उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में घटित एक चर्चित हत्याकांड में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए भोजपुरी फिल्म लेखक और उसकी प्रेमिका को दोषी ठहराया है। दोनों पर लेखक की पत्नी योगमाया की बेरहमी से हत्या करने का आरोप था, जो फोरेंसिक जांच और साक्ष्यों के जरिए साबित हो गया। अदालत ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि मामले में सजा का ऐलान 6 नवंबर को किया जाएगा।
शादी के बाद दहेज प्रताड़ना और अवैध संबंधों का विवाद
यह मामला फतेहपुर के थरियांव थाना क्षेत्र से जुड़ा है। मृतका योगमाया के भाई सत्य प्रकाश ने 26 दिसंबर 2021 को स्थानीय पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई जानकारी के अनुसार योगमाया का विवाह 10 फरवरी 2015 को इंद्रमोहन लोधी के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही पति इंद्रमोहन अपनी पत्नी को दहेज की मांग को लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगा था।
इसी बीच इंद्रमोहन भोजपुरी सिनेमा उद्योग के लिए स्क्रिप्ट लेखन का कार्य करने लगा। फिल्मों के सिलसिले में उसकी मुलाकात नेहा वर्मा नामक युवती से हुई। इंद्रमोहन उसे अपनी फिल्मों की अभिनेत्री बताता था। धीरे-धीरे दोनों के बीच करीबी बढ़ी और प्रेम संबंध स्थापित हो गए। जब योगमाया को पति के इस संबंध की जानकारी मिली तो उसने घर में इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। दोनों के रिश्ते में योगमाया को रुकावट मानते हुए इंद्रमोहन और नेहा वर्मा ने उसे रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा।
धारदार हथियार से गला रेतकर की गई थी हत्या
26 दिसंबर 2021 की रात साजिश के तहत योगमाया पर हमला किया गया। दोनों ने मिलकर धारदार हथियार से उसका गला रेत दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी नेहा वर्मा ने खुद को निर्दोष दिखाने के लिए घर में शोर मचाया। उसने मकान के दूसरे कमरे में सो रहे सास-ससुर को जगाया और दावा किया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने वारदात को अंजाम दिया है, ताकि शक किसी बाहरी हमलावर पर जाए और वे कानून की नजरों से बच सकें।
नाखूनों में फंसे बाल और डीएनए रिपोर्ट ने बेनकाब किया सच
वारदात की सूचना पाकर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। अभियोजन पक्ष के अनुसार हमले के दौरान योगमाया ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा मुकाबला किया था। इस हाथापाई में मृतका के नाखूनों में आरोपी नेहा वर्मा के बाल फंस गए थे। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने जब इन बालों का डीएनए परीक्षण कराया, तो उसका मिलान सीधे नेहा वर्मा के डीएनए से हो गया।
इसके अलावा चिकित्सीय परीक्षण के दौरान नेहा वर्मा के शरीर पर खरोंचों और चोटों के ताजा निशान पाए गए, जिससे संघर्ष की पुष्टि हुई। वहीं घटनास्थल पर मिले रक्त के नमूनों का जब डीएनए परीक्षण कराया गया, तो वह इंद्रमोहन लोधी के रक्त से पूरी तरह मेल खा गया। इन पुख्ता वैज्ञानिक सबूतों, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने दोनों को हत्या का पूर्ण दोषी माना और जेल भेज दिया।


















