पारंपरिक पढ़ाई पूरी करने के बाद जहां अधिकांश युवा शहरों की ओर नौकरी की तलाश में रुख करते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक युवा ने अपनी पारिवारिक विरासत को नया आयाम देकर स्वरोजगार की मिसाल पेश की है। निपानी गांव के रहने वाले पोखन लाल साहू ने बीकॉम तक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद किसी निजी या सरकारी नौकरी में जाने के बजाय अपने परिवार के खानपान के काम को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। आज उनका मोबाइल चाट सेंटर क्षेत्रीय साप्ताहिक हाट-बाजारों में काफी लोकप्रिय हो चुका है।
पिता की विरासत को 11 साल पहले संभाला
इस स्ट्रीट फूड कारोबार की नींव सबसे पहले पोखन लाल साहू के पिता ने रखी थी। लगभग 11 वर्ष पहले पोखन ने इस व्यवसाय की कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले ली थी। वाणिज्य स्नातक होने के बावजूद उन्होंने नौकरी तलाशने में समय बिताने के बजाय पुश्तैनी काम को ही अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। समय के साथ उन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझा और स्थानीय बाजारों के हिसाब से अपनी बिक्री की रणनीति में जरूरी बदलाव किए।
एक लाख रुपये खर्च कर ऑटो को बनाया फूड वैन
अपने व्यवसाय को एक नया रूप और गतिशीलता देने के लिए पोखन ने एक पुराना ऑटो खरीदा। इसके बाद उन्होंने इसे मॉडिफाई करवाकर एक सुसज्जित चलता-फिरता चाट सेंटर तैयार कराया। पुराने ऑटो की खरीदारी और उसकी बॉडी को फूड काउंटर के रूप में ढालने में उनका कुल खर्च लगभग 1 लाख रुपये आया। इस नवाचार का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि उन्हें किसी एक जगह पर सीमित नहीं रहना पड़ता और वे सामान लेकर आसानी से अलग-अलग बाजारों तक पहुंच जाते हैं।
20 रुपये में फ्राई चाट और रोजाना 3000 रुपये से अधिक की कमाई
पोखन के इस मोबाइल आउटलेट पर चाट और गुपचुप की सबसे अधिक मांग रहती है। यहां मिलने वाली विशेष फ्राई चाट मात्र 20 रुपये में बेची जाती है। इसे बनाने के लिए सभी प्रमुख सामग्रियों को पहले अच्छी तरह फ्राई किया जाता है और उसके बाद मसाले व अन्य चीजें मिलाकर चाट तैयार की जाती है। इसी विशेष विधि के कारण इसका स्वाद अन्य चाट से अलग होता है। पोखन प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक आसपास के 4 से 5 प्रमुख बाजारों में अपनी सेवाएं देते हैं, जिससे उनकी प्रतिदिन की आय 3000 रुपये से अधिक हो जाती है।





















