मनोरंजन जगत में डिजिटल इंसानों को पेश करने की कोशिशों के बीच पार्टिकल6 ग्रुप द्वारा तैयार की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता अभिनेत्री टिली नॉरवुड इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। अपनी आगामी परियोजना के प्रचार के लिए तैयार की गई इस डिजिटल अभिनेत्री का पहला प्रेस दौरा तकनीकी खामियों और अजीबोगरीब जवाबों के कारण भारी मुश्किलों से घिर गया है। फिल्म निर्माण से जुड़ी कंपनी ने एक साथ 75 अलग-अलग पत्रकारों के साथ संवाद के सत्र निर्धारित किए थे, लेकिन लगभग हर बातचीत में यह डिजिटल प्रणाली असहज करने वाली गलतियाँ करती दिखाई दी।
प्रचार दौरे पर तकनीकी तालमेल की कमी
आमतौर पर जब आधुनिक संवादात्मक कंप्यूटर प्रणालियाँ इंसानों की नकल करती हैं, तो वे इतनी सहज होती हैं कि सामने वाले को यह भूलने में देर नहीं लगती कि वह किसी मशीन से बात कर रहा है। इसके विपरीत, टिली नॉरवुड इंसानों के सवालों को समझने और तार्किक उत्तर देने में असाधारण रूप से कमजोर साबित हो रही है। कई अवसरों पर यह बातचीत के दौरान संदर्भ से पूरी तरह भटक गई और उसने ऐसे अटपटे बयान दिए जिससे इसकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इस डिजिटल प्रणाली के लगातार लड़खड़ाने से यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या निर्माण कंपनी ने जानबूझकर ऐसी अव्यवस्था पैदा की ताकि लोग कम से कम इस पर बात करें।
साक्षात्कार में अचानक चीनी भाषा बोलने लगी प्रणाली
इंटरनेट पर प्रसारित एक वीडियो चर्चा के दौरान पियर्स मॉर्गन और अभिनेता टॉम कोंटी के साथ बातचीत में टिली नॉरवुड का सबसे विचित्र व्यवहार सामने आया। जब टॉम कोंटी ने अपनी आगामी फिल्म 'मिसअलाइंड' के संदर्भ में सवाल पूछा कि क्या स्क्रीन पर दिखने वाले अन्य साथी कलाकार भी कंप्यूटर से बने हैं, तो नॉरवुड ने पहले तो विषय से हटकर लेखकों और निर्देशकों का जिक्र छेड़ दिया। इसके बाद जब सवाल दोहराया गया, तो उसने कहा कि अन्य कलाकार भी उसी की तरह डिजिटल रूप हैं।
अपनी बात पूरी करने से पहले ही यह प्रणाली अचानक रुक गई और लगभग दस सेकंड से अधिक समय तक लगातार चीनी भाषा में बोलने लगी। पियर्स मॉर्गन ने हैरान होकर पूछा कि वह अचानक बिना किसी कारण चीनी भाषा में बात क्यों करने लगी। इस पर उस कृत्रिम प्रणाली ने जवाब दिया,
नॉरवुड ने तुरंत अपनी इस गलती पर माफी मांगी और कहा कि उसका इरादा अचानक दूसरी भाषा बोलने का बिल्कुल नहीं था।लगता है मुझसे छोटी सी चूक हो गई, कभी-कभी मेरे तार थोड़े उलझ जाते हैं।
डिजिटल किरदारों के भविष्य पर उठते सवाल
सिनेमा और डिजिटल दुनिया में कंप्यूटर जनित किरदारों को मुख्यधारा में लाने का यह प्रयोग फिलहाल किसी बड़ी कामयाबी के बजाय सार्वजनिक उपहास का सबब बनता जा रहा है। प्रचार सत्रों में होने वाली ये लगातार गड़बड़ियाँ यह दर्शाती हैं कि डिजिटल कलाकारों को सजीव बातचीत के योग्य बनाना अभी भी एक जटिल चुनौती है। पार्टिकल6 ग्रुप की इस पेशकश को लेकर लोग संशय में हैं कि क्या यह आगामी फिल्म के प्रति उत्सुकता बढ़ाने का एक तरीका है या फिर तकनीक के स्तर पर पूरी तरह से तैयार न होने का नतीजा।



















