असम के पशुधन क्षेत्र को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने राज्य की देशी भेड़ की नस्ल 'असमी' (Axomi) को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय नस्ल पंजीकरण प्रदान किया है। इस फैसले के बाद यह देशी भेड़ भारत की पंजीकृत पशुधन नस्लों की आधिकारिक सूची में शामिल हो गई है। इस मान्यता से पूर्वोत्तर क्षेत्र में देशी पशु आनुवंशिक संसाधनों के वैज्ञानिक संरक्षण, व्यवस्थित प्रजनन और दीर्घकालिक विकास के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण आजीविका और नस्ल संरक्षण को बढ़ावा
असमी भेड़ लंबे समय से असम के ग्रामीण कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। राज्य भर के ग्रामीण समुदायों द्वारा पारंपरिक रूप से पाली जाने वाली यह देशी नस्ल पशुपालक किसानों की आय और आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान देती आई है। यह भेड़ असम की स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के प्रति बेहद अनुकूल है और अपनी विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं के कारण विपरीत मौसम में भी आसानी से ढल जाती है।
वैज्ञानिक प्रजनन और आनुवंशिक सुधार का दायरा
राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण मिलने से असमी भेड़ के व्यवस्थित प्रजनन कार्यक्रमों के लिए नए दरवाजे खुल गए हैं। कृषि वैज्ञानिक और पशुचिकित्सक अब इसकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए विशेष जेनेटिक सुधार कार्यक्रम शुरू कर सकेंगे। शोधकर्ताओं का उद्देश्य इस नस्ल के मूल आनुवंशिक गुणों को सुरक्षित रखते हुए इसकी विकास दर और क्षमता में सुधार करना है, जिससे किसानों को अधिक आर्थिक लाभ मिल सके।
साझा प्रयासों से मिली राष्ट्रीय पहचान
यह महत्वपूर्ण उपलब्धि पशुधन शोधकर्ताओं, पशुचिकित्सकों, कृषि संस्थानों और स्थानीय पशुपालक समुदायों के साझा प्रयासों का परिणाम है। इन सभी ने मिलकर असमी भेड़ की शारीरिक विशेषताओं और इसके महत्व का व्यापक दस्तावेजीकरण किया। यह पंजीकरण न केवल क्षेत्रीय जैव विविधता को सुरक्षित करने में मदद करेगा, बल्कि असम की कृषि अर्थव्यवस्था में इस देशी नस्ल के वैज्ञानिक संवर्धन और संरक्षण को भी नई दिशा देगा।



















