बिहार में आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों और आयकर चुकाने वाले परिवारों से बिजली सब्सिडी का लाभ त्यागने का आग्रह किया जाएगा। राज्य प्रशासन ने इस बाबत एक विशेष मुहिम की रूपरेखा तैयार कर ली है जो आने वाली पहली दिसंबर से धरातल पर उतरेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पहल की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि जो लोग खुद बिजली का बिल चुकाने में समर्थ हैं, उन्हें स्वेच्छा से इस सरकारी रियासत से पीछे हटना चाहिए ताकि जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सके।
इस योजना की घोषणा राजधानी पटना में उस वक्त की गई जब मुख्यमंत्री दीपावली के मौके पर वहां की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले वंचित तबके के बीच पहुंचे थे। बस्तियों का दौरा करते हुए उन्होंने स्थानीय निवासियों में मिठाइयां बांटी और उनके साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य की जनता को बिजली पर रियायत देने के एवज में सरकार को हर साल लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यदि संपन्न वर्ग इस सुविधा को स्वेच्छा से छोड़ देता है, तो इस भारी-भरकम राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे और अन्य विकास कार्यों को गति देने में किया जा सकेगा।
इस मुहिम के पीछे की परिकल्पना को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने अतीत के एक बड़े राष्ट्रीय उदाहरण का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी का त्याग करने की अपील की थी, ठीक उसी तर्ज पर बिहार में यह कदम उठाया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्य सरकार प्रत्येक परिवार को सालाना लगभग 10 हजार रुपये की बिजली सब्सिडी मुहैया करा रही है। जो लोग आगे आकर इस रियासत को छोड़ेंगे, उन्हें सरकार की तरफ से सम्मानित भी किया जाएगा। इससे पहले पिछले सप्ताह पटना में संपन्न हुए युवा संसद कार्यक्रम के दौरान भी इस प्रकार का आह्वान किया गया था।
वंचितों के साथ दीपोत्सव मनाने पर जोर
आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक महकमे के नुमाइंदों के लिए भी एक विशेष संदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे आदिवासी बहुल इलाकों का रुख करें और वहां दलित तथा अत्यंत पिछड़े समुदायों के बीच जाकर दीपावली का पर्व मनाएं। उनका कहना था कि प्रशासनिक अमले को इन उपेक्षित तबकों के सुख-दुख में साझीदार बनना चाहिए ताकि समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को यह अहसास हो सके कि वह भी इस मुख्यधारा का हिस्सा है। त्योहार का असली आनंद तभी है जब समाज का कोई भी नागरिक इससे अछूता न रहे। खुद उनका झुग्गी-बस्तियों में जाना इसी सामाजिक समरसता की एक बानगी है।
प्रधानमंत्री का आगामी दौरा और सुरक्षा बलों की सराहना
इस दौरान देश की सीमाओं की सुरक्षा में जुटे जवानों के प्रति भी सम्मान प्रकट किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बस्तर दौरे का जिक्र करते हुए वहां सुरक्षा बलों के बीच दीपोत्सव मनाने के कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का इस तरह सैनिकों के साथ त्योहार मनाना पुरानी परंपरा रही है और वे लगातार सीमा पर तैनात प्रहरियों का हौसला बढ़ाते रहे हैं। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम के तहत यह जानकारी सामने आई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 21 नवंबर को बिहार के दौरे पर आने वाले हैं। राज्य प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान बिहार के विकास और कई बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी घोषणाएं की जा सकती हैं।



















