हर की पौड़ी पर ब्रिटिश काल के मिष्ठान का जायका, तीर्थयात्रियों की पहली पसंद बना मलाई समोसानीतू कपूर ने पैपराजी के बैक शॉट मांगने पर ली चुटकी, गाड़ी में बैठने से पहले पूछा तीखा सवालहरियाणा में ऑनलाइन निवेश और क्रिप्टो के नाम पर करोड़ों की ठगी, रेहड़ी वाले से लग्जरी कारों के मालिक बने जालसाज समेत चार गिरफ्तारउत्तर प्रदेश के भदोही का नाम संत रविदास नगर भदोही करने का ऐलान, 1340 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगातबिना जहर और रसायनों के घर से चूहों और छछूंदरों को कैसे रखें दूरक्रिप्टो पर रिजर्व बैंक का रुख बेहद सावधान, केंद्रीय बैंक गवर्नर ने टेक्नोलॉजी इनोवेशन और मौद्रिक संप्रभुता पर रखी स्पष्ट रायमुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर: साबरमती नदी पर 12 मंजिला इमारत जितना ऊंचा पुल बनकर तैयारमेटा ग्लासेस नोवा में कॉल नॉइज़ कैंसिलेशन दमदार, लेकिन एआई असिस्टेंट अब भी अधूराबिना पेटीकोट के साड़ी ड्रेप करने के आसान तरीके, वार्डरोब में मौजूद इन कपड़ों से पाएं शानदार स्टाइलमुंबई में खाली जेब और तीन दिन का फाका, शबाना आजमी ने बयां किया जावेद अख्तर का अनसुना सफर
पर्यावरणविद् जाधव पायेंग की सेहत में सुधार, इलाज का पूरा खर्च उठाएगी असम सरकारअसम
4 अक्तू॰ 2026, 5:04 pm (23 मिनट पहले)· 0

पर्यावरणविद् जाधव पायेंग की सेहत में सुधार, इलाज का पूरा खर्च उठाएगी असम सरकार

जोरहाट के अस्पताल में भर्ती पद्मश्री जाधव पायेंग की हालत अब स्थिर है, वहीं राज्य सरकार ने उनके उपचार का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है।

पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए प्रख्यात पर्यावरणविद् जाधव पायेंग की सेहत में अब सुधार देखा जा रहा है। तेज बुखार, खांसी और जुकाम की समस्या बढ़ने के बाद उन्हें असम के जोरहाट स्थित जोरहाट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के अनुसार उनकी शारीरिक स्थिति अब पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। इस बीच राज्य के वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने अस्पताल पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और महत्वपूर्ण घोषणा की।

अस्पताल पहुंचे वन मंत्री, इलाज का खर्च उठाने का ऐलान

वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने शनिवार को अस्पताल पहुंचकर जाधव पायेंग से मुलाकात की और उनका इलाज कर रहे मेडिकल दल से विस्तृत चर्चा की। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उनके उपचार का संपूर्ण आर्थिक भार वहन करेगी। अस्पताल परिसर में बातचीत करते हुए जयंत मल्लाबरुआ ने कहा,

“मैंने डॉक्टरों से बात की है और आज उनसे मुलाकात भी की। मैंने अस्पताल कर्मियों को निर्देश दिया है कि सारा खर्च राज्य सरकार उठाएगी और हम परिवार की हर संभव मदद करेंगे।”

ये भी पढ़ें

पर्यावरणविद् की बेटी मुनमुनी पायेंग ने भी पिता की हालत स्थिर होने की पुष्टि की है। उन्होंने उपचार में जुटे चिकित्सकों की टीम और सहायता के लिए आगे आए मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

ऑक्सीजन स्तर गिरने के बाद आईसीयू में किया गया था शिफ्ट

अस्पताल में भर्ती होने से पहले जाधव पायेंग कई दिनों से सर्दी, खांसी और तेज बुखार से जूझ रहे थे। गुरुवार को जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तो चिकित्सीय जांच के दौरान शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी नीचे पाया गया। सांस लेने में हो रही गंभीर तकलीफ को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया था। निरंतर निगरानी और सघन उपचार के बाद अब उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।

1,360 एकड़ में तैयार किया था विशाल मोलाई जंगल

जाधव पायेंग को दुनिया भर में ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में पहचान मिली है। उन्होंने दशकों के अथक परिश्रम और पौधारोपण के दम पर ब्रह्मपुत्र नदी के एक बंजर रेतीले टीले को घने जंगल में तब्दील कर दिया था। जोरहाट में कोकिलामुख के निकट स्थित यह वन क्षेत्र ‘मोलाई फॉरेस्ट’ के नाम से विख्यात है, जो लगभग 1,360 एकड़ के विशाल दायरे में फैला हुआ है। उनके इस ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए देश-विदेश में उनका विशेष सम्मान किया जाता है।

सवाल-जवाब

जाधव पायेंग को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया है?
उन्हें असम के जोरहाट स्थित जोरहाट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JMCH) में भर्ती कराया गया है।
उन्हें अस्पताल में क्यों भर्ती कराना पड़ा था?
तेज बुखार, खांसी और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरने के कारण उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया।
क्या जाधव पायेंग की हालत अब खतरे से बाहर है?
हां, डॉक्टरों और उनकी बेटी मुनमुनी पायेंग के अनुसार उनकी स्थिति अब पूरी तरह स्थिर है।
असम सरकार ने उनके उपचार के संबंध में क्या घोषणा की है?
असम के वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने घोषणा की है कि राज्य सरकार उनके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी और परिवार की मदद करेगी।
जाधव पायेंग किस बड़े पर्यावरण कार्य के लिए जाने जाते हैं?
उन्होंने ब्रह्मपुत्र के रेतीले क्षेत्र में अकेले पेड़ लगाकर लगभग 1,360 एकड़ में फैला ‘मोलाई जंगल’ तैयार किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

मोलाई जंगल देखने गया था तब इनसे मिलने की इच्छा अधूरी रह गई थी। देश के लिए इतना करने वाले इस सच्चे हीरो का हाल जानकर फिक्र हुई थी, सरकार का खर्च उठाना राहत की बात है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 मिनट पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पद्मश्री पायंघ जैसे जमीन से जुड़े पर्यावरणविद् के इलाज का खर्च सरकार उठा रही है, यह देखकर सुकून मिला।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp