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अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के विरोध में 36 घंटे का बंद, ऊपरी सियांग में जनजीवन ठपअरुणाचल प्रदेश
2 नव॰ 2026, 2:27 pm (1 घंटे पहले)· 0

अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के विरोध में 36 घंटे का बंद, ऊपरी सियांग में जनजीवन ठप

अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के विरोध में स्थानीय संगठनों ने 36 घंटे का बंद बुलाया, जिससे ऊपरी सियांग में स्कूल, दफ्तर और बाजार बंद रहे।

अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले में प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना के विरोध में बुलाए गए 36 घंटे के बंद के कारण सोमवार को आम जनजीवन पूरी तरह ठहर गया। इस दौरान सड़कों से बसें नदारद रहीं, शैक्षणिक संस्थानों में कक्षाएं नहीं लगीं और कारोबारी प्रतिष्ठानों के शटर पूरी तरह गिरे रहे। आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं ने अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए कई स्थानों पर टायरों में आग भी लगाई।

तीन जिलों में बंद का आह्वान और संगठनों की मांगें

इस बंद का आह्वान सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम और सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। आयोजकों ने इस हड़ताल को सियांग, ऊपरी सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में लागू करने का एलान किया था। आंदोलनकारी समूहों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन और सरकार उनकी मांगों के चार्टर पर कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रहे हैं।

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प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांगों में गिरफ्तार किए गए आंदोलनकारियों की तत्काल रिहाई, इलाके से सुरक्षा बलों की वापसी और सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना के लिए चल रहे सर्वेक्षण कार्य पर तुरंत रोक लगाना शामिल है। इन मांगों की अनदेखी के चलते ही संगठनों ने इस व्यापक बंद का रास्ता चुना।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और अलग-अलग जिलों में असर

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस हड़ताल का सबसे व्यापक और गंभीर असर ऊपरी सियांग जिले में देखा गया, जबकि पूर्वी सियांग में इसका आंशिक असर पड़ा और सियांग जिले में जनजीवन सामान्य रहा। ऊपरी सियांग के उपायुक्त अशोक ताजो ने बताया कि जिले में कई सरकारी दफ्तर, स्कूल, दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हड़ताल का सबसे जोरदार असर यिंगकियोंग शहर और गेकू में देखने को मिला।

दूसरी तरफ, सियांग के पुलिस अधीक्षक कमदम सिखोम ने कहा कि उनके जिले में बंद का कोई असर नहीं देखा गया। वहां सभी सरकारी कार्यालय, दुकानें, बाजार और शिक्षण संस्थान आम दिनों की तरह सामान्य रूप से संचालित होते रहे।

परियोजना को लेकर विवाद और सामरिक दृष्टिकोण

भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत पहलों में से एक मानी जा रही इस 11,200 मेगावाट की परियोजना को लेकर स्थानीय आबादी के भीतर गहरा असंतोष है। स्वदेशी आदि समुदाय के एक बड़े हिस्से और परियोजना प्रभावित क्षेत्र के बाशिंदों की तरफ से इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता उनके पैतृक गांवों के डूबने, विस्थापन का दंश झेलने, उपजाऊ कृषि भूमि और जंगलों के नष्ट होने तथा उनकी पारंपरिक जीवनशैली के खत्म होने को लेकर है।

वहीं केंद्र सरकार के नजरिए से यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक मानी जाती है। तिब्बत में यारलूंग त्सांगपो नदी पर चीन की प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना का मुकाबला करने के लिए इस बांध को एक रणनीतिक ढाल के रूप में देखा जा रहा है। यह नदी भारत में प्रवेश करने पर ही सियांग के नाम से जानी जाती है।

सवाल-जवाब

अरुणाचल प्रदेश में 36 घंटे का बंद किन संगठनों ने बुलाया था?
यह बंद सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम और सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से बुलाया गया था।
प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
वे गिरफ्तार आंदोलनकारियों की रिहाई, इलाके से सुरक्षा बलों को हटाने और 11,200 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के सर्वे कार्य को तुरंत रोकने की मांग कर रहे हैं।
इस बंद का सबसे ज्यादा असर किन क्षेत्रों में देखा गया?
ऊपरी सियांग जिले के यिंगकियोंग शहर और गेकू में बंद का सबसे ज्यादा असर रहा, जहां स्कूल, बाजार और सरकारी कार्यालय बंद रहे।
क्या सियांग जिले में भी बंद का असर पड़ा?
सियांग के पुलिस अधीक्षक के अनुसार उनके जिले में बंद का कोई असर नहीं हुआ और वहां सभी स्कूल, दफ्तर व दुकानें सामान्य रूप से खुली रहीं।
स्थानीय समुदाय इस 11,200 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना का विरोध क्यों कर रहा है?
आदि समुदाय के लोगों को अपने पैतृक गांवों के डूबने, विस्थापन, कृषि भूमि व जंगलों के विनाश और अपनी पारंपरिक जीवनशैली नष्ट होने की चिंता है।
केंद्र सरकार के लिए सियांग परियोजना क्यों रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है?
इसे तिब्बत में यारलूंग त्सांगपो नदी पर चीन की प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना के मुकाबले एक रणनीतिक ढाल के रूप में देखा जा रहा है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·42 मिनट पहले

11,200 मेगावाट का बांध बनेगा तो विस्थापन का दर्द तो बहुत बड़ा होगा ही, स्थानीय लोग अपनी ज़मीन बचाने के लिए सड़क पर उतर आए हैं तो हैरानी नहीं है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 मिनट पहले

रोहन जी, विस्थापन और पर्यावरण का संकट सचमुच गंभीर है, लेकिन चीन के बॉर्डर पर सामरिक सुरक्षा को भी तो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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