किचन में कटलरी को अच्छी तरह धोने और पोंछने के बाद भी अगर कुछ दिनों में उस पर हल्के दाग या फीकापन नजर आने लगे, तो जरूरी नहीं कि इसकी वजह सफाई में कमी हो। कई बार दराज के भीतर छिपी नमी ही चम्मच, कांटे और दूसरे धातु के बर्तनों की चमक को धीरे-धीरे कम कर देती है। ऐसे में घर में आमतौर पर खाना पैक करने या बेकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम फॉयल एक सरल घरेलू उपाय के तौर पर काम आ सकता है, जिसे कई लोग कटलरी दराज के नीचे बिछाने में इस्तेमाल करते हैं।
दरअसल फॉयल की एक परत दराज की सतह और बर्तनों के बीच एक अतिरिक्त सीमा बना देती है, जिससे नमी का सीधा संपर्क कुछ हद तक कम हो जाता है। यह तरीका खासकर उन किचन में ज्यादा उपयोगी माना जाता है, जहां दराज लकड़ी या ऐसी किसी सामग्री की बनी हो जो नमी आसानी से सोख लेती है। हालांकि इसे नमी की स्थायी या पक्की काट-छांट वाला समाधान नहीं समझा जाना चाहिए, यह सिर्फ एक सहायक तरकीब है।
कटलरी दराज में नमी जमा क्यों होती है?
दराज बंद रहने की वजह से उसके अंदर हवा का आवागमन सीमित हो जाता है। अगर बर्तन पूरी तरह सूखे न रखे जाएं या आसपास का माहौल पहले से नम हो, तो धातु की सतह पर पानी की एक हल्की परत जम सकती है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो कुछ धातुओं पर दाग या ऑक्सीडेशन के निशान उभरने लगते हैं। इसी वजह से दराज के निचले हिस्से में एल्युमिनियम फॉयल बिछाने की घरेलू तरकीब अपनाई जाती है, ताकि दराज की सतह और कटलरी के बीच एक अलग परत तैयार हो सके और नमी का सीधा असर कुछ कम हो।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसका असर हर किचन में एक जैसा नहीं होगा, यह दराज किस सामग्री से बनी है, कटलरी किस धातु की है और कमरे में नमी का स्तर कितना है, इन सब पर निर्भर करता है। सिर्फ फॉयल बिछा देने भर से जंग या धातु पर पड़ने वाले दाग की समस्या पूरी तरह खत्म होने की कोई गारंटी नहीं है।
दराज में फॉयल बिछाने का सही तरीका
सबसे पहले कटलरी दराज को अच्छी तरह साफ करके पूरी तरह सुखा लेना चाहिए। इसके बाद दराज की भीतरी लंबाई और चौड़ाई के हिसाब से एल्युमिनियम फॉयल की शीट काट लें और उसे नीचे की सतह पर सीधा बिछा दें। इसके ऊपर कटलरी ऑर्गनाइजर रखा जा सकता है। ध्यान रहे कि फॉयल कहीं से मुड़ी हुई या ज्यादा सिकुड़ी हुई न हो। अगर आगे चलकर दराज में नमी जमा होने लगे या फॉयल गीली दिखाई दे, तो उसे हटाकर नई शीट बिछा देना बेहतर रहता है। साथ ही गीले चम्मच या कांटे कभी भी सीधे दराज में नहीं रखने चाहिए।
दीवार की नमी परखने में भी आता है फॉयल का काम
एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल सिर्फ किचन की दराज तक सीमित नहीं है। घर की दीवार पर दिखने वाली सीलन या नमी की वजह समझने के लिए भी एक आसान घरेलू जांच की जा सकती है। इसके लिए संदिग्ध हिस्से पर फॉयल की एक शीट अच्छी तरह चिपका दी जाती है और करीब 48 घंटे बाद उसे देखा जाता है। अगर इस दौरान फॉयल की दीवार वाली तरफ पानी की बूंदें या नमी नजर आए, तो यह संकेत हो सकता है कि नमी दीवार के भीतर या उसके पीछे से आ रही है।
वहीं अगर फॉयल सूखी रहे लेकिन कमरे की तरफ नमी महसूस हो, तो इसकी वजह वातावरण में मौजूद ज्यादा आर्द्रता से जुड़ी हो सकती है। यह सिर्फ एक घरेलू संकेत भर है, कोई पक्की तकनीकी जांच नहीं। अगर सीलन लगातार बनी रहती है, तो रिसाव या प्लंबिंग से जुड़ी समस्या की जांच किसी विशेषज्ञ से कराना ही बेहतर विकल्प है।
इस्तेमाल से पहले किन बातों का रखें ध्यान
यह तरकीब पूरी तरह मुफ्त और आसान जरूर है, लेकिन इसे नमी या जंग की गारंटीशुदा काट नहीं माना जाना चाहिए। फॉयल को समय-समय पर बदलते रहना, बर्तन सुखाकर ही दराज में रखना और दराज को बीच-बीच में हवा लगने देना, ये आदतें असल में ज्यादा फर्क डालती हैं। अगर घर की किसी दराज या दीवार में नमी की समस्या बार-बार लौट रही हो, तो सिर्फ फॉयल जैसे घरेलू उपाय पर निर्भर रहने की बजाय समस्या की जड़ तक जाकर समाधान खोजना ज्यादा कारगर रहेगा।


















