अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी में वांछित नवप्रीत सिंह को तुर्की से डिपोर्ट करके शनिवार को भारत वापस लाया गया है। अवैध नशीले पदार्थों के सिंडिकेट के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई को एक उल्लेखनीय सफलता माना जा रहा है। भारतीय जांच एजेंसियों ने विदेशी जमीन पर छिपे इस तस्कर को ट्रेस कर स्वदेश लाने में कामयाबी हासिल की, जिसके बाद उसे विभिन्न आपराधिक मामलों और नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोपों में सीधे सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
फर्जी पहचान बनाकर हासिल की थी विदेशी नागरिकता
जांच के दौरान सामने आया कि नवप्रीत सिंह नवाब विर्क के नाम से एक जाली पहचान पत्र तैयार करके तुर्की में रह रहा था। उसने इसी फर्जी पहचान के दम पर वहां की नागरिकता भी हासिल कर ली थी। विदेशी पासपोर्ट और नई पहचान हासिल करने के बाद भी वह अपने पुराने गैरकानूनी धंधे में लगातार सक्रिय रहा। वह अफगानिस्तान से भारत के भीतर हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसे घातक नशीले पदार्थों की तस्करी का जाल संचालित कर रहा था। भारतीय एजेंसियों ने सतर्कता बरतते हुए उसकी असलियत का पर्दाफाश किया और तुर्की प्रशासन से संपर्क साधकर उसके डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी कराई।
केंद्रीय गृह मंत्री ने दी एजेंसियों को बधाई
इस बड़े एक्शन की जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सरकार ने तुर्की से कुख्यात तस्कर को डिपोर्ट करवाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा,
"मोदी सरकार दिसंबर, 2029 से पहले हर ड्रग-कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।"गृह मंत्री ने अभियान को अंजाम देने वाली सभी जांच एजेंसियों की सराहना की। इससे पहले नक्सलवाद की समाप्ति के लिए समयसीमा तय करने वाले गृह मंत्री ने अब पंजाब सहित पूरे देश को नशा मुक्त करने की दिशा में सख्त रुख अपनाया है और सुरक्षा तंत्र को ड्रग नेटवर्क ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं।
पंजाब की राजनीति में नशा कारोबार का केंद्रबिंदु
पंजाब की सियासत में नशीले पदार्थों की रोकथाम हमेशा से एक संवेदनशील और प्रमुख मुद्दा बनी रही है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जब आम आदमी पार्टी ने राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की शुरुआत की थी, तब पार्टी का केंद्रीय प्रचार इसी नशे की समस्या को समाप्त करने के वादे पर टिका था। बाद में वर्ष 2022 में पूर्ण बहुमत के साथ आम आदमी पार्टी की सरकार भी बनी, किंतु जमीनी हकीकत में मादक पदार्थों का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया। अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि सत्ताधारी दल की नशा विरोधी मुहिम अपने चुनावी दावों के मुकाबले किस हद तक असरदार साबित हुई है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तेज हुई जुबानी जंग
वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मादक पदार्थों की समस्या पर फिर से बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी इसे राज्य की सबसे गंभीर जमीनी समस्या मान रही है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक यह भी रेखांकित करते हैं कि पूर्व में बीजेपी राज्य में शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन सरकार का हिस्सा रह चुकी है, ऐसे में इस बार वह किस नई रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी, इस पर सबकी निगाहें हैं। इससे पहले जालंधर में आयोजित एक जनसभा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की थी कि वे नशा मुक्त पंजाब का संकल्प लेते हैं और जो बात कहते हैं, उसे जमीन पर उतारकर दिखाते हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगा रहे हैं, जबकि आम जनता के बीच यह सवाल बना हुआ है कि इस अवैध कारोबार पर मुकम्मल लगाम कब और कौन लगाएगा।





















