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असम के फार्मास्यूटिकल शोधकर्ता डॉ. अनुपम सरमा दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिलअसम
14 अक्तू॰ 2026, 7:06 pm (2 घंटे पहले)· 0

असम के फार्मास्यूटिकल शोधकर्ता डॉ. अनुपम सरमा दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल

गिरिजानंद चौधरी विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. अनुपम सरमा को फार्मास्यूटिकल साइंसेज में उत्कृष्ट शोध और ड्रग डिलीवरी नवाचारों के लिए वैश्विक मान्यता मिली है।

असम के गुवाहाटी स्थित गिरिजानंद चौधरी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज में कार्यरत सहायक प्रोफेसर डॉ. अनुपम सरमा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें वर्ष 2026 के लिए दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में स्थान दिया गया है। यह वैश्विक सम्मान फार्मास्यूटिकल साइंसेज के क्षेत्र में उनके शोध कार्यों के व्यापक प्रभाव और अकादमिक योगदान को मान्यता प्रदान करता है।

स्टैनफोर्ड और एल्सेवियर के मानकीकृत डेटाबेस पर आधारित मूल्यांकन

यह प्रतिष्ठा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा तैयार किए गए वैश्विक वैज्ञानिकों के डेटाबेस से संकलित एकल-वर्षीय प्रभाव मैट्रिक्स पर आधारित है। इस रैंकिंग प्रक्रिया में शोधकर्ताओं के कुल उद्धरण, एच-इंडेक्स और अन्य मानकीकृत ग्रंथसूची पैमानों का कठोरता से सत्यापन किया जाता है। ये आंकड़े वैज्ञानिक बिरादरी में उनके प्रकाशित अनुसंधानों की पहुंच, प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को सटीक रूप से दर्शाते हैं।

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उन्नत ड्रग डिलीवरी और नैनोटेक्नोलॉजी पर केंद्रित अनुसंधान

डॉ. सरमा का मुख्य अनुसंधान कार्य फार्मास्यूटिकल साइंसेज, उन्नत ड्रग डिलीवरी सिस्टम, नैनोटेक्नोलॉजी आधारित चिकित्सा पद्धतियों, बायो-नैनोमटेरियल्स और एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स पर केंद्रित है। उनका अध्ययन विशेष रूप से दवाओं के सटीक वितरण में सुधार, जैव-संगत सामग्रियों के निर्माण और चिकित्सीय लक्ष्यों तक दवा पहुंचाने के अभिनव तरीकों की खोज करता है। इस दिशा में वे छोटे एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स, जिन्हें सामान्य तौर पर एक्सोसोम कहा जाता है, को लक्षित उपचार वाहक के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।

एम्स नई दिल्ली में आमंत्रित व्याख्यान और शैक्षणिक योगदान

शैक्षणिक उपलब्धियों के क्रम में उन्होंने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित वेसिकॉन 2026 सम्मेलन में एक आमंत्रित व्याख्यान भी प्रस्तुत किया। पांच से सात अक्टूबर तक इंडियन एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स सोसायटी द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में उनका व्याख्यान 'स्मॉल एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स: द जर्नी फ्रॉम बायोलॉजिकल मेसेंजर्स टू स्मार्ट ड्रग कैरियर्स' विषय पर आधारित था। इस सत्र में उन्होंने एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल अनुसंधान और स्मार्ट दवा वितरण के उभरते अवसरों पर प्रकाश डाला।

संस्थान ने उपलब्धि को बताया गर्व और प्रेरणा का क्षण

गिरिजानंद चौधरी विश्वविद्यालय ने डॉ. सरमा को उनकी इस उल्लेखनीय सफलता पर बधाई दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय स्थान वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की प्रगति में उनके निरंतर समर्पण का प्रमाण है। संस्थान ने उनके चयन को पूरे विश्वविद्यालय परिवार के संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए गौरव का विषय तथा आगे बढ़ने की बड़ी प्रेरणा करार दिया है।

सवाल-जवाब

डॉ. अनुपम सरमा कौन हैं?
डॉ. अनुपम सरमा असम के गुवाहाटी में स्थित गिरिजानंद चौधरी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज में सहायक प्रोफेसर हैं।
उन्हें कौन सी अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है?
उन्हें वर्ष 2026 के लिए दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में शामिल किया गया है।
यह वैश्विक रैंकिंग किस संस्था द्वारा तैयार की जाती है?
यह रैंकिंग स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा सत्यापित और संकलित किए गए एकल-वर्षीय प्रभाव डेटाबेस पर आधारित है।
वैज्ञानिकों के चयन के लिए किन मानकों का उपयोग किया गया?
चयन प्रक्रिया में शोधकर्ताओं के उद्धरणों की संख्या, एच-इंडेक्स और अन्य मानकीकृत ग्रंथसूची पैमानों का विश्लेषण किया गया।
डॉ. सरमा का मुख्य अनुसंधान क्षेत्र क्या है?
उनका शोध फार्मास्यूटिकल साइंसेज, उन्नत ड्रग डिलीवरी सिस्टम, नैनोटेक्नोलॉजी थेरेप्यूटिक्स, बायो-नैनोमटेरियल्स और एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स पर केंद्रित है।
वेसिकॉन 2026 सम्मेलन में उनका व्याख्यान किस विषय पर था?
उन्होंने एम्स नई दिल्ली में 'स्मॉल एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स: द जर्नी फ्रॉम बायोलॉजिकल मेसेंजर्स टू स्मार्ट ड्रग कैरियर्स' विषय पर आमंत्रित व्याख्यान दिया।
वेसिकॉन 2026 का आयोजन कब और किसके द्वारा किया गया था?
इसका आयोजन इंडियन एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल सोसायटी द्वारा 5 से 7 अक्टूबर तक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में किया गया था।
इस उपलब्धि पर गिरिजानंद चौधरी विश्वविद्यालय ने क्या प्रतिक्रिया दी?
विश्वविद्यालय ने डॉ. सरमा को बधाई देते हुए इसे अपने संकाय, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण बताया।
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