रेल पटरियों पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे अभियानों के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अधिकार क्षेत्र में इस साल जनवरी से सितंबर के बीच नौ महीनों के दौरान सघन निगरानी और सुरक्षा उपायों की मदद से 255 हाथियों को संभावित रेल हादसों से सुरक्षित बचाया गया। संवेदनशील रेल खंडों पर तैनात रेल कर्मियों की मुस्तैदी, आधुनिक तकनीकी प्रणालियों और वन विभाग के साथ निरंतर संपर्क के चलते इन विशालकाय जानवरों और ट्रेनों के बीच होने वाली खतरनाक टक्करों को टालने में कामयाबी मिली है।
विभिन्न रेल मंडलों में हाथियों को बचाने के आंकड़े
नौ महीनों की इस अवधि में बचाए गए कुल 255 हाथियों में से सबसे अधिक संख्या पश्चिम बंगाल और असम के मंडलों में दर्ज की गई। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार मंडल में सबसे पहले संभावित हादसों की चपेट में आने से 106 हाथियों की जान बचाई गई। वहीं असम राज्य के तहत आने वाले लामडिंग मंडल में सर्वाधिक 122 हाथियों को सुरक्षित ट्रैक पार कराया गया अथवा रोका गया। इसके अलावा असम के ही तिनसुकिया मंडल में 15 हाथियों और रंगिया मंडल में 14 हाथियों को समय रहते ट्रेन की चपेट में आने से बचाया गया। रेल प्रशासन के अनुसार, इन सभी मंडलों में सुरक्षा तंत्र को बेहद सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को तुरंत टाला जा सके।
एआई और आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल
हाथियों के झुंड को पटरियों के नजदीक आने से रोकने और समय पर अलर्ट हासिल करने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया है। इनमें सबसे प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम है, जो डिस्ट्रीब्यूटेड एकाउस्टिक सिस्टम तकनीक पर काम करता है। यह सिस्टम पटरियों के आसपास हाथियों की आवाजाही होते ही रियल टाइम अलर्ट जारी कर देता है। जैसे ही सिस्टम से चेतावनी मिलती है, रेल कर्मी तुरंत सक्रिय होकर संबंधित संवेदनशील खंडों में दौड़ रही ट्रेनों के लोको पायलट और क्रू सदस्यों को सतर्क कर देते हैं।
इसके अतिरिक्त, हाथियों को पटरियों से दूर भगाने के लिए संवेदनशील स्थानों पर 'प्लान बी' प्रणाली भी लगाई गई है। यह उपकरण मधुमक्खियों की तेज आवाज निकालकर हाथियों को पटरियों की तरफ आने से हतोत्साहित करता है, क्योंकि हाथी प्राकृतिक रूप से मधुमक्खियों के झुंड से दूर रहते हैं। वन्यजीवों की स्वतंत्र आवाजाही को सुगम बनाने और उनके ट्रैक पार करने के जोखिम को कम करने के लिए चिन्हित स्थानों पर विशेष अंडरपास का निर्माण भी किया जा रहा है।
गति नियंत्रण, जागरूकता और वन विभाग से समन्वय
तकनीकी उपकरणों के साथ-साथ रेलवे परिचालन में भी कई अहम बदलाव लागू किए गए हैं। जिन इलाकों में हाथियों की आवाजाही की सूचना मिलती है, वहां ट्रेनों पर अस्थायी गति प्रतिबंध और रात के समय विशेष स्पीड लिमिट लागू की जाती है। ट्रेनों की रफ्तार कम रहने से लोको पायलट को आपात स्थिति में ब्रेक लगाने का पर्याप्त समय मिल जाता है।
रेलवे प्रशासन ट्रेन क्रू, रेलवे स्टाफ, पैंट्री कार कर्मियों और यात्रियों को भी लगातार जागरूक कर रहा है ताकि कोई भी व्यक्ति पटरियों के किनारे बचा हुआ भोजन या कचरा न फेंके। खाने-पीने की चीजें पटरियों के पास फेंकने से हाथी और अन्य जंगली जानवर भोजन की तलाश में वहां खिंचे चले आते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि वन विभाग के साथ निरंतर समन्वय और रियल टाइम संवाद के जरिए सूचना मिलते ही तुरंत कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रेन और हाथी के बीच होने वाली टक्कर से जुड़े सभी मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत उनकी विस्तृत जांच की जाती है।





















