फिल्म उद्योग में काम करने वाले प्रमुख कलाकारों का निजी जीवन और उनकी कार्यशैली अक्सर लोगों को चकित करती रहती है। फिल्मों की शूटिंग के दौरान बड़े कलाकारों के साथ आने वाला भारी-भरकम अमला और उनकी विशेष मांगें अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं। इसी सिलसिले में लोकप्रिय टेलीविजन शो सीआईडी में दया की भूमिका निभाने वाले जाने-माने अभिनेता दयानंद शेट्टी ने फिल्म सेटों के इस चलन को लेकर कुछ दिलचस्प अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने उजागर किया कि कई कलाकार अपने पालतू कुत्तों को सेट पर लेकर आते हैं और इन जानवरों की देखभाल के लिए एक समर्पित डॉग नैनी भी साथ मौजूद रहती है।
शूटिंग स्थल पर पालतू कुत्तों का ठाठ-बाट
सिद्धार्थ कन्नन के यूट्यूब चैनल पर हुई एक विस्तृत बातचीत में जब दयानंद शेट्टी से फिल्मी हस्तियों के विशाल दल और कार्यस्थल पर उनके तौर-तरीकों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे परवरिश और विशेष मानसिकता से जुड़ा मामला बताया। उनके अनुसार कुछ कलाकारों को लगता है कि एक बड़ा स्टार होने का अर्थ ही एक खास किस्म की भव्य जीवनशैली का सार्वजनिक प्रदर्शन करना है। उन्होंने बताया कि कई अभिनेता और अभिनेत्रियां अपने पालतू कुत्तों को शूटिंग स्थल तक साथ लाते हैं। जब काम के बीच में उन्हें थोड़ा आराम चाहिए होता है या उनका मन करता है, तो वे अपने कुत्ते को बुलाकर उसके साथ वक्त बिताते हैं। दयानंद शेट्टी ने यह पूरी बात बेहद सहज और हास्य भरे अंदाज में कही, लेकिन इसने चकाचौंध से भरी इस दुनिया की एक अलग सच्चाई को सामने ला दिया।
नैनी का काम, कपड़े, सनग्लास और पेट्स की तैयारी
दयानंद शेट्टी ने इस बात का विस्तार से ब्योरा दिया कि सेट पर लाए जाने वाले इन पालतू कुत्तों की सेवा में बाकायदा एक व्यक्ति तैनात रहता है। उस व्यक्ति की जिम्मेदारी कुत्ते को समय पर टहलाने, उसका खाना खिलाने और अन्य सभी जरूरतों को पूरा करने की होती है। इतना ही नहीं, इन जानवरों की दिखावट पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि कुछ पालतू कुत्तों को आकर्षक कपड़े पहनाए जाते हैं, उन्हें सनग्लासेस लगाए जाते हैं और यहां तक कि उनका हल्का मेकअप या खास ग्रूमिंग भी कराई जाती है। यानी जिस तरह बड़े कलाकार अपने पहनावे और स्टाइल का ख्याल रखते हैं, वैसा ही प्रबंध इन बेजुबानों के लिए भी किया जाता है। जब उनसे पूछा गया कि वे इस पूरी व्यवस्था को किस नजरिए से देखते हैं, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि ऐसा डॉग तो वास्तव में बहुत किस्मत वाला है। उनका कहना था कि अगर कोई इन बातों पर बहुत गहराई से सोचेगा तो परेशान हो सकता है, लेकिन हल्के मन से देखा जाए तो इसमें उलझने की जरूरत नहीं है।
वैनिटी वैन की लंबी मांग और निर्माताओं की मुश्किलें
फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की अतिरिक्त सुविधाओं और वैनिटी वैन की मांग पर पहले भी कई प्रमुख निर्देशक अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। कांटे, जिंदा और शूटआउट एट वडाला जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन करने वाले जाने-माने निर्देशक संजय गुप्ता ने एक बातचीत में बताया था कि कुछ कलाकार शूटिंग के दौरान छह-छह वैनिटी वैन तक की मांग रख देते हैं। उन्होंने यह भी इशारा किया था कि अत्यधिक और अनुचित मांगों के चलते एक अभिनेता को दक्षिण भारत के एक बड़े प्रोजेक्ट से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया था। इस खुलासे के बाद फिल्म जगत में सितारों के अनावश्यक खर्चों को लेकर काफी बहस छिड़ गई थी।
निजी शेफ के भारी भरकम खर्च और करण जौहर की आपत्ति
सितारों की लग्जरी मांगों पर निर्देशक अनुराग कश्यप भी पहले अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था कि कई कलाकार अपने साथ निजी शेफ लेकर चलते हैं, जिसकी प्रतिदिन की फीस करीब 2 लाख रुपये तक हो सकती है। अनुराग कश्यप के अनुसार ये शेफ बेहद विशिष्ट और संतुलित आहार तैयार करते हैं, जिसे देखकर उन्हें वह सामान्य भोजन के बजाय पक्षियों के दाने जैसा प्रतीत होता था। दूसरी ओर, फिल्म निर्माता करण जौहर ने भी इस बढ़ते चलन पर अपनी हैरानी दर्ज कराई थी। करण जौहर का मानना था कि जब कलाकारों को पहले से ही एक बड़ी फीस का भुगतान किया जाता है, तो फिर व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का बिल निर्माताओं पर डालना बेहद अजीब है। उन्होंने सवाल उठाया था कि कलाकारों को अपने इर्द-गिर्द छह से आठ लोगों की अनावश्यक फौज लेकर घूमने की क्या आवश्यकता है।


















