दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के उन सुपरस्टार्स में शुमार थे, जिनकी एक झलक पाने के लिए लड़कियां बेकरार रहती थीं. लेकिन कम ही लोगों को पता है कि उनका सफर आसान नहीं था, इंडस्ट्री के सबसे बड़े नाम बनने से पहले उन्हें शुरुआती दौर में लगातार तीन फिल्मों में नाकामी झेलनी पड़ी थी.
राज कपूर से बचपन का नाता
बचपन में दिलीप कुमार और राज कपूर एक ही मोहल्ले में रहा करते थे. जब दोनों मुंबई पहुंचे, तो आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाने लगे.
पुणे में सूखे मेवों का कारोबार
साल 1940 में दिलीप कुमार मुंबई छोड़कर पुणे चले गए थे. वहां उन्होंने सूखे मेवे सप्लाई करने का काम शुरू किया, क्योंकि उनके पिता फलों का व्यापार करते थे. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और देखते ही देखते वह एक्टिंग की दुनिया में आ गए.
मोहम्मद यूसुफ खान से दिलीप कुमार बनने की कहानी
दिलीप कुमार का असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान था. लेकिन एक्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए उन्होंने अपना नाम बदल लिया. उन्होंने फिल्मों में कभी अपने असली नाम का इस्तेमाल नहीं किया. इसके बावजूद उस दौर में उन्हें टक्कर देने वाला कोई कलाकार नहीं था.
फ्लॉप से शुरुआत, फिर सुपरहिट का सिलसिला
साल 1944 में दिलीप कुमार की पहली फिल्म 'ज्वार भाटा' रिलीज हुई. इसी फिल्म से उनके करियर की शुरुआत हुई और इसी फिल्म ने उन्हें नया नाम 'दिलीप कुमार' दिया. लेकिन ये फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई. इसके बाद उनकी दो और फिल्में आईं, वो भी कुछ खास असर नहीं छोड़ पाईं और फ्लॉप साबित हुईं. लेकिन करियर की चौथी फिल्म 'जुगनू' ने तहलका मचा दिया. ये फिल्म दिलीप कुमार के करियर के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई.
शहीद, मेला और अंदाज ने बनाया स्टार
'जुगनू' की कामयाबी के बाद दिलीप कुमार ने 'शहीद', 'मेला' और 'अंदाज' जैसी फिल्मों में काम किया. यही वो फिल्में थीं, जिन्होंने उन्हें स्टार बना दिया. 'अंदाज' में उनके साथ राज कपूर और नरगिस भी नजर आए थे.
50 के दशक में ट्रेजेडी किंग का दौर
50 के दशक में दिलीप कुमार ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग कब्जा कर लिया था. इस दौर में उनकी 'जोगन', 'बाबुल', 'दीदार', 'तराना', 'दाग', 'आन', 'उड़न खटोला', 'इंसानियत', 'देवदास', 'नया दौर', 'यहूदी', 'मधुमती' और 'पैगाम' जैसी फिल्में रिलीज हुईं. इन्हीं फिल्मों की वजह से वह बॉलीवुड में 'ट्रेजेडी किंग' कहलाने लगे.
राजेश खन्ना और अमिताभ की एंट्री ने बदला माहौल
70 का दशक आते-आते दिलीप कुमार की 'गोपी', 'दास्तान', 'सगीना', 'सगीना महतो' और 'बैराग' जैसी फिल्में आईं, लेकिन इनमें से सिर्फ 'गोपी' ही हिट हो पाई. यही वो दौर था, जब इंडस्ट्री में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन जैसे सुपरस्टार की एंट्री हो चुकी थी. इसके बाद दिलीप कुमार को मिलने वाली फिल्मों की संख्या भी घटने लगी.



















