भारत NCAP सेफ्टी असेसमेंट में टाटा की इस इलेक्ट्रिक कार का जलवा, पंच ईवी को मिली 5 स्टार रेटिंगअमेरिकी आव्रजन एजेंसी आईसीई के नए अनुबंधों में डिटेंशन सेंटरों पर राज्य कानून लागू न होने का दावाडायबिटीज कंट्रोल और तेजी से वजन घटाने में असरदार है क्विनोआ-वेजिटेबल खिचड़ी, देखें पूरी रेसिपीयूट्यूब एक्सपर्ट के आसान टिप्स: प्रूनिंग और खास खाद से गुड़हल में आएंगे ढेरों फूलग्लास्गो में भारतीय मुक्केबाजों का शानदार रिकॉर्ड, साक्षी और नरेंदर समेत 5 और खिलाड़ी सेमीफाइनल में पहुंचेमकर राशिफल 30 जुलाई 2026: कई स्रोतों से होगा धन लाभ, परिवार और करियर में बढ़ेगा सहयोगकाठमांडू को क्यों कहते हैं मोमो का गढ़ और हर दिन इसे खाने के क्या हैं सेहत संबंधी खतरेघातक गोलीबारी और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन पर विवाद के बावजूद आई.सी.ई. की सख्त कार्रवाई पर अडिग है डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य आधारन्यू मेक्सिको में ठंडे पड़े जिओथर्मल वेल को एआई और एडवांस ड्रिलिंग से मिला नया जीवनरात में बाइक चलाते वक्त कम दिख रही सड़क? रोशनी दोगुनी करने के लिए आजमाएं ये 5 असरदार तरीके
जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर देखते ही भावुक हुए दिलजीत दोसांझ, किरदार के लिए मांगा सिर्फ 1 रुपयाबॉलीवुड
16 जुल॰ 2026, 9:29 am (14 दिन पहले)· 2

जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर देखते ही भावुक हुए दिलजीत दोसांझ, किरदार के लिए मांगा सिर्फ 1 रुपया

फिल्म 'सतलुज' के निर्देशक हनी त्रेहान ने खुलासा किया कि जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका के लिए दिलजीत दोसांझ ने स्क्रिप्ट देखते ही भावुक होकर सिर्फ 1 रुपये फीस लेने की बात कही थी।

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' चर्चाओं से बाहर निकलने का नाम ही नहीं ले रही। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के साथ महीनों चली खींचतान के बाद जब यह फिल्म आखिरकार दर्शकों तक पहुंची, तो रिलीज के महज 48 घंटों के भीतर ही इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से हटा दिया गया। इसी बीच फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने एक ऐसी बात बताई है जिसने दिलजीत दोसांझ के फैंस का दिल जीत लिया है, उन्होंने खुलासा किया कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए दिलजीत ने आखिर कितनी फीस ली थी।

पहले दो दिन में जिसने भी यह फिल्म देखी, वो भावुक हुए बिना नहीं रह सका। दिलजीत दोसांझ की एक्टिंग को लेकर हर तरफ तारीफों का सिलसिला चल पड़ा। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की हो रही है जब दिलजीत ने इस किरदार के लिए फीस लेने से ही इनकार कर दिया था।

ये भी पढ़ें

क्यों दिलजीत को ही मिला यह किरदार

'सतलुज' के लिए मेकर्स को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। सर्टिफिकेशन को लेकर विवाद हो या फिर फिल्म का ओटीटी से अचानक हट जाना, इन सारी मुश्किलों के बीच दिलजीत दोसांझ का इस प्रोजेक्ट के प्रति समर्पण हर किसी का ध्यान खींच रहा है। निर्देशक हनी त्रेहान के मुताबिक, वह शुरू से ही चाहते थे कि जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार कोई सिख एक्टर ही निभाए, ताकि कहानी की भावना और उसकी सांस्कृतिक सच्चाई पर कोई आंच न आए। उनका मानना था कि अगर किसी बड़े बॉलीवुड स्टार को लिया जाता तो चर्चा किरदार से हटकर एक्टर पर केंद्रित हो जाती, जिससे खालड़ा की विरासत के साथ इंसाफ नहीं हो पाता।

कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा

फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी है। जसवंत सिंह खालड़ा 1990 के दशक में उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने पंजाब में कथित तौर पर 1984 से 1994 के बीच हुए 25,000 अज्ञात अंतिम संस्कारों की जांच शुरू की थी। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया और पुलिस हिरासत में ही उनकी हत्या कर दी गई थी।

स्क्रिप्ट सुनते ही भर आईं आंखें

हनी त्रेहान ने बताया कि साल 2021 में उन्होंने दिलजीत से करीब 30 मिनट तक मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने अपनी रिसर्च और स्क्रिप्ट दिलजीत को दिखाई थी। जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर देखते ही दिलजीत भावुक हो गए। हनी त्रेहान के मुताबिक, दिलजीत ने स्क्रिप्ट को अपने माथे से लगाया, 'वाहेगुरु' कहा और बोले, 'खालड़ा साहब जैसा किरदार निभाने के पैसे कैसे ले सकता हूं? ऐसा करना शर्मनाक होगा।' हालांकि जब हनी त्रेहान ने कॉन्ट्रैक्ट की औपचारिकता का हवाला दिया, तो दिलजीत ने सिर्फ 1 रुपया लेने की बात कही।

देरी के बावजूद कभी नहीं की शिकायत

हनी त्रेहान ने एक अन्य बातचीत में दिलजीत की प्रोफेशनलिज्म की भी जमकर तारीफ की थी। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार शेड्यूल बिगड़ जाता था। दिलजीत सुबह 6 बजे ही सेट पर पहुंच जाते थे, लेकिन उनका पहला शॉट शाम 4 बजे तक भी नहीं लग पाता था। इतनी लंबी देरी के बावजूद उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। निर्देशक के मुताबिक, हर बार दिलजीत मुस्कुराकर कहते थे, 'पाजी, कोई बात नहीं। आप जो कर रहे हैं, फिल्म के लिए कर रहे हैं। मैं फिल्म को सपोर्ट करने आया हूं।'

पहले नाम था 'पंजाब 95', फिर हुआ बदलाव

बता दें कि फिल्म 'सतलुज' का नाम पहले 'पंजाब 95' रखा गया था, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया। फिल्म को ओटीटी से हटाने की असल वजह मेकर्स ने अब तक खुलकर नहीं बताई है। हालांकि कहा जा रहा है कि इस फिल्म को कभी सीबीएफसी का सर्टिफिकेट मिला ही नहीं था और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत हटाया गया।

सवाल-जवाब

दिलजीत दोसांझ ने 'सतलुज' के लिए कितनी फीस ली?
हनी त्रेहान के मुताबिक दिलजीत ने कॉन्ट्रैक्ट की औपचारिकता के चलते सिर्फ 1 रुपया फीस के तौर पर लिया।
फिल्म 'सतलुज' किस पर आधारित है?
यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
वे एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे जो 1990 के दशक में पंजाब में 1984 से 1994 के बीच हुए कथित 25,000 अज्ञात अंतिम संस्कारों की जांच के लिए सुर्खियों में आए थे।
फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से क्यों हटाया गया?
कहा जा रहा है कि फिल्म को कभी सीबीएफसी सर्टिफिकेट नहीं मिला था और सुरक्षा कारणों से इसे आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत हटाया गया।
फिल्म का पुराना नाम क्या था?
फिल्म का नाम पहले 'पंजाब 95' रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' किया गया।
फिल्म के निर्देशक कौन हैं?
फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है।
दिलजीत और हनी त्रेहान की पहली मुलाकात कब हुई थी?
साल 2021 में हनी त्रेहान ने करीब 30 मिनट तक दिलजीत से मुलाकात की और उन्हें स्क्रिप्ट व रिसर्च दिखाई थी।
क्या फिल्म को सीबीएफसी सर्टिफिकेट मिला था?
नहीं, कहा जा रहा है कि फिल्म को कभी सीबीएफसी सर्टिफिकेट नहीं मिला।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR