जापान की बड़ी वित्तीय कंपनी SBI होल्डिंग्स की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई SBI क्रिप्टो अपनी बिटकॉइन माइनिंग पूल सेवा को धीरे धीरे बंद कर रही है। कंपनी ने खुद यह जानकारी सामने रखी है। खास बात यह है कि इस फैसले के पीछे की कोई वजह नहीं बताई गई, लेकिन कंपनी ने साफ कर दिया है कि 31 जुलाई को इसका संचालन पूरी तरह थम जाएगा।
कंपनी ने अपने ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उस तारीख तक सब कुछ पहले जैसा चलता रहेगा। कंपनी के मुताबिक, तब तक पूल सामान्य हालात में काम करता रहेगा और यूजर्स हमेशा की तरह माइनिंग करते रह सकते हैं और अपना पेआउट भी पाते रहेंगे। कंपनी ने कहा कि उसका मकसद तय बंदी की तारीख तक स्थिर और भरोसेमंद माइनिंग पूल सेवा देते रहना है।
2017 से चल रहा था कारोबार
कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, वह कम से कम 2017 से क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग सेवा दे रही है। हैशरेट इंडेक्स के आंकड़ों की मानें तो हैश रेट के हिसाब से यह इस समय दुनिया का 11वां सबसे बड़ा बिटकॉइन माइनिंग पूल है। इस पूल के जरिए यूजर्स बिटकॉइन के अलावा बिटकॉइन कैश और लाइटकॉइन की भी माइनिंग कर सकते हैं।
दरअसल, बिटकॉइन माइनिंग पूल छोटे खिलाड़ियों को एक साथ आने का मौका देते हैं। इसमें कई लोग अपने संसाधन और कंप्यूटिंग ताकत यानी हैश रेट को मिलाकर बिटकॉइन ब्लॉक जीतने की होड़ में शामिल होते हैं और इसके बदले BTC का इनाम पाते हैं। जैसे ही पूल कोई ब्लॉक खोज लेता है, वैसे ही समूह में हर व्यक्ति ने जितने संसाधन लगाए होते हैं, उसी अनुपात में इनाम बांट दिया जाता है।
यूजर्स को ढूंढना होगा नया ठिकाना
अब SBI के माइनिंग पूल से जुड़े यूजर्स को कहीं और रुख करना होगा। कंपनी का कहना है कि वह इस बदलाव में ग्राहकों की मदद के लिए ब्रेन्स और लक्सर जैसे दूसरे माइनिंग पूल ऑपरेटरों के साथ कारोबारी और तकनीकी बातचीत कर रही है। कंपनी ने कहा कि कुछ ऑपरेटर SBI क्रिप्टो से आने वाले ग्राहकों के लिए खास प्रोग्राम या रियायती शर्तें भी पेश कर सकते हैं।
AI की ओर भाग रहे बड़े माइनर्स
SBI क्रिप्टो का माइनिंग से हटना एक बड़े रुझान का हिस्सा है। बड़े बिटकॉइन माइनर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बेहतर मौके तलाशते हुए इस क्षेत्र को छोड़ रहे हैं। पिछले साल शेयर बाजार में लिस्टेड माइनर बिटफार्म्स ने अपना पूरा कारोबार समेटने का ऐलान किया था, क्योंकि वह AI की ओर बढ़ गई और उसने अपना नाम बदलकर कील इंफ्रास्ट्रक्चर रख लिया।
कुछ दूसरे बड़े माइनर्स ने बड़ी टेक कंपनियों के साथ अरबों डॉलर के AI कंप्यूट सौदे किए हैं, भले ही वे अपना बिटकॉइन कारोबार भी चला रहे हों। बिटकॉइन की गिरती कीमत के बीच माइनिंग का धंधा कंपनियों के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है। यह सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी अब अपने पिछले अक्टूबर में बने 1,26,080 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर से 50 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ चुकी है।
पैरेंट कंपनी की क्रिप्टो में अब भी दिलचस्पी
भले ही SBI अपना माइनिंग कारोबार छोड़ रही हो, लेकिन उसकी मूल कंपनी क्रिप्टो में आगे बढ़ना जारी रखे हुए है। इसी हफ्ते SBI होल्डिंग्स ने ऐलान किया कि उसने जापानी क्रिप्टो एक्सचेंज बिटबैंक को 28.9 करोड़ डॉलर में खरीदने पर सहमति जताई है।













