भारतीय सिनेमा के इतिहास में 13 जून 1997 की तारीख एक खास मुकाम रखती है, जब सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म उतरी जिसने न केवल दर्शकों के दिलों में देशभक्ति का ज्वार पैदा किया, बल्कि कमाई के तमाम पुराने आंकड़ों को भी ध्वस्त कर दिया। उस दौर में जब हिंदी फिल्म उद्योग पर स्थापित बड़े अभिनेताओं का एकछत्र प्रभाव माना जाता था, तब एक बहु-तारकीय युद्ध नाटक फिल्म ने बड़े पर्दे पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी इस रचना ने युद्ध के मैदान की कठिनाइयों और सैनिकों के अटूट हौसले को इतनी जीवंतता से पेश किया कि हफ्तों तक सिनेमाघरों के बाहर दर्शकों की कतारें खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं।
लोंगेवाला की ऐतिहासिक लड़ाई और जेपी दत्ता का साहसिक निर्देशन
इस महान सिनेमाई यात्रा की नींव निर्देशक जेपी दत्ता ने रखी थी, जिन्होंने 1971 में लड़े गए लोंगेवाला युद्ध की शौर्यगाथा को पर्दे पर उतारने का जोखिम उठाया। फिल्म में भारतीय सेना के जवानों द्वारा दुश्मन के भारी टैंकों और सैन्य बल के सामने दिखाए गए अद्वितीय पराक्रम, त्याग और राष्ट्रीय निष्ठा को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया गया। इस ऐतिहासिक कहानी को बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए कलाकारों की एक विशाल टोली को एकजुट किया गया था। फिल्म के प्रमुख किरदारों में सनी देओल, जैकी श्रॉफ, सुनील शेट्टी और अक्षय खन्ना की मुख्य भूमिकाएं थीं, जिन्हें पुनीत ईस्सर और कुलभूषण खरबंदा जैसे दिग्गज अभिनेताओं का मजबूत साथ मिला। इसके साथ ही तब्बू, पूजा भट्ट और शर्वनी मुखर्जी की मौजूदगी ने कहानी के पारिवारिक और भावनात्मक पहलुओं को गहराई प्रदान की।
10 करोड़ के बजट से 65 करोड़ की कमाई: खान तिकड़ी की फिल्मों को दी मात
वर्ष 1997 में बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी व्यावसायिक फिल्मों की धूम थी। उसी साल शाहरुख खान की बहुचर्चित फिल्म यस बॉस, सलमान खान की कॉमेडी ड्रामा जुड़वा और आमिर खान की रोमांटिक फिल्म इश्क़ प्रदर्शित हुई थीं। ये सभी फिल्में अपने सितारों की वजह से दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय थीं, लेकिन कमाई की रेस में यह देशभक्ति फिल्म सबसे आगे निकल गई। मात्र 10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित इस फिल्म ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर 65 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार किया, जो कि इसकी कुल लागत का छह गुना था। चार प्रमुख अभिनेताओं वाली इस बहु-तारकीय फिल्म ने उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनने का गौरव हासिल किया और शीर्ष अभिनेताओं की बड़ी फिल्मों को भी पछाड़ दिया।
अनु मलिक का संगीत और सदाबहार देशभक्ति गीत
इस युद्ध ड्रामा की विशाल सफलता में इसके संगीत और गीतों की केंद्रीय भूमिका रही। संगीतकार अनु मलिक द्वारा तैयार किया गया संगीत हर भारतीय के दिल को छू गया। फिल्म का प्रमुख गीत संदेसे आते हैं भारतीय सिनेमा का एक अमर देशभक्ति गीत बन गया, जो सीमा पर तैनात जवानों की घर वापसी की तड़प और अपनों की यादों को बड़ी ही मार्मिकता से प्रस्तुत करता है। इसके अलावा तो चलूं, हमें जब से मोहब्बत और मेरे दुश्मन मेरे भाई जैसे गीतों ने फिल्म के दृश्यों को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। ये गीत आज भी राष्ट्रीय पर्वों और देशभक्ति के अवसरों पर पूरी लगन से सुने जाते हैं।
अक्षय खन्ना के करियर के लिए संजीवनी साबित हुई सफलता
फिल्म की अपार सफलता ने इसमें शामिल सभी कलाकारों के करियर को नई ऊंचाइयां दीं, लेकिन युवा अभिनेता अक्षय खन्ना के लिए यह एक बहुत बड़ा मोड़ साबित हुई। दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना ने 1997 में ही फिल्म हिमालय पुत्र के जरिए अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी, मगर उस फिल्म से उन्हें वह पहचान नहीं मिल सकी थी। इस विशाल युद्ध फिल्म में उनके द्वारा निभाए गए सैनिक के भावुक और निडर किरदार को समीक्षकों और दर्शकों दोनों ने खूब सराहा। इस फिल्म की ऐतिहासिक सफलता ने नौसिखिया अक्षय खन्ना के अभिनय करियर को नई संजीवनी प्रदान की और उन्हें उद्योग में एक प्रतिभावान अभिनेता के रूप में स्थापित कर दिया।



















