भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे तराने दर्ज हैं, जो बदलते वक्त के बावजूद श्रोताओं के दिलों में हमेशा तरोताजा बने रहते हैं। साल 1988 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई सफल ड्रामा फिल्म ‘वारिस’ का रोमांटिक गीत ‘मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम’ भी इसी श्रेणी में शामिल है। इस गीत में अदाकारा अमृता सिंह और अभिनेता राज बब्बर की जोड़ी ने अपनी भावुक और सहज केमिस्ट्री से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। पर्दे पर नायिका अपने प्रेमी के साथ उम्रभर का साथ और कभी न खत्म होने वाले अमर प्रेम की मन्नत मांगती दिखाई देती है। विडंबना यह रही कि रूपहले पर्दे पर इस बेमिसाल रिश्ते को साकार करने वाले दोनों ही कलाकार अपने निजी जीवन में मोहब्बत के बेहद कठिन और तकलीफदेह इम्तिहानों से गुजरे।
यह चर्चित गीत महज एक फिल्मी रचना नहीं था, बल्कि उस दौर के समर्पित और सादगी भरे प्यार का सजीव दस्तावेज बन गया था। गीत के बोलों में जहां एक ओर महबूब का साथ छूट जाने की गहरी आशंका छिपी थी, वहीं दूसरी तरफ जिंदगी भर अटूट रिश्ते में बंधे रहने की दिली गुजारिश भी मौजूद थी। जब स्वर कोकिला लता मंगेशकर की सुरीली आवाज इन भावुक पंक्तियों को तराशती है, तो पर्दे पर राज बब्बर और अमृता सिंह का सादगी भरा रोमांस जीवंत हो उठता है। दोनों की आंखों में बेपनाह मोहब्बत की चमक और दिलों में रिश्ते की सलामती की चाह साफ नजर आती है। इसके बावजूद, इस खूबसूरत फिल्मी अफसाने के पीछे मौजूद हकीकत दोनों ही सितारों के लिए निजी तौर पर काफी दर्दनाक साबित हुई।
फिल्म वारिस का निर्माण, कर्णप्रिय संगीत और भावुक बोल
रविंद्र पीपत के निर्देशन में तैयार हुई फिल्म ‘वारिस’ अस्सी के दशक की एक बेहद लोकप्रिय, भावनात्मक और पारिवारिक ड्रामा फिल्म मानी जाती है। इस सफल सिनेमाई परियोजना का निर्माण बलदेव गिल, जोगा सिंह चीमा और स्वर्ण योगराज ने मिलकर किया था। फिल्म के गानों को सजाने की जिम्मेदारी संगीतकार जोड़ी उत्तम-जगदीश ने निभाई थी, जिन्होंने अपनी धुनों में गहरा ठहराव और मिठास घोली। वहीं, इस सदाबहार गीत के दिल को छू लेने वाले बोल जाने-माने गीतकार वर्मा मलिक की कलम से निकले थे, जिन्होंने प्रेम और समर्पण के जज्बातों को बेहद खूबसूरती से शब्दों में ढाला।
लता मंगेशकर और मनमोहन सिंह की गायकी का अनोखा संगम
‘मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम’ को महान गायिका लता मंगेशकर और गायक मनमोहन सिंह ने अपनी सुरीली जुगलबंदी से अमर बना दिया। गीत के रिलीज होते ही यह हर प्रेमी युगल की जुबान पर छा गया और संगीत प्रेमियों के बीच जबरदस्त तरीके से पसंद किया गया। दृश्य स्तर पर अमृता सिंह की सादगी, राज बब्बर का संजीदा अभिनय और पंजाब के लहलहाते हरे-भरे खेत-खलिहानों का बैकग्राउंड आज भी पुरानी यादों को ताजा कर देता है। इस गाने में नजर आने वाला प्यार किसी चकाचौंध या उथलेपन का मोहताज नहीं था, बल्कि एक शांत, गंभीर और आत्मा को छूने वाला अहसास था। इसी वजह से बीते दौर के सदाबहार प्रेम गीतों में यह रचना अपनी एक विशिष्ट और अमिट जगह रखती है।
राज बब्बर की जिंदगी में स्मिता पाटिल का आना और अधूरा छूटा साथ
पर्दे पर सहज और गंभीर प्रेम की अभिव्यक्ति करने वाले राज बब्बर की वास्तविक जिंदगी काफी उथल-पुथल और चर्चाओं से घिरी रही। राज बब्बर का विवाह नादिरा बब्बर से हुआ था, लेकिन अस्सी के दशक के दौरान उनका संपर्क मशहूर अभिनेत्री स्मिता पाटिल से हुआ। जल्द ही दोनों के बीच का यह जुड़ाव एक गहरे प्रेम संबंध में बदल गया। इसके बाद राज बब्बर ने अपने परिवार का दायरा पीछे छोड़ते हुए स्मिता पाटिल के साथ शादी का फैसला किया।
यह वैवाहिक सफर बहुत लंबा नहीं चल सका और जल्द ही एक अनहोनी ने खुशियों को लील लिया। साल 1986 में स्मिता पाटिल ने बेटे प्रतीक बब्बर को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के कुछ ही दिनों बाद उनका अचानक असमय निधन हो गया। स्मिता के इस तरह आकस्मिक चले जाने से राज बब्बर भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट गए थे। जब साल 1988 में फिल्म ‘वारिस’ पर्दे पर आई, उस समय राज बब्बर अपनी जिंदगी के सबसे काले और तकलीफदेह दौर का सामना कर रहे थे और स्मिता पाटिल के बिछोह के गहरे दर्द से जूझ रहे थे।
अमृता सिंह की पहली सगाई का टूटना और बाद का उतार-चढ़ाव
दूसरी तरफ, पर्दे पर प्यार की अनमोल मिसाल पेश करने वाली अमृता सिंह की निजी जिंदगी भी सच्चे और स्थिर प्रेम के लिए संघर्षरत रही। अस्सी के दशक में अमृता सिंह का नाम पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री के साथ चर्चा में आया था। दोनों का रिश्ता काफी संजीदा मोड़ पर था और बात सगाई तक पहुंच चुकी थी, लेकिन कुछ आपसी शर्तों और मतभेदों के चलते यह रिश्ता विवाह में तब्दील नहीं हो सका और टूट गया।
इसके बाद साल 1991 में अमृता सिंह ने उम्र में खुद से 12 साल छोटे सैफ अली खान के साथ शादी का कदम उठाया, जिसके लिए उन्हें अपने परिवार के विरोध का भी सामना करना पड़ा। उस दौर में अमृता बॉलीवुड की स्थापित और चर्चित स्टार थीं, जबकि सैफ अली खान ने फिल्म उद्योग में कदम भी नहीं रखा था। इस वैवाहिक जीवन से उनके दो बच्चे, सारा अली खान और इब्राहिम अली खान हुए। हालांकि, यह रिश्ता भी हमेशा के लिए कायम न रह सका और 13 साल के सफर के बाद कड़वाहट और तलाक के साथ समाप्त हो गया। रिश्तों में मिले इस दर्द और अलगाव के बाद अमृता सिंह ने कभी दूसरा विवाह नहीं किया और अकेले ही अपने दोनों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी संभाली।



















