भारतीय सिनेमा के इतिहास में 14 जनवरी 2000 का दिन एक खास मोड़ साबित हुआ था। इसी दिन निर्देशक और निर्माता राकेश रोशन की फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी। अपने बेटे को बड़े पर्दे पर एक नए नायक के रूप में पेश करने के लिए राकेश रोशन ने एक बेहद बड़ा वित्तीय और व्यक्तिगत जोखिम उठाया था। फिल्म निर्माण के दौरान फंड जुटाने के लिए उन्हें अपना आवास तक बंधक रखना पड़ा था। इसके अलावा शूटिंग की शुरुआत से ठीक पहले मुख्य अभिनेत्री को बदलने जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी सामने आई थीं। दो साल की अनवरत लगन और कठिन मेहनत के बाद जब यह सिनेमा पर्दे पर आया, तो इसने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए और भारतीय फिल्म जगत में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए।
10 करोड़ के बजट से 80 करोड़ का कलेक्शन और बॉक्स ऑफिस पर तहलका
जब राकेश रोशन इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रहे थे, तब किसी ने अनुमान नहीं लगाया था कि एक नए चेहरे को केंद्र में रखकर बनाई गई यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे शानदार व्यावसायिक सफलताओं में शुमार होगी। फिल्म को लगभग 10 करोड़ रुपये के बजट में तैयार किया गया था। रिलीज के बाद फिल्म ने दुनिया भर में 80 करोड़ रुपये से अधिक का शानदार कारोबार किया। अपने शुरुआती बजट से आठ गुना अधिक कमाई करके यह वर्ष 2000 की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्म बन गई। दर्शकों की भारी भीड़ ने सिनेमाघरों का रुख किया, जिससे फिल्म ने कमाई के नए झंडे गाड़ दिए।
ऋतिक रोशन का डबल रोल और अनुपम खेर का सरजी अंदाज़
फिल्म में मुख्य अभिनेता ऋतिक रोशन ने दोहरे किरदार यानी डबल रोल को बखूबी निभाया था। उनके विपरीत मुख्य अभिनेत्री के रूप में अमीषा पटेल नजर आई थीं, जिनकी सादगी और अभिनय को भी दर्शकों ने काफी सराहा। फिल्म की स्टार कास्ट में दलीप ताहिल, मोहनीश बहल और अनुपम खेर जैसे अनुभवी कलाकारों की अहम भूमिकाएँ थीं। अनुपम खेर द्वारा निभाए गए चरित्र और उनका संवाद अदायगी का 'सरजी' वाला खास अंदाज़ दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ। इसके बावजूद फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण ऋतिक रोशन की स्क्रीन प्रेजेंस, उनका शानदार डांस, दमदार एक्शन और रोमांटिक अभिनय था। इस डेब्यू फिल्म के प्रदर्शन के तुरंत बाद ऋतिक रोशन देश के युवाओं की पहली पसंद बन गए और रातोंरात स्टारडम के शिखर पर पहुँच गए।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम और 9 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स
सफलता का यह सिलसिला सिर्फ बॉक्स ऑफिस की कमाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुरस्कारों के मामले में भी इस फिल्म ने इतिहास रच दिया। ऋतिक रोशन ने एक ही वर्ष में फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ डेब्यू मेल का पुरस्कार हासिल करके एक नया रिकॉर्ड बनाया। भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ही वर्ष में ये दोनों शीर्ष पुरस्कार जीतने वाले वह पहले अभिनेता बने। फिल्म ने कुल 9 फिल्मफेयर पुरस्कार जीते और विभिन्न पुरस्कार समारोहों को मिलाकर कुल 92 ट्रॉफियाँ अपने नाम कीं। इतनी विशाल संख्या में पुरस्कार जीतने के कारण इस फिल्म का नाम प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
रिजेक्ट की गई धुनों से सजा आइकॉनिक म्यूज़िक और लकी अली का जादू
इस फिल्म की भव्य सफलता का एक बड़ा आधार इसका कालजयी संगीत था, जिसे संगीतकार राजेश रोशन ने तैयार किया था। गानों के बोल इब्राहिम अश्क, सावन कुमार और विजय अकेला ने लिखे थे। इस फिल्म के संगीत से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प कहानी यह है कि राजेश रोशन ने उन धुनों का इस्तेमाल किया था जिन्हें अन्य फिल्म निर्माताओं ने अस्वीकृत कर दिया था। जब राकेश रोशन ने अपने भाई द्वारा तैयार की गई इन खारिज धुनों को सुना, तो उन्होंने तुरंत इन्हें अपनी फिल्म के लिए चुन लिया। यही खारिज की गई धुनें बाद में 'एक पल का जीना' और 'ना तुम जानो ना हम' जैसे सुपरहिट गानों के रूप में सामने आईं।
संगीत विभाग ने पुरस्कारों की दौड़ में भी बाजी मारी। सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ गीतकार, सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक और सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर जैसे कई प्रमुख पुरस्कार फिल्म के नाम रहे। राजेश रोशन को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला, जो 1975 में आई फिल्म 'जूली' के बाद उनका दूसरा ऐसा सम्मान था। इसके साथ ही हास्य अभिनेता महमूद के बेटे लकी अली ने इस फिल्म के माध्यम से पार्श्व गायन के क्षेत्र में तहलका मचा दिया। 'एक पल का जीना' गाने पर ऋतिक रोशन द्वारा किया गया सिग्नेचर डांस स्टेप आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रसिद्ध डांस मूव्स में गिना जाता है।
जीतेंद्र की कहानी और एक ब्लॉकबस्टर लॉन्च का इतिहास
इस ऐतिहासिक फिल्म की पटकथा और कहानी का श्रेय जाने-माने अभिनेता जीतेंद्र को दिया गया था, जिन्हें क्रेडिट स्क्रीन पर उनके वास्तविक नाम रवि कपूर के रूप में दर्शाया गया था। राकेश रोशन के कुशल निर्देशन, बेहतरीन कहानी, थ्रिलर एलिमेंट्स, एक्शन और बेमिसाल गानों के संयोजन ने इस फिल्म को एक ऑल-टाइम क्लासिक बना दिया। यह फिल्म न केवल एक व्यावसायिक सफलता थी, बल्कि इसने एक नए कलाकार को रातोंरात सुपरस्टार बनाने की अनूठी मिसाल भी पेश की। यही कारण है कि वर्ष 2000 की यह पेशकश आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार डेब्यू फिल्मों में गिनी जाती है।



















