पलामू के खेतों में स्ट्रॉबेरी की नई बहार, कम बारिश वाले इलाके में किसान कमा सकते हैं तगड़ा मुनाफाघरेलू पौधों के लिए प्याज के छिलकों से बनाएं लिक्विड खाद और मल्चिंग, जानिए आसान विधिकनाडा की जनसंख्या में 0.5 प्रतिशत की बढ़त, मंदी की आशंका घटी लेकिन वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल जारीअमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों से डॉलर में उछाल, यूरो और प्रमुख मुद्राओं पर बढ़ा दबावमेष राशिफल 25 सितंबर: दिन की शुरुआत में करियर और संपर्कों से मिलेगा लाभ, शाम को निजी प्राथमिकताओं पर दें ध्यानऑनलाइन खर्चों से खाली हो रहा बैंक खाता तो फोन में ऑन करें यह इनबिल्ट फीचर, सामने आ जाएगी पाई-पाई की डिटेलअल्ट्रा-लग्जरी कार बाजार में हलचल, 5 अक्टूबर को भारत आ रही नई मर्सिडीज-मेबैक एस-क्लासभरतपुर की पारंपरिक बम्बई मिठाई आज भी ताजा कर रही बचपन का स्वादडॉक्टर हू की मशहूर कहानी द शैतान पिट अब बड़े पर्दे पर, अनसीन फुटेज के साथ रिलीज होगी एक्सटेंडेड फिल्मनागालैंड में बाल सुरक्षा तंत्र की समीक्षा, बाल अधिकार आयोग ने बुनियादी ढांचे और बजट की कमी पर जताई चिंता
डिजिटल भुगतान पर स्पष्टीकरण: 2000 रुपये से बड़े यूपीआई पर ग्राहकों की जेब से नहीं कटेगा एमडीआरव्यापार
24 सित॰ 2026, 10:12 pm (25 मिनट पहले)· 0

डिजिटल भुगतान पर स्पष्टीकरण: 2000 रुपये से बड़े यूपीआई पर ग्राहकों की जेब से नहीं कटेगा एमडीआर

व्यापारियों को किए जाने वाले दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर तय 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। बैंकों और व्यापारिक संगठनों के बीच गलतफहमियों को दूर करने के लिए विशेष जागरूकता मुहिम चलाई जाएगी।

दुकानदारों और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगने वाला 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। डिजिटल लेन-देन को लेकर उपभोक्ताओं और दुकानदारों के मन में उपजी भ्रांतियों को खत्म करने के मकसद से वित्तीय संस्थान बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहे हैं। आधिकारिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि इस मर्चेंट डिस्काउंट शुल्क से सरकारी खजाने में कोई धनराशि नहीं जाएगी, बल्कि यह राशि यूपीआई नेटवर्क के संचालन और तकनीकी ढांचे से जुड़े बैंकों एवं अन्य हितधारकों के बीच बांटी जाएगी।

जीएसटी परिषद के सामने रखा जाएगा कर का प्रस्ताव

नियमों की समीक्षा के क्रम में यह बात भी सामने आई है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर जीएसटी लागू करने की व्यवहार्यता और औचित्य की पड़ताल करेगी। निर्धारित व्यवस्था के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से कारोबारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर तय किया गया है। इसके साथ ही एक उच्च सीमा भी निर्धारित की गई है, जिसके तहत 75,000 रुपये या उससे अधिक के किसी भी बड़े डिजिटल लेन-देन पर लगने वाला अधिकतम शुल्क 300 रुपये तक सीमित रहेगा। आम लोगों के बीच आपस में होने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) ट्रांसफर और सामान्य रोजमर्रा के छोटे भुगतानों को पूरी तरह से इस शुल्क के दायरे से मुक्त रखा गया है।

ये भी पढ़ें

नकदी की ओर लौटने की आशंकाओं पर सरकार का रुख

बाजार के जानकारों का मानना था कि 2,000 रुपये से ऊपर के लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने के बाद छोटे कारोबारी और लागत को लेकर सतर्क रहने वाले ग्राहक एक बार फिर नकदी के इस्तेमाल की तरफ रुख कर सकते हैं। कई व्यापारी वर्गों ने भी इस व्यवस्था पर चिंता जताते हुए नकद लेन-देन को प्राथमिकता देने की बात कही थी। इसी पृष्ठभूमि में यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि ग्राहक की जेब से कोई अतिरिक्त पैसा नहीं काटा जाएगा और बैंक भ्रांतियों को दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठाएंगे।

व्यापारिक संगठनों और बैंक संघ के साथ संवाद

इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से समझाने और जमीनी स्तर की चिंताओं को दूर करने के लिए भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के साथ विस्तृत विचार-विमर्श की योजना बनाई गई है। इसके अतिरिक्त, खुदरा कारोबारियों की प्रमुख संस्था कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) सहित कई अन्य व्यापारी संघों से बातचीत कर छोटे व्यवसायियों के मन में पैदा हुए संशयों का समाधान किया जाएगा।

15 अक्टूबर से लागू व्यवस्था का असली ढांचा

नया नियामक ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने जा रहा है, जो चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन पर ही लागू होता है। इस नियम के तहत किसी भी साधारण ग्राहक को डिजिटल क्यूआर कोड स्कैन करने या यूपीआई ऐप से भुगतान करने के दौरान अपनी जेब से अलग से कोई शुल्क नहीं चुकाना पड़ेगा।

सवाल-जवाब

क्या 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा?
नहीं, 0.4 प्रतिशत का एमडीआर ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। ग्राहकों को केवल अपने बिल की वास्तविक राशि ही चुकानी होगी।
यूपीआई पर नया एमडीआर नियम कब से लागू हो रहा है?
यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने जा रहा है।
क्या 75,000 रुपये या उससे अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क की कोई सीमा है?
हाँ, 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर लगने वाला अधिकतम शुल्क 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
क्या दोस्तों या परिजनों को पैसे भेजने (पी2पी) पर भी कोई शुल्क लगेगा?
नहीं, व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) लेन-देन और सभी छोटे भुगतानों को इस शुल्क से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
एमडीआर से मिलने वाली राशि क्या सरकार के पास जाएगी?
नहीं, इस शुल्क से सरकार को कोई धनराशि नहीं मिलेगी; यह राशि यूपीआई नेटवर्क से जुड़े बैंकों और हितधारकों को दी जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp