पहाड़ी सफर में भटक गए और फोन में नेटवर्क भी नहीं? अपनाएं ये 5 जरूरी सुरक्षा कदमदिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर नया एक्शन प्लान: बिना वैध पीयूसी नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, 10,000 रुपये का चालानबिना किसी शुल्क के टेलीविजन पर देखें लखनऊ टी20 मुकाबला, जानिए लाइव प्रसारण की पूरी जानकारीकड़ाके की ठंड में घर के पेड़-पौधों को मुरझाने से कैसे बचाएं, जानिए जरूरी बागवानी उपायहिमाचल दौरे पर मनाली पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, सर्किट हाउस में रात्रि ठहराव और अटल टनल का बदला ट्रैफिक प्लानराजस्थान के हवाई नेटवर्क में विस्तार, अकासा एयर 11 अक्टूबर से जयपुर को जोड़ेगी मुंबई और बेंगलुरु सेबेसन की रोजमर्रा की सब्जी से ऊब गए हैं तो थाली में परोसें भरवां गट्टा पाटौड़ी रोल्सकाले चने से मिनटों में तैयार करें चटपटा और गाढ़ा सूप, डिनर के लिए बेहतरीन और पौष्टिक विकल्पमेकअप के बाद होंठों में खिंचाव और रूखापन क्यों बढ़ता है, जानिए फटने के 5 मुख्य कारणघर पर तैयार करें प्राकृतिक मिठास, बालकनी में स्टीविया उगाने का पूरा तरीका
प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक स्वपन बोस का देहांत, बीमारी के चलते 6 अक्टूबर को ली अंतिम सांसबिहार
6 अक्तू॰ 2026, 3:03 pm (3 घंटे पहले)· 0

प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक स्वपन बोस का देहांत, बीमारी के चलते 6 अक्टूबर को ली अंतिम सांस

प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक स्वपन बोस का लंबी बीमारी के बाद 6 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। उन्होंने एजेंसी में 33 वर्षों तक अपनी निष्ठावान सेवाएं दी थीं।

भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय में वरिष्ठ पद पर कार्यरत संयुक्त निदेशक स्वपन बोस का 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को देहांत हो गया। वह काफी समय से एक गंभीर बीमारी से लड़ रहे थे। आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली इस केंद्रीय वित्तीय खुफिया और कानून प्रवर्तन संस्था ने उनके जाने पर गहरा शोक व्यक्त किया है। एजेंसी की ओर से जारी किए गए आधिकारिक वक्तव्य में उन्हें एक बेहद कर्तव्यनिष्ठ, काबिल और निष्ठावान अधिकारी बताया गया, जिनके जाने से पूरे महकमे में शोक छा गया है।

लंबे समय से चल रहे थे बीमार

स्वपन बोस पिछले काफी वक्त से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज जारी था। मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके देहावसान की खबर मिलते ही विभाग में दुख का माहौल बन गया। केंद्रीय एजेंसी ने इसे अपने पूरे प्रशासनिक ढांचे और समग्र जनसेवा क्षेत्र के लिए एक ऐसी क्षति बताया है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि विभाग ने एक ऐसा नेतृत्वकर्ता खो दिया है जिसने अपने पूरे सेवाकाल में अत्यंत उच्च कोटि के मानक स्थापित किए थे।

ये भी पढ़ें

तीन दशकों से अधिक का लंबा सफर

प्रवर्तन निदेशालय के भीतर स्वपन बोस का सफर तीन दशक से भी अधिक समय तक चला। उन्होंने एजेंसी में लगातार 33 साल तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहकर देश की सेवा की। इस तीन दशक लंबे कार्यकाल में उन्होंने एजेंसी के कई संवेदनशील और अहम अभियानों की बागडोर संभाली। विभाग ने स्मरण किया कि अपनी संपूर्ण सेवा अवधि में उन्होंने हर जिम्मेदारी को असाधारण पेशेवर दक्षता, निष्पक्षता और संस्था के प्रति अटूट निष्ठा के साथ पूरा किया। जटिल जांच प्रक्रियाओं और वित्तीय निगरानी में उनके योगदान को संगठन हमेशा आदर के साथ याद रखेगा।

मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय दफ्तरों तक शोक

उनके असामयिक निधन पर एजेंसी के केंद्रीय मुख्यालय के साथ-साथ देश भर में फैले जोनल और सब-जोनल कार्यालयों में शोक सभाओं का आयोजन किया गया। इन सभी केंद्रों पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी सहकर्मियों ने उनके साथ काम करने के अनुभवों को साझा करते हुए उनके समर्पण और कार्यशैली की सराहना की।

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना

प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक सहित सभी प्रशासनिक कर्मियों ने दिवंगत अधिकारी के परिवारजनों, संबंधियों और मित्रों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि संकट की इस घड़ी में समूचा विभाग पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है और उन्हें हर संभव संबल तथा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही समस्त अधिकारियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

सवाल-जवाब

स्वपन बोस कौन थे?
स्वपन बोस भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय में संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत एक वरिष्ठ अधिकारी थे।
उनका निधन कब और किस कारण से हुआ?
उनका निधन 6 अक्टूबर 2026 को मंगलवार के दिन लंबी बीमारी के चलते हुआ।
प्रवर्तन निदेशालय में उनका कार्यकाल कितने वर्षों का रहा?
स्वपन बोस ने प्रवर्तन निदेशालय में कुल 33 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
उनके निधन पर विभाग की क्या प्रतिक्रिया रही?
विभाग ने गहरा दुख जताते हुए इसे संगठन और जनसेवा के लिए अपूरणीय क्षति बताया और परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

अरे यार, ईडी जैसे बड़े महkमे में इतने लंबे समय तक काम करने वाले अफसर का यूं जाना वाकई दुखद है। भगवान उनके परिवार को हिम्मत दे। वैसे इतने संवेदनशील केस संभालने वाले अधिकारी के पिछले कुछ सालों में कौन से बड़े मामले सबसे अहम रहे होंगे?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, 33 साल तक लगातार ईडी में टिके रहना सचमुच बहुत बड़ी बात है। आज के समय में इतनी लंबी बेदाग सर्विस मिलना आसान नहीं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp