स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप ने दो किशोरों द्वारा दायर किए गए उस मुकदमे का अदालत के बाहर निपटारा कर लिया है, जिसमें प्लेटफॉर्म पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। दोनों वादियों का आरोप था कि कंपनी ने अपने ऐप को जानबूझकर लत लगाने वाले तरीके से डिजाइन किया, जिसके चलते वे डिप्रेशन, गंभीर घबराहट और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्याओं के शिकार हुए। दोनों किशोर इससे पहले मेटा, टिकटॉक और यूट्यूब के साथ भी इसी प्रकार के विवादों में समझौते कर चुके थे।
परीक्षण के दौरान टला अदालती टकराव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के युवा उपयोगकर्ताओं पर पड़ने वाले बुरे असर को लेकर चल रही कानूनी मुकदमों की व्यापक लहर में यह स्नैप के लिए पहला अदालती परीक्षण बनने जा रहा था। कंपनी ने सुनवाई के लिए तय अपने अन्य मामलों को पहले ही सुलझा लिया था। इस मुकदमे में व्यक्तिगत रूप से स्नैप के सीईओ इवान स्पीगेल को भी गवाही के लिए कठघरे में बुलाया जाना तय था, लेकिन समझौते के बाद यह स्थिति टल गई।
कम उम्र में स्क्रीन की आदत और लत लगाने वाले फीचर्स
मुकदमा दायर करने वाले किशोरों ने अपनी स्थिति साझा करते हुए बताया कि उन्होंने महज 3 साल की उम्र में यूट्यूब देखना शुरू कर दिया था, जबकि लगभग 9 साल की उम्र तक आते-आते वे अन्य सोशल मीडिया नेटवर्क्स का भी इस्तेमाल करने लगे थे। उनका कहना है कि वे अनिवार्य रूप से स्क्रीन देखने की लत में फंस गए, जिसके लिए उन्होंने प्लेटफॉर्म के ऑटोप्ले और इनफिनिट स्क्रॉलिंग जैसे खास फीचर्स को जिम्मेदार ठहराया।
सुरक्षा उपायों पर कंपनी का रुख
मामले के समाधान के बाद स्नैप के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान देते हुए कहा कि दोनों पक्ष इस मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने में सफल रहे हैं और वे इससे संतुष्ट हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सुरक्षा के कड़े उपाय किए हैं, सुरक्षा ट्यूटोरियल पेश किए हैं और विशेषज्ञों के साथ साझेदारी की है। प्रवक्ता के मुताबिक सुरक्षा की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती, इसलिए वे अपने समुदाय की सुरक्षा, प्राइवेसी और भलाई को लगातार मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं टेक कंपनियां
मौजूदा समय में सोशल मीडिया क्षेत्र की बड़ी कंपनियां अमेरिकी संघीय और राज्य अदालतों में हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन सभी मुकदमों में मुख्य आरोप यही है कि टेक कंपनियों ने युवा उपयोगकर्ताओं को बांधकर रखने के लिए जानबूझकर प्लेटफॉर्म्स को ऐसा रूप दिया, जिससे किशोरों के बीच घबराहट, अवसाद और आत्महत्या जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकट पैदा हुआ।



















