महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में सूखे की मार झेल रहे कृषि परिवारों को आगामी त्योहार के दौरान आर्थिक तंगी से बचाने के लिए राज्य प्रशासन ने एक विशेष वित्तीय मदद की रूपरेखा तैयार की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि सरकार का प्रयास दिवाली पर्व से पहले ही किसानों के बैंक खातों में ₹5000 की एकमुश्त सहायता राशि सीधे जमा कराने का है। इस आर्थिक संबल का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पानी की कमी और फसल संकट के बावजूद अन्नदाताओं के घरों में त्योहार की खुशियां फीकी न पड़ें और वे अपने जरूरी त्योहार संबंधी व घरेलू खर्चों को बिना किसी भारी दबाव के पूरा कर सकें।
राज्य में सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दायरा 305 तहसीलों तक बढ़ा
मौसम की बेरुखी और बारिश की कमी के कारण उपजी गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए महाराष्ट्र शासन ने संकटग्रस्त क्षेत्रों की सूची का विस्तार किया है। शुरुआती आकलन के दौरान प्रशासन ने पहले चरण में 265 तहसीलों को सूखा घोषित किया था। हालांकि जमीनी हालात की समीक्षा के बाद अब इस दायरे में 40 अतिरिक्त तहसीलों को जोड़ते हुए कुल संख्या 305 तहसील कर दी गई है। दायरा बढ़ने के बाद बड़े पैमाने पर ग्रामीण आबादी सीधे राहत की हकदार बन गई है। खेतों में खड़ी फसलों की पैदावार घटने, जुताई और बुवाई पर आई लागत डूबने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नगदी के संकट से जूझ रहे किसानों को इस आपातकालीन आर्थिक मदद से फौरी सहारा मिलेगा।
दिवाली से पहले भुगतान का लक्ष्य, पात्रता और प्रक्रिया का इंतजार
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार इस राहत कदम को अमलीजामा पहनाने के लिए पूरी कैबिनेट के साथ दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने मिलकर रणनीतिक तैयारी की है। शासन का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि बैंक खातों में अंतरण की प्रक्रिया दिवाली आने से पूर्व ही संपन्न कर ली जाए। हालांकि इस वित्तीय मदद को प्राप्त करने के लिए कौन से किसान पात्र माने जाएंगे, कुल कितने लाभार्थियों को यह रकम दी जाएगी और वितरण के लिए क्या कोई अलग से आवेदन करना होगा या सीधे डीबीटी से भुगतान होगा, इन तमाम बिंदुओं पर अभी आधिकारिक ब्योरा आना बाकी है। ऐसी स्थिति में संबंधित ग्रामीण परिवारों को पात्रता मानदंडों और भुगतान प्रणाली से जुड़े अंतिम सरकारी आदेशों की प्रतीक्षा करने की सलाह दी गई है।
संकट से निपटने के लिए 12 विभिन्न योजनाओं का सहारा
केवल नकद सहायता तक सीमित न रहते हुए राज्य सरकार ने सूखे की व्यापक विभीषिका को थामने के उद्देश्य से 12 विशेष योजनाएं भी लागू की हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य ध्येय प्रभावित इलाकों में बुनियादी राहत पहुंचाना और खेती पर निर्भर परिवारों के रोजमर्रा के संघर्ष को कम करना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सूखे का असर केवल खेत और खलिहान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे परिवार की आमदनी, बच्चों की जरूरतों और दैनिक जीवन के पोषण को भी गहरे से प्रभावित करता है। यद्यपि इन 12 योजनाओं की विस्तृत नियम व शर्तें अभी सार्वजनिक की जानी हैं, लेकिन शासन का यह चौतरफा कदम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिरता लाने का एक अहम प्रयास माना जा रहा है।


















