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रक्षा निर्माण में भारत की बड़ी छलांग, उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक रिकॉर्ड पर, निर्यात भी नई ऊंचाई परबिहार
17 जून 2026, 11:12 am (47 दिन पहले)· 4

रक्षा निर्माण में भारत की बड़ी छलांग, उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक रिकॉर्ड पर, निर्यात भी नई ऊंचाई पर

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 15.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के नए शिखर पर जा पहुंचा है।

स्वदेशी हथियार और सैन्य साजोसामान बनाने के मामले में भारत ने एक नया कीर्तिमान गढ़ दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बीते वित्त वर्ष के मुकाबले इसमें 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह उपलब्धि उस दौर में आई है जब भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है और विदेशी हथियारों पर अपनी निर्भरता घटाने में जुटा है।

दस साल में चार गुना हुआ उत्पादन

यह रिकॉर्ड महज एक साल की कहानी नहीं है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में रक्षा उत्पादन 110 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुका है। अगर एक दशक पीछे झांकें तो यह वृद्धि और भी ध्यान खींचती है, क्योंकि 2013-14 के स्तर के मुकाबले आज का उत्पादन लगभग चार गुना हो चुका है। जानकार कहते हैं कि इन आंकड़ों के पीछे केवल संख्याएं नहीं, बल्कि देश की रक्षा निर्माण क्षमता, तकनीकी प्रगति और लगातार चौड़े होते औद्योगिक आधार की कहानी छिपी है।

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सरकारी उपक्रमों का बोलबाला

उत्पादन के इस ढांचे में आज भी सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की पकड़ सबसे मजबूत है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा उत्पादन का करीब 76 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं संस्थानों से आया। Hindustan Aeronautics Limited (HAL), Bharat Electronics Limited (BEL), Mazagon Dock, Garden Reach Shipbuilders समेत कई रक्षा उपक्रमों ने इस कामयाबी में बड़ी भूमिका निभाई। सरकार का कहना है कि इन इकाइयों ने स्वदेशी रक्षा प्रणालियों, युद्धपोतों, मिसाइलों, रडार और तमाम सैन्य उपकरणों के निर्माण में निरंतर तरक्की दर्ज की है।

निजी कंपनियों की हिस्सेदारी पहली बार ₹42,000 करोड़ पर

दूसरी तरफ निजी कंपनियां भी अब इस मैदान में तेजी से अपनी जगह बना रही हैं। इस वित्त वर्ष में निजी क्षेत्र का योगदान बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया। सबसे अहम बात यह रही कि निजी कंपनियों का कुल रक्षा उत्पादन पहली बार करीब ₹42,000 करोड़ के स्तर को छू गया। बीते कुछ बरसों में सरकार ने इस क्षेत्र में निजी पूंजी को खींचने के लिए कई नीतिगत बदलाव किए हैं। रक्षा गलियारे खड़े करना, लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को सरल बनाना और घरेलू खरीद को तरजीह देना, ये सब इसी सोच का नतीजा हैं। विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले सालों में निजी क्षेत्र की भूमिका और भी दमदार होगी।

निर्यात भी रिकॉर्ड शिखर पर

घर में बढ़ते उत्पादन की झलक अब विदेशी बाजार में भी साफ दिख रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा, जो देश के निर्यात इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है। अब भारत सिर्फ अपनी जरूरतों भर के लिए हथियार नहीं बना रहा, बल्कि कई देशों को रक्षा सामग्री भेज भी रहा है। मिसाइल प्रणाली, रडार, निगरानी उपकरण, नौसैनिक प्लेटफॉर्म और दूसरे उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार ऊपर जा रही है।

आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद

सरकार इस पूरी कामयाबी की जड़ आत्मनिर्भर भारत अभियान में देखती है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी खरीद को आगे बढ़ाने के लिए कई सकारात्मक सूचियां जारी कीं। इन सूचियों में दर्ज सैन्य उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी गई, ताकि उन्हें देश के भीतर ही विकसित और तैयार किया जा सके। इस नीति का सीधा लाभ भारतीय उद्योगों को मिला और घरेलू उत्पादन क्षमता तेजी से फैली।

राजनाथ सिंह ने जताई खुशी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि उत्पादन और निर्यात में यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, आत्मनिर्भर भारत अभियान और सरकारी तथा निजी उद्योगों की साझा मेहनत का फल है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत आने वाले वर्षों में रक्षा निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में और नई ऊंचाइयां छुएगा।

सवाल-जवाब

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन कितना रहा?
इस दौरान देश का कुल रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
रक्षा उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी दर्ज की गई?
बीते वित्त वर्ष के मुकाबले इसमें 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि 2020-21 की तुलना में यह 110 प्रतिशत से अधिक और 2013-14 के मुकाबले लगभग चार गुना बढ़ चुका है।
निजी कंपनियों और सरकारी उपक्रमों की हिस्सेदारी कितनी रही?
कुल उत्पादन का करीब 76 प्रतिशत सरकारी कंपनियों और PSU से आया, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत यानी पहली बार करीब ₹42,000 करोड़ रही।
इस साल रक्षा निर्यात का आंकड़ा क्या रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो देश के निर्यात इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
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