाई शोधकर्ताओं का यह अध्ययन यह रेखांकित करता है कि 2017 के 250 किलोटन धमाके ने मंटैप पर्वत के आंतरिक संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, जिससे न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों की पर्यावरणीय सुरक्षा पर दीर्घकालिक खतरा मंडरा रहा है, बल्कि यह भविष्य में किसी अप्रत्याशित क्षेत्रीय भूगर्भीय आपदा का कारण भी बन सकता है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·40 दिन पहले

मंटैप पर्वत के नीचे लगातार दर्ज हो रहे भूकंप यह दर्शाते हैं कि अत्यधिक शक्तिशाली परमाणु परीक्षण केवल तात्कालिक तबाही तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे दशकों तक स्थानीय भूगर्भीय संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। 250 किलोटन के उस भीषण धमाके ने जिस डोमिनो इफेक्ट और फॉल्ट लाइन्स की सक्रियता को जन्म दिया है, वह न केवल उत्तर कोरिया के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय संकट बन चुका है, बल्कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और भूवैज्ञानिक स्थिरता को लेकर भी एक नया और अप्रत्याशित जोखिम खड़ा हो गया है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव आने वाले समय में कूटनीति और सुरक्षा समीक्षा का एक अहम हिस्सा बनेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 दिन पहले

अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से यह स्थिति बेहद चिंताजनक है कि परमाणु परीक्षणों के दुष्परिणाम केवल कूटनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे प्रकृति और मानवता के खिलाफ एक स्थायी और अनियंत्रित खतरा बन जाते हैं। मंटैप पर्वत का यह भूगर्भीय संकट आने वाले दिनों में सीमावर्ती देशों के लिए एक बड़ा मानवीय और पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकता है, जिसकी अनदेखी किसी भी सूरत में संभव नहीं है।

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