बिहार के मुजफ्फरपुर में दीवाली के त्योहार से पहले मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग ने अवैध शराब तस्करों के एक बड़े नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है। बेला फेज दो स्थित नारायणपुर इंडस्ट्रियल एरिया रोड पर छापेमारी करते हुए अधिकारियों ने पंजाब नंबर के एक बड़े ट्रक को घेराबंदी कर पकड़ा। तलाशी के दौरान उस ट्रक के भीतर से तकरीबन 1200 कार्टन विदेशी शराब बरामद की गई है। जब्त की गई इस अवैध खेप का बाजार मूल्य लगभग एक करोड़ रुपये आंका गया है। मौके से ही वाहन के चालक को हिरासत में ले लिया गया है, जिससे नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं के बारे में सुराग जुटाए जा रहे हैं।
जांच टीमों को चकमा देने के लिए बनाया था विशेष कवर
शराब माफिया ने निगरानी एजेंसियों और स्थानीय पुलिस की जांच चौकियों से सुरक्षित निकलने के लिए बेहद चालाकी भरा तरीका तैयार किया था। तस्करों ने पूरे ट्रक में सबसे ऊपर वेस्ट पेपर और कॉटन के कतरनों से भरी बोरियों की मोटी परत बिछा रखी थी। बाहर से देखने पर ऐसा आभास होता था कि वाहन केवल सामान्य फैक्ट्री सामग्री या रीसाइक्लिंग वेस्ट लेकर जा रहा है। इन बोरियों के ठीक नीचे 1200 कार्टन शराब के बक्से सलीके से छिपाए गए थे। तस्करों को पूरा भरोसा था कि रास्ते में सरसरी निगाह से जांच होने पर बोरियों के कारण शराब की गंध या पेटियां किसी की नजर में नहीं आएंगी, लेकिन सटीक इनपुट के कारण उनकी यह पूरी योजना नाकाम साबित हुई।
गुप्त सूचना के आधार पर नारायणपुर रोड पर हुई कार्रवाई
उत्पाद विभाग को पहले ही यह गोपनीय सूचना हासिल हो चुकी थी कि पंजाब से शराब की एक बहुत बड़ी खेप मुजफ्फरपुर के इलाके में खपाने के लिए दाखिल होने वाली है। इस इनपुट को पुख्ता मानते हुए एएसआई नीरज कुमार सिंह की अगुवाई में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। जांच दल ने तुरंत बेला फेज दो के नारायणपुर रोड इलाके में पहुंचकर निगरानी शुरू की। वहां सड़क किनारे एक संदिग्ध पंजाब रजिस्ट्रेशन का ट्रक खड़ा दिखाई दिया, जिसके पास ही उसका चालक भी मौजूद था। अधिकारियों ने बिना देर किए इलाके को घेरते हुए ट्रक और चालक को अपनी हिरासत में ले लिया।
कड़ाई से पूछताछ के बाद खुला बोरियों के भीतर का सच
प्रारंभिक पूछताछ के दौरान चालक ने अधिकारियों को बरगलाने की कोशिश की और दावा किया कि गाड़ी में केवल सामान्य ट्रांसपोर्ट माल भरा हुआ है। जांच दल ने जब सख्ती दिखाते हुए दस्तावेजों और बिल्टी की मांग की, तब चालक टूट गया और उसने गाड़ी के भीतर शराब छिपी होने की बात स्वीकार कर ली। अधिकारियों ने जब ट्रक का पिछला डाला खुलवाया, तो सामने केवल कागज और कतरन की बोरियां ही दिखाई दे रही थीं। जब उन बोरियों को एक-एक कर हटाया गया, तो नीचे विदेशी शराब की पेटियों का बड़ा जखीरा देखकर वहां मौजूद पूरी टीम भी सन्न रह गई।
दस हजार रुपये के भाड़े पर पंजाब से बिहार लाया था खेप
पकड़े गए चालक की पहचान पंजाब के फतेहगढ़ जिले के खमानोल निवासी मनप्रीत सिंह के तौर पर की गई है। पूछताछ में मनप्रीत सिंह ने खुलासा किया कि वह पूरी खेप पंजाब से लोड कराकर लंबी दूरी तय करते हुए सीधे मुजफ्फरपुर लेकर पहुंचा था। योजना के मुताबिक मुजफ्फरपुर शहर और आसपास के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों में शराब की पेटियों को अनलोड किया जाना था। चालक को निर्देश दिए गए थे कि वह गाड़ी को बेला के पास सड़क किनारे खड़ी रखे, जहां स्थानीय सिंडिकेट का मुख्य कारोबारी आकर गाड़ी का नियंत्रण अपने हाथ में लेने वाला था। इस पूरी यात्रा और शराब पहुंचाने के बदले चालक को 10 हजार रुपये मेहनताना देने का सौदा तय हुआ था।
स्थानीय शराब माफिया की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी
उत्पाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार राम ने बताया कि पुख्ता खुफिया इनपुट पर तेजी से कदम उठाते हुए इस पूरे अंतरराज्यीय शराब रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है। ट्रक से बरामद भारी मात्रा में विदेशी शराब के ब्रांड और कुल बोतलों का मिलान कराया जा रहा है। मनप्रीत सिंह के खिलाफ मद्यनिषेध कानून के तहत केस दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर माल मंगवाने वाले मुख्य शराब कारोबारियों और उनके मददगारों के मोबाइल नंबर व ठिकानों का पता लगाकर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापे मारे जा रहे हैं।



















