असम के शिवसागर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक और राइजर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई दिसपुर स्थित असम विधानसभा परिसर में चल रहे अपने 14 दिनों के अनिश्चितकालीन सत्याग्रह को 15 अक्टूबर को समाप्त करेंगे। बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक मदद और नुकसान की जांच को लेकर चल रहे इस आंदोलन को खत्म करने का निर्णय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा दी गई औपचारिक सहमति के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री ने ऊपरी असम में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने सहित कई अहम मांगों को पूरा करने का भरोसा दिलाया है।
बाढ़ पीड़ितों के अधिकारों के लिए शुरू हुआ था आंदोलन
अखिल गोगोई ने सरकार को राहत कार्यों और मुआवजे के वितरण के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की थी। जब वह समयसीमा बिना पूरी मदद पहुंचे बीत गई, तब उन्होंने 2 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे से विधानसभा परिसर में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया था। इस सत्याग्रह के जरिए मुख्य रूप से मांग की गई थी कि आपदा की चपेट में आए प्रत्येक परिवार को फौरी वित्तीय सहायता दी जाए, बाढ़ के कारणों और बड़े पैमाने पर हुए नुकसान की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा पानी से ध्वस्त हो चुकी सड़कों की मरम्मत तुरंत शुरू की जाए।
अपने इस आंदोलन को वापस लेने की वजह स्पष्ट करते हुए शिवसागर विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनसे बातचीत कर प्रशासन पर भरोसा रखने और वादों को पूरा करने का अवसर देने का अनुरोध किया था। गोगोई ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिए हैं, लेकिन मैं पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं। मुझे नहीं लगता कि सभी समस्याएं हल हो जाएंगी।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल पीड़ितों तक सहायता पहुंचाना है और यदि सरकार राहत प्रदान करती है तो सारा श्रेय उसी को मिलेगा।
शिवसागर में आर्थिक सहायता और राहत का दायरा
इस आंदोलन की सबसे प्राथमिक मांग यह थी कि जिन परिवारों को अब तक किसी प्रकार की राहत राशि नहीं मिली है, उनमें से प्रत्येक प्रभावित परिवार को फौरी राहत के रूप में 15,000 रुपये का भुगतान किया जाए। विधायक के अनुसार, जब उनका सत्याग्रह चल रहा था, उसी दौरान उनके निर्वाचन क्षेत्र के लगभग 4,000 परिवारों के खातों में यह राशि पहुंचाई गई। इसके अलावा, प्रशासन ने हाल ही में शिवसागर में पहचाने गए अतिरिक्त 3,064 परिवारों के लिए भी विशेष राहत स्वीकृत कर दी है।
अखिल गोगोई ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने फोन पर वार्ता के दौरान उन्हें जानकारी दी कि हाल ही में चिन्हित किए गए 3,064 परिवारों के लिए 4.60 करोड़ रुपये की नई राशि मंजूर कर दी गई है। इस नए आवंटन के साथ ही शिवसागर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत लाभान्वित होने वाले बाढ़ पीड़ित परिवारों की कुल संख्या लगभग 7,000 तक पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों की यह अद्यतन सूची व्हाट्सएप पर साझा करने और धन के सीधे हस्तांतरण का वादा भी किया है। हालांकि, अतिरिक्त 10,000 रुपये के भुगतान की मांग पर गोगोई ने निराशा जताई, क्योंकि सरकार का कहना है कि उस अतिरिक्त भुगतान पर बाद में विचार किया जाएगा।
केंद्रीय प्रस्ताव, तकनीकी जांच और भविष्य का मुआवजा ढांचा
बाढ़ के कारणों तथा सरकारी स्तर पर हुई कथित लापरवाहियों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग पर राज्य सरकार सहमत नहीं हुई, बल्कि इसकी जगह एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह समिति बाढ़ के कारणों और बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान की तकनीकी समीक्षा करेगी।
राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया था कि विधानसभा परिसर में लगातार चल रहे धरने के कारण केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले आधिकारिक मुआवजा प्रस्ताव में देरी हो रही थी। इसके समाधान के रूप में मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि पहले चरण में उन 57,000 परिवारों की सूची केंद्र सरकार को भेजी जाएगी जिनका सर्वेक्षण पहले ही पूरा हो चुका है। इसके तुरंत बाद छूटे हुए अन्य प्रभावित परिवारों के लिए एक दूसरा प्रस्ताव भी केंद्र को भेजा जाएगा।
इस विस्तृत राहत योजना के तहत नुकसान की गंभीरता के आधार पर प्रति परिवार 1.70 लाख रुपये से लेकर 5.60 लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान करने का आश्वासन दिया गया है। बुधवार को 13वें दिन में प्रवेश कर चुका यह अनशन गुरुवार यानी 15 अक्टूबर को 14 दिन पूरे होने पर औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा।





















