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टेक दिग्गज गूगल पर यूरोप में 8,900 करोड़ रुपये का जुर्माना, सर्च इंजन और प्ले स्टोर में हेराफेरी का लगा आरोपव्यापार
23 जुल॰ 2026, 8:23 pm (45 दिन पहले)· 0

टेक दिग्गज गूगल पर यूरोप में 8,900 करोड़ रुपये का जुर्माना, सर्च इंजन और प्ले स्टोर में हेराफेरी का लगा आरोप

यूरोपीय आयोग ने बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का गलत फायदा उठाने और प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के गंभीर आरोप में गूगल पर दो अलग अलग मामलों में कुल 8,900 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।

दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय टेक कंपनी गूगल को एक बार फिर से यूरोपीय यूनियन के सख्त एकाधिकार विरोधी नियमों के उल्लंघन का सामना करना पड़ा है। यूरोपीय आयोग ने बाजार में अपने एकछत्र दबदबे का गलत फायदा उठाने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के गंभीर आरोप में गूगल पर लगभग 8,900 करोड़ रुपये का भारी भरकम जुर्माना लगाया है। नियामकों द्वारा की गई गहन जांच के अनुसार, कंपनी ने अपने बेहद लोकप्रिय सर्च इंजन और डिजिटल प्ले स्टोर प्लेटफॉर्म का पूरी तरह से इस तरह इस्तेमाल किया, जिससे केवल उसके अपने खुद के बिजनेस और उत्पादों को ही फायदा हुआ। इसके परिणामस्वरूप अन्य छोटी और स्वतंत्र कंपनियों के लिए इस डिजिटल बाजार में टिकना लगभग नामुमकिन हो गया। टेक जगत में हड़कंप मचा देने वाले इस बड़े जुर्माने को मुख्य रूप से दो अलग अलग महत्वपूर्ण मामलों में बांटा गया है, जो दुनिया भर में कंपनी की कारोबारी कार्यप्रणाली, नैतिकता और व्यापारिक दबदबे पर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

सर्च नतीजों में भारी भेदभाव के लिए 460 मिलियन यूरो का दंड

इस अभूतपूर्व जुर्माने का पहला और सबसे बड़ा हिस्सा, जो 460 मिलियन यूरो का है, कंपनी के प्रमुख सर्च इंजन पर पक्षपातपूर्ण रवैये के लिए लगाया गया है। यूरोपीय आयोग की जांच टीम के सामने यह स्पष्ट रूप से आया कि गूगल अपने सर्च प्लेटफॉर्म पर अन्य व्यवसायों की तुलना में खुद की अनुषंगी सेवाओं को अनुचित तरीके से और जानबूझकर प्राथमिकता देता था। उदाहरण के लिए, जब कोई भी आम यूजर इंटरनेट पर किसी शहर में होटल, अगली फ्लाइट की बुकिंग या ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी कोई भी जानकारी खोजता था, तो सर्च रिजल्ट के पन्नों में गूगल सबसे ऊपर विशेष रूप से गूगल होटल्स, गूगल फ्लाइट्स और गूगल शॉपिंग के ही लिंक और विजेट दिखाता था। ऐसा लगातार करने से सीधे तौर पर प्रतिद्वंद्वी कंपनियों और छोटे ट्रैवल एजेंटों के लिंक सर्च परिणामों में काफी नीचे चले जाते थे। इसका सीधा और स्पष्ट असर यह हुआ कि अन्य स्वतंत्र व्यवसायों की वेबसाइटों पर ग्राहकों की पहुंच लगातार कम होती गई, जबकि दूसरी तरफ गूगल ने अपनी खुद की सेवाओं पर ट्रैफिक बढ़ाकर अरबों का भारी मुनाफा कमाया। आयोग का स्पष्ट रूप से मानना है कि दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन के रूप में अपने एकाधिकार का खुला दुरुपयोग करते हुए गूगल ने बाजार की निष्पक्षता और उपभोक्ता की सही जानकारी तक पहुंच को गंभीर चोट पहुंचाई है।

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प्ले स्टोर में डेवलपर्स पर पाबंदी लगाने के लिए 430 मिलियन यूरो

यूरोपीय संघ के नियामक आयोग द्वारा की गई इस ऐतिहासिक कार्रवाई का दूसरा बड़ा मामला सीधे तौर पर मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल सब्सक्रिप्शन की दुनिया से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए टेक दिग्गज पर 430 मिलियन यूरो का भारी जुर्माना तय किया गया है। यह पूरा जुर्माना गूगल प्ले स्टोर की सख्त और मनमानी स्टीयरिंग विरोधी नीतियों को लेकर है। दरअसल, जब कोई स्मार्टफोन यूजर किसी ऐप के भीतर कोई पेड सर्विस, गेमिंग पास या प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लेना चाहता है, तो कई बार वे ऐप डेवलपर्स अपनी खुद की बाहरी वेबसाइट पर वही समान प्लान बहुत सस्ते में उपलब्ध कराते हैं क्योंकि वहां उन्हें कोई कमीशन नहीं देना होता। लेकिन गूगल की कड़ी नीतियों के तहत, इन ऐप डेवलपर्स को अपने ग्राहकों को यह बताने की सख्त मनाही थी कि वे प्ले स्टोर के बाहर जाकर भी डिजिटल भुगतान कर सकते हैं। यूरोपीय संघ का यह स्पष्ट आरोप है कि गूगल ने यह पाबंदी केवल इसलिए लगाई ताकि मोबाइल ऐप के भीतर होने वाले हर छोटे बड़े ट्रांजैक्शन पर उसे अपना भारी कमीशन लगातार मिलता रहे। ऐसा करके गूगल ने न केवल डेवलपर्स की कारोबारी आजादी को बुरी तरह सीमित किया, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी उनके फायदे के सस्ते ऑफर्स की जानकारी से पूरी तरह दूर रखा।

गूगल की सीधी प्रतिक्रिया: छिन जाएंगी काम की कई सुविधाएं

इस भारी भरकम जुर्माने और यूरोपीय संघ के कड़े आदेशों के तुरंत बाद गूगल की तरफ से भी अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया और चेतावनी दी गई है। टेक कंपनी के प्रवक्ताओं का तर्क है कि यूरोप के इन नए और कड़े नियमों को अपने प्लेटफॉर्म पर लागू करने का सीधा मतलब यह है कि उन्हें अपने सर्च इंजन इंटरफेस से कई ऐसे लोकप्रिय और उपयोगी फीचर्स को तुरंत हटाना पड़ेगा जो इंटरनेट यूजर्स के बीच काफी पसंद किए जाते हैं। गूगल के अनुसार, इस बड़े बदलाव के कारण यूजर्स को होटलों की लाइव और सटीक कीमतें, उड़ानों का तुरंत विवरण, और रेस्टोरेंट की बुकिंग की तुरंत उपलब्धता जैसी त्वरित जानकारियां अब सर्च रिजल्ट के मुख्य पेज पर पहले की तरह नहीं दिखेंगी। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्ले स्टोर के मौजूदा सुरक्षित इकोसिस्टम में कोई भी बाहरी बदलाव करने और अनजान बाहरी पेमेंट गेटवे को अनुमति देने से पूरे एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म की साइबर सुरक्षा कमजोर हो सकती है, जिससे लाखों यूजर्स के निजी डेटा और वित्तीय सुरक्षा पर फ्रॉड का भारी जोखिम बढ़ सकता है।

भारत में भी गूगल पर पहले लग चुके हैं ऐसे ही गंभीर आरोप

गूगल के खिलाफ इस तरह की सख्त दंडात्मक कार्रवाई और जांच केवल यूरोपीय देशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत में भी यह कंपनी बिल्कुल ऐसे ही गंभीर आरोपों का सामना कर चुकी है और भारी हर्जाना भर चुकी है। भारत के प्रमुख बाजार नियामक, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने भी पिछले कुछ वर्षों में गूगल की इन एकाधिकारवादी नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। आपको बता दें कि साल 2022 में, सीसीआई ने स्मार्टफोन बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का गलत दुरुपयोग करने के लिए गूगल पर ₹1,338 करोड़ का एक बहुत बड़ा जुर्माना लगाया था। तब आयोग की जांच में यह आरोप पूरी तरह साबित हुआ था कि गूगल दुनिया भर की मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों पर एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ गूगल सर्च और क्रोम ब्राउजर को अनिवार्य रूप से पहले से इंस्टॉल करने का भारी दबाव डालता था, जिससे बाजार में किसी भी दूसरे सर्च इंजन को उभरने का कोई मौका ही नहीं मिलता था। इसके अलावा, प्ले स्टोर बिलिंग सिस्टम से जुड़े एक और मामले में भी सीसीआई ने कंपनी पर ₹936 करोड़ का अलग से जुर्माना ठोका था, क्योंकि गूगल भारतीय ऐप डेवलपर्स को सिर्फ और सिर्फ अपना ही पेमेंट सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए बुरी तरह मजबूर कर रहा था। इन दोनों मामलों से यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है कि चाहे भारत हो या यूरोप, दुनिया भर में गूगल की कारोबारी नीतियां लगभग एक जैसी ही जांच और विवादों के घेरे में लगातार रही हैं।

सवाल-जवाब

यूरोपीय यूनियन ने गूगल पर कितना जुर्माना लगाया है?
यूरोपीय यूनियन ने गूगल पर लगभग 8,900 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।
गूगल पर यह जुर्माना क्यों लगाया गया?
गूगल पर अपने सर्च इंजन में खुद की सेवाओं को अनुचित बढ़ावा देने और प्ले स्टोर पर ऐप डेवलपर्स को सस्ते प्लान की जानकारी देने से रोकने के कारण यह जुर्माना लगाया गया।
प्ले स्टोर मामले में गूगल का क्या नियम था?
गूगल का नियम था कि ऐप डेवलपर्स ग्राहकों को यह नहीं बता सकते कि प्ले स्टोर के बाहर उनकी अपनी वेबसाइट पर कोई सस्ता सब्सक्रिप्शन प्लान उपलब्ध है।
क्या भारत में भी गूगल पर ऐसा जुर्माना लग चुका है?
हाँ, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 2022 में एंड्रॉइड और प्ले स्टोर बिलिंग सिस्टम में एकाधिकार का दुरुपयोग करने के लिए गूगल पर ₹1,338 करोड़ और ₹936 करोड़ के दो अलग अलग जुर्माने लगाए थे।
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