राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में सड़क पर उतरे विपक्षी सांसदों के मार्च को पुलिस प्रशासन ने बीच रास्ते में ही रोक दिया। सागर रत्ना से बसों में सवार होकर जंतर-मंतर की तरफ कूच कर रहे विपक्षी गठबंधन के इस दल में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई दिग्गज चेहरे मौजूद थे। पुलिस की भारी नाकेबंदी के कारण जैसे ही वाहनों का पहिया थमा, नेताओं और सुरक्षाबलों के बीच जबर्दस्त तनातनी शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों ने दोनों सदनों के कई सांसदों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर हिरासत में ले लिया।
वाहनों की छतों से गूंजे नारे, बैरिकेडिंग पर टकराव
रास्ते में काफिला रोके जाने के तुरंत बाद विरोध प्रदर्शन ने बेहद आक्रामक रूप ले लिया। कांग्रेस पार्टी के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद तत्काल खड़ी बसों की छतों पर जा पहुंचे। छतों से केंद्र सरकार और पुलिसिया रवैये के विरोध में लगातार नारेबाजी की गई। वहीं कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने घटनाक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सांसदों का पूरा जत्था सागर रत्ना से व्यवस्थित तरीके से निकला था, लेकिन उन्हें अपनी तय मंजिल जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। नेताओं का साफ कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आपत्ति दर्ज कराने जा रहे थे।
लाठीचार्ज का गंभीर आरोप, इस्तीफे की उठी मांग
हिरासत में लिए जाने के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने सुरक्षाकर्मियों पर बर्बर बल प्रयोग का सीधा आरोप मढ़ा। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्वक मार्च कर रहे जनप्रतिनिधियों पर लाठीचार्ज हुआ है, जो कई दशकों बाद देखने को मिला है। झा ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए मुख्य रूप से ज्ञानेश कुमार, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाबदेह ठहराया। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यह टकराव केवल किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा लोकतंत्र की मूल भावना पर हमला किया जा रहा है। इसी क्रम में सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि सांसदों की धरपकड़ से ज्ञानेश कुमार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते, और उन्होंने तत्काल उनके इस्तीफे की मांग उठाई। संतोष कुमार ने इस पूरे संघर्ष को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संग्राम करार दिया।
विपक्षी एकजुटता और छावनी बनी दिल्ली
सड़क पर मचे इस घमासान के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने साथी सांसदों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मोर्चा संभाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि समूचा विपक्ष पूरी तरह संगठित है और बिना किसी व्यक्तिगत अहंकार के यह संघर्ष अनवरत जारी रहेगा। दूसरी ओर कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि समूचे इलाके को पुलिस छावनी बना दिया गया है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि पुलिस बल को दिनभर विपक्षी जनप्रतिनिधियों की घेराबंदी में उलझाए रखा गया, जबकि सांसद केवल अपनी बात रखने जंतर-मंतर जाना चाहते थे और आयोग से मुलाकात का समय मांग रहे थे। रंजन ने आरोप लगाया कि सरकार जरूरी सवालों के समाधान से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है।
हिरासत के दौरान राहुल, प्रियंका और अन्य नेताओं के तेवर
प्रदर्शन स्थल की घेराबंदी टूटने के आसार न दिखने पर पुलिस ने अंततः राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को अलग-अलग बसों में बैठाया। हिरासत में लिए जाते समय प्रियंका गांधी वाड्रा ने पुलिस के तौर-तरीकों पर भारी रोष जताते हुए सवाल किया कि क्या इस तरह का बर्ताव जायज है। विपक्षी सांसदों ने यह गंभीर शिकायत भी दर्ज कराई कि उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पूरे हालात पर दुख जताते हुए कहा कि वे केवल चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर बढ़ना चाहते थे, मगर सरकारी तंत्र के अड़ंगे के चलते मुल्क में लोकतांत्रिक अधिकार पूरी तरह खत्म हो चुके हैं।




















