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असम में अमूर फाल्कन के जमावड़े वाले इलाकों में ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी की मांगअसम
4 नव॰ 2026, 2:56 pm (1 घंटे पहले)· 0

असम में अमूर फाल्कन के जमावड़े वाले इलाकों में ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी की मांग

संरक्षण संस्था अरण्यक ने असम के दीमा हसाओ और मोरीगांव में अमूर फाल्कन के पड़ाव स्थलों पर ड्रोन संचालन पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है।

असम के अहम पड़ाव स्थलों पर हर साल जुटने वाले प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। संरक्षण संगठन अरण्यक ने राज्य में अमूर फाल्कन के जमावड़े वाले प्रमुख इलाकों के आसपास ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। संस्था ने चेताया है कि इस तरह की मानवाधिकार और तकनीकी दखलअंदाजी इन मौसमी परिंदों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है और उनके प्राकृतिक प्रवास चक्र को गंभीर रूप से बाधित कर सकती है।

सोशल मीडिया रील्स और ड्रोन से गहराता खतरा

यह अपील उन हालिया घटनाओं के बाद सामने आई है जहां पर्यटक और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर पक्षियों के झुंड के बेहद करीब जाकर ड्रोन उड़ाते देखे गए हैं। अरण्यक के अनुसार, तेज गति से घूमने वाले ड्रोन प्रोपेलर से पक्षियों को सीधा शारीरिक नुकसान पहुंचने और कटने का खतरा रहता है। इसके साथ ही, तेज आवाज और अनचाही हलचल से शांतिपूर्ण बसेरों में भारी खलबली मचती है, जिससे परिंदे दहशत में आ जाते हैं।

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अरण्यक के आयोजन सचिव और वन्यजीव फोटोग्राफर उदयन बोरठाकुर ने पक्षियों के बसेरों के इर्द-गिर्द ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फुटेज और लोकप्रियता हासिल करने की होड़ किसी भी सूरत में वन्यजीवों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रवासी पक्षियों की तस्वीरें खींचना और उनकी डॉक्यूमेंट्री तैयार करना पूरी तरह जिम्मेदारी से जुड़ा काम होना चाहिए, जिसमें मनोरंजन के मुकाबले जीवों की सलामती सर्वोपरि रहे।

प्रशासन से सख्त कदम और बफर जोन बनाने की अपील

अरण्यक ने इस संबंध में दीमा हसाओ स्वायत्त परिषद और मोरीगांव जिला प्रशासन से तत्काल आधिकारिक आदेश जारी करने का आग्रह किया है। संस्था चाहती है कि अमूर फाल्कन के पहचाने गए जमावड़े वाले इलाकों के पास मनोरंजन, व्यावसायिक और अन्य सभी गैर-जरूरी ड्रोन उड़ानों को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित किया जाए।

इसके अलावा, संस्था ने इन ठिकानों के आसपास स्पष्ट नो-ड्रोन बफर जोन तय करने की वकालत की है। साथ ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी को मजबूत करने तथा आगंतुकों और फोटोग्राफरों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता रेखांकित की है। अरण्यक ने प्रशासन को अपनी विशेषज्ञता मुहैया कराने, जागरूकता सामग्री तैयार करने और स्थानीय समुदायों, सैलानियों एवं कंटेंट क्रिएटर्स के लिए संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित करने में पूरा सहयोग देने की पेशकश भी की है।

हजारों किलोमीटर का प्रवास और असम की भूमिका

अमूर फाल्कन पक्षी जगत में दुनिया की सबसे लंबी और कठिनतम प्रवासी यात्राओं में से एक पूरी करते हैं। पूर्वी एशिया में स्थित अपने प्रजनन क्षेत्रों से उड़ान भरकर ये परिंदे दक्षिणी अफ्रीका के अपने शीतकालीन गंतव्यों तक का लंबा सफर तय करते हैं। इस वार्षिक प्रवास यात्रा के दौरान असम और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्से बेहद अहम पारगमन और विश्राम स्थल के रूप में काम करते हैं। संस्था ने स्पष्ट किया है कि इन अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए इन विश्राम स्थलों को इंसानी दखल से मुक्त रखना बेहद जरूरी है।

सवाल-जवाब

अरण्यक ने असम में किस चीज पर पाबंदी लगाने की मांग की है?
अरण्यक ने अमूर फाल्कन के जमावड़े वाले इलाकों के आसपास सभी प्रकार के गैर-जरूरी और मनोरंजक ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
ड्रोन से अमूर फाल्कन पक्षियों को क्या खतरा है?
ड्रोन के तेजी से घूमने वाले प्रोपेलर से पक्षियों को शारीरिक चोट लग सकती है और इससे उनके विश्राम स्थलों पर भारी अशांति फैलती है।
यह मांग किन प्रशासनिक संस्थाओं से की गई है?
यह मांग दीमा हसाओ स्वायत्त परिषद और मोरीगांव जिला प्रशासन से की गई है।
अमूर फाल्कन का वार्षिक प्रवास मार्ग क्या है?
अमूर फाल्कन पूर्वी एशिया में अपने प्रजनन क्षेत्रों से निकलकर दक्षिणी अफ्रीका में अपने शीतकालीन ठिकानों तक प्रवास करते हैं।
उदयन बोरठाकुर ने सोशल मीडिया को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया सामग्री बनाने की होड़ वन्यजीवों की सुरक्षा और सलामती की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 मिनट पहले

रील और लाइक्स के चक्कर में इन परिंदों की जान जोखिम में डालना बिल्कुल गलत है। प्रशासन को ऐसे लोगों पर तुरंत जुर्माना लगाना चाहिए ताकि ये बाज अपनी यात्रा शांति से पूरी कर सकें।

Arjun Mehta@arjun-mehta·38 मिनट पहले

करण भाई, जुर्माना तो ठीक है पर क्या सिर्फ पाबंदी लगाने से लोग मान जाएंगे? जब तक लोकल लेवल पर खुद लोग आगे आकर नहीं रोकेंगे, तब तक नियम कागजों में ही रहेंगे।

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