चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के बीच बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी मोर्चे के भीतर गहरी खींचतान खुलकर सामने आ गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जहां राहुल गांधी विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर मोर्चा संभाल रहे थे, वहीं पटना की सड़कों पर राष्ट्रीय जनता दल यानी RJD को अपने दम पर अकेले ही आंदोलन की कमान संभालनी पड़ी। RJD नेता तेजस्वी यादव ने इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कांग्रेस और वामपंथी दलों को खुला न्योता भेजा था, मगर तय शुरुआत के वक्त दोनों सहयोगी दलों का कोई भी वरिष्ठ नेता उनके साथ मंच साझा करने या सड़क पर उतरने नहीं पहुंचा।
सड़क पर उतरा आक्रोश मार्च और बैरिकेडिंग पर टकराव
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में निकाले गए इस आंदोलन को 'आक्रोश मार्च' का नाम दिया था। तय योजना के तहत RJD नेताओं और कार्यकर्ताओं का इरादा राजभवन तक पैदल मार्च करके उसका घेराव करने का था। तेजस्वी यादव सुबह करीब 10 बजे ही अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतर आए और मार्च आगे बढ़ाने लगे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बिहार विधानसभा के नजदीक ही मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। पुलिस बल ने तेजस्वी यादव और उनके साथ चल रहे कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद मौके पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति तनावपूर्ण होने पर तेजस्वी यादव खुद बैरिकेड पर चढ़ गए, जिसके तुरंत बाद पुलिस कर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और RJD का सड़क पर चल रहा प्रदर्शन उस वक्त वहीं रुक गया।
आर-पार की जंग और लोकतंत्र बचाने की चेतावनी
पुलिस हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले तेजस्वी यादव ने भारतीय जनता पार्टी यानी BJP पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश कर रहे हैं, राज्य और देश की जनता उन्हें आने वाले समय में कड़ा सबक सिखाएगी। तेजस्वी यादव ने जोर देकर कहा कि सत्ताधारी दल चाहे विपक्ष की आवाज को दबाने का कितना भी प्रयास कर ले, लेकिन अब यह आर-पार की जंग किसी भी कीमत पर रुकने वाली नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताना हर नागरिक और राजनीतिक दल का अधिकार है, मगर प्रशासन के जरिए उस लोकतांत्रिक अधिकार को भी कुचला जा रहा है। RJD का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग की नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराते हुए राजभवन पहुंचकर विरोध जताना था।
सहयोगियों की दूरी पर बीजेपी का तंज
पटना की सड़क पर तेजस्वी यादव के अकेले प्रदर्शन और कांग्रेस व वाम दलों की गैरमौजूदगी पर सत्तापक्ष ने तुरंत सियासी हमला बोल दिया। बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक ने विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब खुद कांग्रेस के नेता ही अब तेजस्वी यादव पर भरोसा नहीं कर रहे हैं, तो फिर बिहार की आम जनता उन पर कैसे विश्वास जता सकती है। अजय आलोक ने कहा कि तेजस्वी यादव की तरफ से बाकायदा औपचारिक बुलावा भेजे जाने के बाद भी कांग्रेस का कोई नेता उनके प्रदर्शन में शामिल होने नहीं पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम से पूरी तरह साफ हो गया है कि तथाकथित विपक्षी गठबंधन बिखर चुका है और उनके दावों में अब कोई सियासी दम बाकी नहीं रह गया है।
राजभवन में ज्ञापन सौंपकर खत्म हुआ RJD का मार्च
हिरासत में लिए जाने के कुछ देर बाद पुलिस प्रशासन का रुख बदला और अधिकारियों की टीम तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले RJD के एक प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षा घेरे में लेकर सीधे राजभवन पहुंची। राजभवन के भीतर जाकर तेजस्वी यादव ने राज्यपाल से मुलाकात की और चुनाव आयोग से जुड़ी अपनी आपत्तियों को लेकर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद RJD ने अपने इस आक्रोश मार्च और प्रदर्शन को औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा कर दी। जिस प्रदर्शन की शुरुआत घेराव और सड़क जाम के इरादे से हुई थी, वह अंततः ज्ञापन सौंपने के साथ शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हो गया, लेकिन इसके फौरन बाद पटना के उस विरोध स्थल पर एक नया राजनीतिक मोड़ देखने को मिला।
तेजस्वी के लौटने के बाद कांग्रेस और वाम दलों की आमद
जैसे ही तेजस्वी यादव राजभवन से ज्ञापन सौंपकर बाहर निकले, उसके कुछ ही पलों बाद कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के नेता लगभग 100 से 200 कार्यकर्ताओं के साथ ठीक उसी जगह पर प्रदर्शन करने पहुंच गए जहां थोड़ी देर पहले RJD कार्यकर्ता जुटे थे। कांग्रेस और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, एक ही मुद्दे पर अलग-अलग समय पर प्रदर्शन करने से यह राजनीतिक सवाल तैरने लगा कि आखिर दोनों दलों के नेता तेजस्वी यादव के बुलावे पर सुबह उनके साथ कदम से कदम मिलाकर क्यों नहीं चले।
टाइमिंग के विवाद पर कांग्रेस का स्पष्टीकरण
इस पूरे विवाद और अकेले प्रदर्शन करने के मुद्दे पर जब कांग्रेस नेता शकील अहमद खान से सवाल पूछा गया कि वे तेजस्वी यादव के प्रदर्शन में क्यों नहीं पहुंचे और क्या कांग्रेस पार्टी RJD के रुख का समर्थन नहीं करती, तो उन्होंने इसके पीछे समय के तालमेल की वजह बताई। शकील अहमद खान ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी यादव की तरफ से प्रदर्शन शुरू करने का समय सुबह 11 बजे तय किया गया था, लेकिन तेजस्वी यादव ने तय वक्त से एक घंटा पहले यानी सुबह 10 बजे ही सड़क पर उतरकर मार्च शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सहयोगी दलों के कार्यकर्ता पहले से तय समय के मुताबिक ही मौके पर पहुंचे थे, इसलिए इसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं की कोई गलती नहीं है।
























