किसान दौलत ने इस बार बरबट्टी की खेती में नया प्रयोग किया है, जिसके तहत उन्होंने ₹5.10 प्रति बीज की दर से कुल ₹510 के बीज खरीदकर 100 पौधे लगाए हैं। हालांकि अभी फसल की तुड़ाई शुरू नहीं हुई है, लेकिन वर्तमान में पौधे काफी स्वस्थ नजर आ रहे हैं और उनमें फल भी दिखने लगे हैं।
बरबट्टी की विशेषता और तुड़ाई की अवधि
दौलत का कहना है कि बरबट्टी की फसल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि पौधे एक बार तैयार हो जाने के बाद लंबे समय तक लगातार फल देते रहते हैं। किसान के अनुसार इस फसल की सालभर में कई बार तुड़ाई की जा सकती है, और यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो कुल मिलाकर लगभग 100 बार तक तुड़ाई होने की पूरी संभावना है।
लागत घटाने का अनोखा तरीका
इस बार की खेती में दौलत ने नए बेड और मल्चिंग जैसी चीजों पर भारी खर्च करने से परहेज किया है। उन्होंने उसी खेत को चुना जिसमें पहले खीरे की फसल उगाई गई थी। खीरे की कटाई के बाद खेत की मिट्टी में खाद मिलाकर उसे दोबारा उपजाऊ बनाया गया और पुराने बेड पर ही बरबट्टी के बीज बो दिए गए। इस स्मार्ट तरीके से इस सीजन में उनका मुख्य खर्च केवल बीजों की खरीद तक ही सीमित रहा।
पुराना अनुभव और पिछली कमाई
यह कोई पहला मौका नहीं है जब दौलत बरबट्टी की खेती कर रहे हैं। इससे पहले वे लगभग ₹1,400 के बीज खरीदकर खेती कर चुके हैं, जिससे उन्हें बंपर फायदा हुआ था और करीब ₹8,000 से ₹10,000 तक की कुल आय प्राप्त हुई थी। इसी पुराने और सफल अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने एक बार फिर इस फसल को उगाने का फैसला किया है।
मुनाफे की संभावना और बाजार भाव
किसान का मानना है कि बरबट्टी के बीज दूसरी कई फसलों के मुकाबले थोड़े महंगे जरूर पड़ सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि तक लगातार फल देने की इसकी क्षमता इसे बेहद मुनाफे का सौदा बनाती है। यदि किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती करें और स्थानीय बाजार में सही दाम मिल जाए, तो कमाई के आंकड़े और भी ज्यादा ऊंचे जा सकते हैं।



















