भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ समय से विदेशी संस्थागत निवेशकों की जबरदस्त बिकवाली देखने को मिल रही थी। घरेलू बाजार से लाखों करोड़ रुपये की निकासी के चलते प्रमुख सूचकांक लगातार दबाव में थे और लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। बाजार नियामक सेबी के कई सख्त नियमों के कारण भी विदेशी निवेशक असहज महसूस कर रहे थे और अपने निवेश को अधिक आसान तथा सुरक्षित बाजारों की तरफ ले जा रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए नियमों को काफी सरल बना दिया है।
केवाईसी समीक्षा की अवधि में बड़ा बदलाव
विदेशी निवेशकों की लंबे समय से यह शिकायत थी कि उन्हें बेहद कम अंतराल पर बार-बार केवाईसी की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सेबी ने इस परेशानी का समाधान निकालते हुए केवाईसी रिव्यू की समयसीमा को काफी आगे बढ़ा दिया है। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को बार-बार दस्तावेजों की जांच कराने की भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी और उनका संचालन आसान होगा।
नियामक के नए फैसले के तहत कैटेगरी 1 के विदेशी निवेशकों के लिए जो केवाईसी रिव्यू पहले हर 1 साल में कराना जरूरी होता था, उसकी मियाद अब बढ़ाकर हर 2 साल कर दी गई है। वहीं कैटेगरी 2 के निवेशकों को सबसे बड़ा फायदा मिला है। पहले इस वर्ग के निवेशकों को हर 3 साल में यह प्रक्रिया दोहरानी पड़ती थी, जिसे अब सीधे बढ़ाकर हर 8 साल कर दिया गया है। हालांकि, स्वागत-एफआई श्रेणी के निवेशकों के लिए नियमों में कोई फेरबदल नहीं हुआ है और उनके लिए यह अवधि पूर्ववत 10 साल ही बनी रहेगी।
कंप्लायंस के मोर्चे पर भी हटाई गई एक और बाध्यता
केवाईसी समयसीमा बढ़ाने के साथ ही सेबी ने अनुपालन से जुड़ा एक और अहम बोझ विदेशी निवेशकों के सिर से उतार दिया है। अब तक विदेशी निवेशकों को अपना रजिस्ट्रेशन जारी रखने के दौरान पहले सौंपी गई जानकारियों में बदलाव न होने को लेकर अलग से कन्फर्मेशन देना पड़ता था। नियामक ने इस अनिवार्य शर्त को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
इस नियम के हटने से विदेशी निवेशकों के समय और वित्तीय संसाधनों की भारी बचत होगी। पहले निवेशकों को एक ही तरह की सूचना की दोबारा पुष्टि करने के लिए जटिल कानूनी और कागजी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिससे उनका काफी वक्त बर्बाद होता था। इन सुधारों से उम्मीद की जा रही है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर लौटेगा और भारतीय इक्विटी बाजार में पूंजी प्रवाह में सुधार देखने को मिलेगा।



















