त्योहारों के दस्तक देते ही ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर भारी छूट, आकर्षक कैशबैक और सीमित समय की डील्स की बहार आ जाती है। हर कोई पसंदीदा गैजेट्स, कपड़े और घर का सामान कम दामों में खरीदने की होड़ में लग जाता है। लेकिन बचत की यह जल्दबाजी कई बार खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान में धकेल देती है। साइबर जालसाज इसी मौके की ताक में रहते हैं और आकर्षक छूट का मुखौटा पहनकर लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाने के नए-नए हथकंडे अपनाते हैं। सोशल मीडिया विज्ञापनों पर आया एक संदेहास्पद लिंक, लुभावने मैसेज या किसी अनजान सेलर पर किया गया अंधा भरोसा पलक झपकते ही आपकी मेहनत की गाढ़ी कमाई खाली कर सकता है। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या यूपीआई (UPI) के जरिए कोई भी लेनदेन पूरा करने से पहले पांच सुरक्षा पहलुओं की बारीकी से जांच करना बेहद जरूरी है।
वेबसाइट का यूआरएल और प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता जांचें
किसी भी ई-कॉमर्स पोर्टल पर अपने कार्ड की गोपनीय जानकारी या यूपीआई पिन दर्ज करने से पहले यह पक्का करना चाहिए कि आप वास्तविक आधिकारिक वेबसाइट पर ही हैं। ऑनलाइन ठग अक्सर नामी और स्थापित ई-कॉमर्स कंपनियों की हूबहू दिखने वाली क्लोन वेबसाइट बना लेते हैं। इन नकली पेजों के डोमेन नेम में स्पेलिंग का बहुत बारीक अंतर होता है, जैसे अमेजन (amazon) की जगह amzon या फ्लिपकार्ट (flipkart) की जगह flipkrt लिख दिया जाता है। सोशल मीडिया फीड, वॉट्सऐप या टेक्स्ट मैसेज पर अप्रत्याशित भारी छूट का दावा करने वाले किसी भी अनजान लिंक पर कभी क्लिक न करें। यदि किसी कारणवश ऐसे लिंक खुल भी जाएं, तो वहां किसी भी सूरत में ऑनलाइन भुगतान करने या निजी विवरण साझा करने से बचना चाहिए।
अनजान सेलर और संदिग्ध भुगतान माध्यमों से दूरी बनाएं
मार्केटप्लेस पर किसी अज्ञात सेलर से खरीदारी करने से पहले सतर्कता बरतना आवश्यक है। यदि किसी सामान की कीमत बहुत कम दिख रही है, तो तुरंत भुगतान करने के बजाय विक्रेता की प्रोफाइल, पुराने ग्राहकों के रिव्यू, रिटर्न और रिफंड पॉलिसी तथा ग्राहक सेवा से जुड़ी जानकारियों की पड़ताल करें। अक्सर जालसाज प्लेटफॉर्म के सुरक्षित पेमेंट गेटवे को बायपास करने का प्रयास करते हैं। यदि कोई विक्रेता आधिकारिक शॉपिंग ऐप से बाहर निकलकर सीधे किसी बैंक खाते में पैसे भेजने, किसी क्यूआर कोड को स्कैन करने या मैसेजिंग ऐप पर व्यक्तिगत चैट के माध्यम से सौदा तय करने का दबाव बनाए, तो इसे सीधा धोखाधड़ी का संकेत माना जाना चाहिए।
भुगतान स्क्रीन पर दिख रही जानकारी और यूपीआई के नियमों को समझें
डिजिटल पेमेंट को अंतिम मंजूरी देते समय मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाले हर विवरण को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। डिजिटल लेनदेन का बुनियादी नियम है कि खाते में पैसे प्राप्त करने या रिफंड लेने के लिए कभी भी UPI PIN दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है। यदि कोई व्यक्ति किसी पुरस्कार या कैशबैक देने के बहाने पिन डालने को कहता है, तो वह शत-प्रतिशत धोखाधड़ी की साजिश है। इसके अलावा, क्रेडिट या डेबिट कार्ड से खरीदारी करते समय वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) वाली स्क्रीन पर मर्चेंट का नाम और कटने वाली कुल राशि को जरूर मिलाना चाहिए। किसी भी असुरक्षित अथवा अपरिचित वेबसाइट पर भविष्य के लिए अपने कार्ड का विवरण कभी भी सेव नहीं करना चाहिए।
फ्लैश सेल और उल्टी गिनती के मनोवैज्ञानिक दबाव में न आएं
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चलने वाली फ्लैश सेल में अक्सर उल्टी गिनती वाले टाइमर या 'सिर्फ 5 मिनट बाकी' जैसे चेतावनी संदेश दिखाए जाते हैं। ऐसे संदेश ग्राहकों के दिमाग में तात्कालिकता और हड़बड़ी पैदा करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं ताकि वे बिना सोचे-समझे निर्णय ले लें। फर्जी वेबसाइट्स इस घबराहट का फायदा उठाकर बेहद सस्ते गैजेट्स का लालच देती हैं और खरीदारों से पैसे ऐंठ लेती हैं। किसी भी सौदे को अंतिम रूप देने से पूर्व उसी वस्तु की वास्तविक कीमत दो से तीन अन्य विश्वसनीय पोर्टल्स पर जाकर जांच लें। अंतिम भुगतान पृष्ठ पर डिलीवरी शुल्क, पैकेजिंग लागत और अतिरिक्त टैक्स मिलाकर बनने वाले कुल बिल की समीक्षा करें। यदि कोई सेलर या वेबसाइट भारी छूट या लॉटरी का इनाम देने के नाम पर अग्रिम प्रोसेसिंग फीस जमा करने की शर्त रखे, तो समझ लें कि यह पूरी तरह से ठगी का जाल है।
ओटीपी और बैंकिंग पासवर्ड की गोपनीयता बनाए रखें
आपका ओटीपी, यूपीआई पिन और नेट बैंकिंग पासवर्ड पूरी तरह व्यक्तिगत और गोपनीय होते हैं। कोई भी वैध बैंक, ई-कॉमर्स कंपनी अथवा कस्टमर केयर प्रतिनिधि फोन कॉल, एसएमएस या ईमेल के जरिए ग्राहकों से ऐसी गोपनीय जानकारी कभी नहीं मांगता। साइबर अपराधी अक्सर पेमेंट अटक जाने, असफल भुगतान को सुधारने या तुरंत रिफंड प्रोसेस कराने का बहाना बनाकर कॉल करते हैं और बातों में उलझाकर ओटीपी पूछ लेते हैं। ऑनलाइन ऑर्डर, डिलीवरी या भुगतान में किसी भी समस्या के समाधान के लिए हमेशा केवल अधिकृत ऐप के भीतर मौजूद आधिकारिक सहायता अनुभाग का ही उपयोग करना चाहिए।

















