असम राज्य सरकार ने जल निकायों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से ₹796.88 करोड़ की लागत वाली एक महत्वाकांक्षी योजना प्रोजेक्ट S.W.I.F.T. का शुभारंभ किया है। इस वृहद कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के पारंपरिक जल क्षेत्रों यानी बीलों का पुनरुद्धार करना और स्थानीय मत्स्य पालन उद्योग को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि असम के प्राकृतिक बील राज्य की पर्यावरणीय विरासत का अभिन्न हिस्सा होने के साथ-साथ आम जनता के सामाजिक और आर्थिक जीवन का प्रमुख आधार हैं।
23 जिलों के 71 बीलों का होगा जीर्णोद्धार
एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) द्वारा वित्तपोषित इस प्रोजेक्ट S.W.I.F.T. के तहत असम के 23 जिलों में स्थित 71 पारंपरिक जल निकायों को शामिल किया गया है। यह परियोजना लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जल निकायों के पारिस्थितिकी स्वास्थ्य में सुधार लाएगी। लंबे समय से उपेक्षा और गाद जमने के कारण प्रभावित हुए इन प्राकृतिक संसाधनों को पुनर्जीवित कर जलीय जैव विविधता को बनाए रखने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन्हें उत्पादक प्राकृतिक संपत्ति के रूप में सुरक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
6,000 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का रखा गया लक्ष्य
प्रोजेक्ट S.W.I.F.T. का एक प्रमुख उद्देश्य इन पुनर्जीवित बीलों के माध्यम से राज्य में मछली उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाना है। सरकार ने इन जल स्रोतों से सालाना 6,000 मीट्रिक टन मछली उत्पादन हासिल करने की योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त, मछली की बेहतर उपलब्धता और निरंतर स्टॉकिंग सुनिश्चित करने के लिए हर साल लगभग 570 मिलियन (57 करोड़) मछली के बच्चे (फिश फ्राई) उत्पादित करने का लक्ष्य भी तय किया गया है, जिससे स्थानीय मछली आपूर्ति प्रणाली सुदृढ़ होगी।
युवाओं और मछुआरा समुदायों को सीधा आर्थिक सहयोग
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह योजना बीलों पर निर्भर मछुआरा समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाने पर केंद्रित है। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को 302 नाव और मछली पकड़ने के जाल वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा, मत्स्य क्षेत्र में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार 1,000 युवाओं में से प्रत्येक को ₹50,000 का सीधा अनुदान प्रदान करेगी, जिससे वे अपने नए व्यवसाय स्थापित कर सकें।
स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रोसेसिंग और फीड यूनिट्स
मत्स्य पालन से जुड़ी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास भी किया जा रहा है। योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए 30 फिश फीड निर्माण यूनिट और 100 फिश प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। इस कदम से स्थानीय स्तर पर निर्मित मछली उत्पादों का प्रसंस्करण और वितरण सुगम होगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय समूहों की आय में टिकाऊ वृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी।





















