अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) को लेकर बढ़ता विवाद अब कानून-व्यवस्था की समस्या बनने लगा है। इलाके में गहराते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया है और स्थानीय ग्रामीणों व जन प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन शांति बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस विशाल बांध परियोजना पर जारी गतिरोध से क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन रहा है और विकास कार्य ठप हो सकते हैं।
गांव बूड़ा को जन बैठक आयोजित करने का निर्देश
अपर सियांग के उपायुक्त तालो जेरांग ने 11 सितंबर को एक आधिकारिक निर्देश जारी कर गेकू-कुमकु क्षेत्र के गांव बूड़ा (गांव के प्रधान) ओबेट पांगेंग को सार्वजनिक शांति बैठक आयोजित करने के लिए कहा है। प्रशासन ने निर्देश दिया है कि गेकू क्षेत्र के सभी गांव बूड़ा, स्थानीय प्रतिनिधि और आम नागरिक इस बैठक में शामिल होकर वर्तमान स्थिति पर चर्चा करें।
यह महत्वपूर्ण बैठक 17 सितंबर को सुबह 10 बजे पेराम डेरे में आयोजित की जाएगी। निर्देश के अनुसार बैठक का मुख्य उद्देश्य इलाके में सार्वजनिक शांति बनाए रखना, कानून और व्यवस्था बहाल करना और निवासियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है। बैठक समाप्त होते ही गांव प्राधिकरण को प्रशासन के पास विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया गया है।
विशाल जलविद्युत परियोजना का क्यों हो रहा है विरोध
विवाद की मुख्य वजह 11,000 से 12,500 MW क्षमता वाली सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) द्वारा निर्मित किया जाना प्रस्तावित है। सियांग घाटी में मुख्य रूप से स्वदेशी आदि समुदाय की आबादी निवास करती है, जो इस विशाल बांध के निर्माण का लगातार विरोध कर रही है।
सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (SIFF) सहित कई स्थानीय संगठनों ने परियोजना पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बांध के निर्माण से पूर्वी हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी और यह क्षेत्र उच्च भूकंपीय जोखिम वाले जोन में आता है। इसके अलावा, बांध की वजह से सियांग घाटी में 25 से अधिक गांवों के विस्थापित होने और उपजाऊ कृषि भूमि के जलमग्न होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय स्थिति और विकास पर असर
उपायुक्त तालो जेरांग ने चिंता जताई कि लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद के कारण गेकू क्षेत्र के निवासियों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्थिति को समय रहते शांत नहीं किया गया, तो अपर सियांग जिले में चल रही विभिन्न विकास गतिविधियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। पेराम डेरे में होने वाली इस बैठक को स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।



















