देश की राजधानी में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार तथा विपक्षी दलों के बीच टकराव गहरा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित दोपहर के भोजन के उपरांत विपक्षी दलों के सांसद तीन विशेष वाहनों में सवार होकर महात्मा गांधी के समाधि स्थल की तरफ रवाना हुए। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी अन्य सांसदों के साथ वाहन में सवार रहे। हालांकि समाधि स्थल के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई थी और वहां पहुंचे नेताओं को करीब आधा घंटा अपने वाहनों में ही इंतजार करना पड़ा, क्योंकि प्रशासन ने साफ किया कि केवल शीर्ष नेताओं को ही भीतर जाने की अनुमति दी जाएगी जबकि कार्यकर्ताओं और अन्य सदस्यों को बाहर ही रुकना होगा।
शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा और सरकार के लिए सद्बुद्धि की कामना
विपक्षी गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व ने इस यात्रा के मूल उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि उनका इरादा किसी तरह का हंगामा खड़ा करने का नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता के स्मारक पर जाकर शांति से प्रार्थना करने का है। मल्लिकार्जुन खरगे ने इस दौरान कहा कि वे गांधी स्मारक पर जाकर ईश्वर से प्रार्थना करेंगे कि सत्तापक्ष के शीर्ष नेताओं को सद्बुद्धि मिले। खरगे के मुताबिक, देश के आम नागरिक बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जैसी विकट समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनका समाधान तलाशना केंद्र सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई किसी एक सियासी संगठन के नफे-नुकसान से नहीं जुड़ी है, बल्कि इसका सीधा ताल्लुक आम जनता के मताधिकार और बुनियादी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से है। उन्होंने सवाल उठाया कि महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के लंबे संघर्ष के बाद देशवासियों को जो संवैधानिक अधिकार मिले थे, उन्हें कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि यदि देश में मत देने का अधिकार ही खतरे में पड़ जाएगा, तो लोकतांत्रिक ढांचे की बुनियाद हिल जाएगी।
करीब 300 सांसदों की आवाज दबाने का आरोप
वाहन में मौजूद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने कहा कि संसद के दोनों सदनों से जुड़े करीब 300 सांसद शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि विपक्ष ने पहले जंतर-मंतर पर एकत्र होकर प्रदर्शन की योजना बनाई थी, किंतु सुरक्षा बलों ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्षी आंदोलन पूरी तरह अहिंसक है और इसका एकमात्र मकसद चुनाव प्रणाली को लेकर जनता के मन में उठ रहे संशयों को सामने रखना है। उन्होंने यह भी चेताया कि सत्ता के दबाव में अनुचित कदम उठाने वाले अधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके खिलाफ कानून के तहत जवाबदेही तय की जा सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि कानूनी प्रक्रिया में भले ही वक्त लग सकता है, मगर न्याय की दिशा में कार्रवाई अवश्य होगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा गया
सड़क पर प्रदर्शन के साथ-साथ विपक्षी दल संवैधानिक प्रमुख के समक्ष भी अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं। कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने जानकारी दी कि गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए औपचारिक वक्त मांगा गया है। इस संबंध में पहला पत्र 2 अक्टूबर को प्रेषित किया गया था, जिसके प्रत्युत्तर में राष्ट्रपति भवन ने उन नेताओं की सूची उपलब्ध कराने को कहा था जो प्रतिनिधिमंडल में सम्मिलित होना चाहते हैं। इसके बाद कांग्रेस ने 5 अक्टूबर को सभी प्रमुख नेताओं की सूची भेजते हुए 7, 8 या 9 अक्टूबर में से किसी एक दिन भेंट तय करने की गुजारिश की।
केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दल राष्ट्रपति के समक्ष वोटर लिस्ट से जुड़ी गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर गहराते संकट का ब्योरा साझा करना चाहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि गठबंधन संविधान की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करेगा। इस बीच प्रशासनिक गलियारों में प्रतिनिधिमंडल की संभावित मुलाकात को लेकर बातचीत के आगे बढ़ने की सूचनाएं भी मिली हैं।
लगातार तीन दिनों से जारी है सड़कों पर रस्साकशी
यह पूरा गतिरोध बुधवार अथवा मंगलवार को अचानक शुरू नहीं हुआ, बल्कि पिछले कई दिनों से क्रमवार तरीके से बढ़ता जा रहा है। इससे पहले बुधवार को भी इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने जंतर-मंतर की दिशा में कूच करने का प्रयास किया था, लेकिन नई दिल्ली जिले की सीमाओं पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई प्रमुख नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, जो कि दो दिनों के भीतर राहुल गांधी की दूसरी ऐसी हिरासत थी।
वहीं मंगलवार के घटनाक्रम में सांसदों ने सीधे निर्वाचन सदन यानी चुनाव आयोग के दफ्तर की तरफ मार्च निकाला था। पुलिस ने उस मार्च को भी बैरिकेड लगाकर रोक दिया था, जिसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेता पास में स्थित आकाशवाणी भवन के बाहर ही सड़क पर बैठ गए थे और यह धरना कई घंटों तक जारी रहा था। विपक्ष का तर्क है कि जब जंतर-मंतर पूरे देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित आधिकारिक स्थान है, तो फिर जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को वहां जाने से रोकना नागरिक अधिकारों का हनन है। इसके विपरीत पुलिस का कहना है कि नई दिल्ली क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू होने के कारण बिना पूर्व अनुमति किसी भी प्रकार की सभा या पदयात्रा की इजाजत नहीं दी जा सकती।
एसआईआर और वोटर लिस्ट पर क्यों भड़का है विपक्ष?
इस पूरे राजनीतिक संग्राम के केंद्र में मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) है। चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी खेमे की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि बड़े पैमाने पर वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। विपक्ष का मानना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है, जिससे कमजोर वर्गों और आम नागरिकों के वोटिंग अधिकार छिनने की आशंका उत्पन्न हो गई है। इसी वजह से इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और पूरी निर्वाचन मशीनरी के खिलाफ लामबंद होकर सड़कों पर उतरा है।
























