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महाराष्ट्र में भंडारण संकट और खराब मानसून से प्याज-चावल की कीमतों में भारी उछालव्यापार
24 जुल॰ 2026, 12:27 am (3 घंटे पहले)· 0

महाराष्ट्र में भंडारण संकट और खराब मानसून से प्याज-चावल की कीमतों में भारी उछाल

बेमौसम बारिश, कमजोर मानसून और भंडारण सुविधाओं के भारी अभाव के कारण देश भर में प्याज और चावल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। महाराष्ट्र में प्याज का उत्पादन गिरने और तमिलनाडु में धान की बुवाई प्रभावित होने से आम आदमी की रसोई का बजट बुरी तरह चरमरा गया है।

भारत भर में आम परिवारों के मासिक बजट पर एक बार फिर से भारी दबाव पड़ने वाला है। रसोई के दो सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी खाद्य पदार्थों, प्याज और चावल, की कीमतों पर मौसम की मार और बुनियादी ढांचे की कमी का असर साफ दिखने लगा है। एक तरफ जहां बेमौसम बारिश ने फसलों को तबाह कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ अपर्याप्त भंडारण के कारण आने वाले कुछ ही महीनों में प्याज की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है। इसके साथ ही, कमजोर मानसून और कम बारिश के चलते कई राज्यों में धान की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में चावल की कई लोकप्रिय किस्में पहले ही काफी महंगी हो चुकी हैं। अगर कृषि और बाजार के हालात जल्द नहीं सुधरे, तो खाद्य महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ सकती है और रोजमर्रा का जीवन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

महाराष्ट्र में प्याज की भारी किल्लत के आसार

प्याज के इस आसन्न संकट का मुख्य केंद्र महाराष्ट्र राज्य है, जिसे पूरे देश में प्याज की आपूर्ति का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। महाराष्ट्र राज्य कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि अगले दो महीनों के भीतर राज्य के बाजारों में प्याज की भारी किल्लत देखने को मिल सकती है। इस चिंताजनक स्थिति के पीछे कई प्राकृतिक और व्यवस्थागत कारण पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि इस वर्ष प्याज का कुल उत्पादन पिछले साल के शानदार उत्पादन के मुकाबले काफी कम रहा है। इसके अलावा, मई के महीने में हुई अचानक बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार, दोनों तरह की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। प्राकृतिक आपदा की इस मार के साथ-साथ, किसानों के सामने उपज के सुरक्षित भंडारण का एक बहुत बड़ा संकट भी हमेशा खड़ा रहता है। पर्याप्त और आधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के अभाव में, बहुत से गरीब और मझोले किसानों को अपनी तैयार फसल को खराब होने से बचाने के लिए उसे औने-पौने दामों पर जल्दी-जल्दी बेचना पड़ा। बाजार के जानकारों और कृषि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि किसानों की इसी मजबूरी और खराब फसल के कारण आने वाले दिनों में मंडियों में प्याज की आवक बेहद कम हो जाएगी, जिससे खुदरा बाजार में इसके दाम आसमान छूने लगेंगे।

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उत्पादन में गिरावट और भंडारण की गंभीर समस्या

अगर हम उत्पादन के आंकड़ों पर बारीकी से नजर डालें, तो स्थिति की गंभीरता का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञों के वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनुमानों के मुताबिक, देश भर में प्याज का कुल उत्पादन लगभग 327.40 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद जताई गई है। इस कुल राष्ट्रीय उत्पादन में अकेले महाराष्ट्र की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत, यानी 151.10 लाख मीट्रिक टन के आसपास रहने का अनुमान है। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले वर्ष राज्य में हुए रिकॉर्ड 170.99 लाख मीट्रिक टन के उत्पादन से काफी पीछे है। राज्य में केवल प्रतिकूल मौसम ही एकमात्र समस्या नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर प्याज प्रोसेसिंग उद्योग और आधुनिक वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं का भारी अभाव भी एक बहुत बड़ी चुनौती है। वैज्ञानिक तरीके से फसल को स्टोर न किए जाने के कारण हर साल हजारों टन प्याज या तो मंडियों में या फिर गोदामों में ही नमी के कारण सड़ जाता है। फसल की इस भारी बर्बादी का सीधा खामियाजा जहां एक तरफ किसानों को अपने भारी आर्थिक नुकसान के रूप में उठाना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में सप्लाई चेन बुरी तरह से टूट जाने के कारण आम उपभोक्ताओं को भी दोगुनी या तिगुनी कीमत चुकानी पड़ती है।

बारिश की कमी से चावल बाजार में तेज महंगाई

जहां प्याज की खेती बेमौसम की ज्यादा बारिश से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर चावल के बाजार में महंगाई का मुख्य कारण बारिश की भारी कमी होना है। मानसून के कमजोर रहने और जरूरत भर की बारिश न होने के चलते देश के कई प्रमुख राज्यों में धान की खेती का पूरा कृषि चक्र बिगड़ गया है। विशेषकर दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में स्थिति काफी चिंताजनक है, जहां मेट्टूर बांध में जल स्तर पर्याप्त न होने के कारण कुरुवई धान की खेती के लिए बांध के गेट सही समय पर नहीं खोले जा सके। खेतों तक पानी पहुंचने में हुई इस भारी देरी का सीधा और नकारात्मक असर धान की समयबद्ध बुवाई पर पड़ा है। बुवाई प्रभावित होने के कारण बाजार में नई फसल की उम्मीद से कम आवक होने लगी है, जिसके चलते कई सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली चावल की किस्मों के दाम खुदरा बाजार में बहुत तेजी से ऊपर की तरफ बढ़ गए हैं।

खुदरा बाजार में चावल के दाम आसमान पर

खराब मानसून और कमजोर फसल का यह असर अब आम किराना दुकानों और अनाज मंडियों में साफ दिखाई दे रहा है। किचिली सांबा, थूया मल्ली, सीरागा सांबा और पोन्नी जैसी कई अत्यंत लोकप्रिय और प्रीमियम दर्जे की चावल किस्मों की कीमतों में सीधे 8 रुपये प्रति किलो तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है। इस बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद, अब ये सभी विशिष्ट किस्में बाजार में 52 रुपये से लेकर 60 रुपये प्रति किलो के ऊंचे भाव पर आम जनता को बेची जा रही हैं। महंगाई की यह मार केवल अच्छी गुणवत्ता वाले चावलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आम और गरीब वर्ग द्वारा रोजमर्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले मोटे चावल भी महंगे हुए हैं। बाजार की रिपोर्ट के अनुसार, CR-1009, AST-16 और पोनमणि पुलुंगल जैसी मोटे चावल की किस्मों के दाम में भी लगभग 3 रुपये प्रति किलो की तेजी आई है, और अब ये बाजार में करीब 38 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचे जा रहे हैं।

इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर अत्यधिक पसंद की जाने वाली किस्मों में भी बेतहाशा तेजी दर्ज की गई है। मैसूर पोन्नी चावल का खुदरा भाव जो कुछ समय पहले 50 रुपये हुआ करता था, वह अब छलांग लगाकर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। ठीक इसी तरह, कंट्री पोन्नी चावल की कीमत 55 रुपये से बढ़कर 68 रुपये प्रति किलो हो गई है। लेकिन महंगाई का सबसे बड़ा और हैरान करने वाला झटका सीरागा सांबा चावल की कीमत में देखने को मिला है। इस विशेष किस्म के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। इसकी कीमत मात्र 110 रुपये प्रति किलो से सीधे छलांग लगाकर 200 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है, जो आम आदमी की पहुंच से लगभग बाहर हो चुकी है।

सरकारी एजेंसियों के लिए बढ़ती हुई चुनौती

देश के तमाम कृषि विशेषज्ञों और वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि यदि आने वाले समय में मौसम के मिजाज में कुछ सुधार नहीं होता है और मंडियों में खाद्य आपूर्ति की स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो पूरे देश में खाद्य महंगाई का यह दबाव और अधिक भयंकर रूप ले लेगा। हम सभी जानते हैं कि भारतीय रसोई में प्याज और चावल का उपयोग रोजाना के आधार पर होता है, इसलिए इन दोनों ही अत्यंत जरूरी चीजों का लगातार महंगा होना सीधे तौर पर करोड़ों आम परिवारों की जेब पर भारी पड़ेगा और उनके घर के बजट को असंतुलित कर देगा। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में, केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के लिए यह सुनिश्चित करना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी कि समय रहते अनाज और सब्जियों के पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही, सप्लाई चेन प्रबंधन को आधुनिक बनाकर और बाजार में बिल्कुल सही समय पर दखल देकर इन बेलगाम कीमतों को प्रभावी रूप से नियंत्रित करना बेहद आवश्यक होगा, ताकि उपभोक्ताओं को महंगाई की इस भयानक दोहरी मार से जल्द से जल्द कुछ राहत मिल सके।

सवाल-जवाब

प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण क्या है?
मई में हुई बेमौसम बारिश, कुल उत्पादन में आई गिरावट और आधुनिक भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण प्याज की कीमतों में उछाल आया है।
महाराष्ट्र में इस साल कितना प्याज उत्पादन होने का अनुमान है?
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए महाराष्ट्र में प्याज का कुल उत्पादन 151.10 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 170.99 लाख मीट्रिक टन से कम है।
चावल की कीमतों में अचानक तेजी क्यों आई है?
कई राज्यों में बारिश की कमी के कारण धान की खेती प्रभावित हुई है, विशेषकर तमिलनाडु में मेट्टूर बांध का पानी समय पर न मिलने से बुवाई में देरी हुई है।
सीरागा सांबा चावल के दाम कितने बढ़ गए हैं?
सीरागा सांबा चावल की कीमत में सबसे ज्यादा उछाल आया है, और यह 110 रुपये प्रति किलो से सीधे बढ़कर 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
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