देश की सड़कों पर दशकों से अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने वाली मारुति सुजुकी वैगन आर का इलेक्ट्रिक संस्करण भले ही कार निर्माता ने आधिकारिक तौर पर पेश न किया हो, लेकिन इसे अब एक वर्कशॉप ने हकीकत में बदल दिखाया है। मध्य प्रदेश की एक मॉडिफिकेशन कंपनी ने दो हजार नौ मॉडल की करीब सत्रह साल पुरानी पेट्रोल कार को पूरी तरह से बैटरी चालित वाहन में तब्दील कर दिया है। पेट्रोल के बढ़ते खर्च से त्रस्त वाहन चालकों के लिए यह अनोखा प्रयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी काफी किफायती और व्यावहारिक समाधान बनकर सामने आया है।
पेट्रोल इंजन से इलेक्ट्रिक सिस्टम में बदलाव की प्रक्रिया
इस पूरी रेट्रोफिटिंग प्रक्रिया की शुरुआत पारंपरिक पेट्रोल इंजन को बाहर निकालने से हुई। इसके साथ ही वाहन के पिछले सभी गैर-जरूरी हिस्से जैसे साइलेंसर पाइप, एग्जॉस्ट सिस्टम और पेट्रोल की टंकी को पूरी तरह से हटा दिया गया। कार को इलेक्ट्रिक बनाते समय तकनीकी संतुलन का खास तौर पर ध्यान रखा गया है। पारंपरिक इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरह सिंगल स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन लगाने के बजाय, मॉडिफायर ने पुरानी गाड़ी के गियरबॉक्स, क्लच और फ्लाईव्हील को छेड़छाड़ किए बिना वैसा ही बनाए रखा है और मुख्य हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिक मोटर को सीधे इसी गियरबॉक्स से जोड़ा गया है।
एसी और बैटरी का अनूठा सेटअप
साधारण पेट्रोल इंजन की तरह इलेक्ट्रिक मोटर गाड़ी खड़ी रहने पर चालू नहीं रहती, इसलिए एयर कंडीशनर कंप्रेसर को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक किलोवाट क्षमता की ई-रिक्शा मोटर का अलग से इस्तेमाल किया गया है। बोनट के नीचे कस्टम सपोर्ट फ्रेम तैयार कर बैटरी पैक और मुख्य मोटर को सुरक्षित ढंग से फिट किया गया है, जबकि हाई-वोल्टेज तारों को केबिन के कालीन के नीचे से सुरक्षित रूप से निकाला गया है। चार्जिंग के लिए किसी महंगे फास्ट चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल करने के बजाय, पेट्रोल भरने वाले ढक्कन के भीतर ही घरेलू सोलह-एम्पीयर का इंडस्ट्रियल चार्जिंग सॉकेट फिट किया गया है।
परफॉर्मेंस और रेंज की जानकारी
यह रूपांतरित इलेक्ट्रिक कार पचहत्तर किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड तक दौड़ सकती है। एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद यह वाहन सौ से एक सौ दस किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज प्रदान करती है। रोजमर्रा के शहरी सफर, दफ्तर आने-जाने और स्थानीय बाजार के कामों के लिए यह रेंज काफी उपयोगी साबित होती है। इसके अलावा वाहन के केबिन के भीतर बैटरी और मोटर की लाइव स्थिति जांचने के लिए एक स्मार्ट डिजिटल डिस्प्ले और डीसी-डीसी कनवर्टर को भी जोड़ा गया है।
स्क्रैपेज पॉलिसी और रेट्रोफिटिंग का भविष्य
यह अनोखा बदलाव भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के सामने एक बड़ा और सकारात्मक सवाल खड़ा करता है। एक तरफ जहां पंद्रह साल से पुराने वाहनों पर स्क्रैपेज के कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कम लागत में पुरानी गाड़ी को प्रदूषण मुक्त वाहन में बदलना एक बेहतरीन विकल्प है। जानकारों का मानना है कि यदि वाहन निर्माता कंपनियां और सरकार मिलकर इस प्रकार की प्रमाणित रेट्रोफिटिंग किट्स को कानूनी मंजूरी और सब्सिडी प्रदान करें, तो आम नागरिकों को नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वे कम खर्च में ग्रीन मोबिलिटी का फायदा उठा सकेंगे।



















