असम के गोलपाड़ा जिले में सोमवार को बुलडोजर और जेसीबी मशीनों ने पांच गांवों में 73 घरों को जमींदोज कर दिया। जिला प्रशासन ने इसे कृषि भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ चलाए गए बड़े अभियान का हिस्सा बताया है।
एक ही सुबह में पांच गांव खाली कराए गए
यह तोड़फोड़ अभियान सुबह करीब 8 बजे शुरू हुआ और कृष्णाई इलाके के मटिया राजस्व सर्कल के तहत आने वाले हरिमुरा, भोजमाला तेंगाबाड़ी, पश्चिम भेलाखामार, खारिजा मानिकपुर और जोतसरवाड़ी गांवों में चला। करीब 10 एक्सकेवेटर के अलावा जेसीबी मशीनों और बुलडोजरों को घरों को गिराने के काम में लगाया गया, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
प्रशासन का कहना, अवैध निर्माण और जलमार्ग अवरुद्ध
जिला प्रशासन के मुताबिक इन 73 परिवारों ने कृषि भूमि पर कब्जा कर बिना जरूरी भूमि वर्गीकरण बदलवाए घर बना लिए थे, जो कानूनन जरूरी होता है। अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इन बस्तियों ने खेती के काम आने वाले प्राकृतिक जलनिकासी चैनलों और जलमार्गों को अवरुद्ध कर दिया था, जिससे आसपास के इलाकों में खेती प्रभावित हो रही थी।
नोटिस अवधि खत्म होने के बाद चला बुलडोजर
प्रशासन ने अभियान से पहले ही कब्जाधारियों को नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर खुद घर खाली कर ढांचे हटाने को कहा था। अधिकारियों के मुताबिक तय समय में एक भी परिवार ने निर्देश का पालन नहीं किया, जिसके बाद प्रशासन को जबरन बेदखली अभियान चलाना पड़ा।
घर टूटते देख फूट-फूटकर रोए लोग
सोमवार को गिराए गए कई घर उन परिवारों के थे जो सालों से इस जमीन पर रह रहे थे। अपने घर टूटते देख कई लोग फूट-फूटकर रो पड़े। कुछ प्रभावित परिवारों ने बताया कि 2017 में ब्रह्मपुत्र नदी में उनके बागबोर और मौजूदा मांडिया इलाके के पुराने घर बह गए थे, जिसके बाद उन्होंने गोलपाड़ा इलाके में जमीन खरीदकर नए सिरे से बसना शुरू किया था।
स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
हर कोई इस कार्रवाई का विरोध करता नहीं दिखा। कुछ स्थानीय लोगों ने बेदखली अभियान का स्वागत करते हुए कहा कि इससे कृषि भूमि सुरक्षित होगी, जलमार्ग फिर से बहाल होंगे और स्थानीय किसानों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी।



















